Sania Mirza: भारत की पूर्व टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा दुबई में तनाव भरे दिन बिताने के बाद ईद के लिए हैदराबाद लौट आई हैं. दुबई में वह अपने बेटे के साथ रहती हैं, लेकिन इस क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं और अनिश्चितता के माहौल के बीच उन्होंने भारत लौटने का फ़ैसला किया. मिर्ज़ा ने बताया कि उन्होंने भारत आने का फ़ैसला तब किया, जब उन्होंने अपने सिर के ऊपर से लड़ाकू विमानों के गुज़रने की आवाज़ सुनी और उन्हें पता चला कि एक रोके गए मिसाइल का मलबा अल बरशा में उनके घर के पास ही गिरा था. मिर्ज़ा ने कहा, "हमने अपने घर के ऊपर से लड़ाकू विमानों के गुज़रने की आवाज़ सुनी और उन्हें रोका जाते हुए देखा."
"हमारे घर से लगभग 400-500 मीटर की दूरी पर मलबा गिरा था." हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें कभी सीधे तौर पर असुरक्षित महसूस नहीं हुआ, लेकिन अनिश्चितता - खासकर घर में एक छोटे बच्चे के होने की वजह से - उन्हें कुछ समय के लिए वहां से चले आने का फ़ैसला लेने पर मजबूर कर दिया.
उन्होंने कहा, "आप नहीं चाहते कि आपका बच्चा ऐसी स्थिति से गुज़रे. वह हमसे कई तरह के सवाल पूछ रहा था." "हमें असुरक्षित तो महसूस नहीं हुआ, लेकिन अनिश्चितता और बेचैनी ज़रूर महसूस हुई." मिर्ज़ा साल का ज़्यादातर समय दुबई में ही बिताती हैं, जहां उनका सात साल का बेटा इज़हान स्कूल जाता है. उन्होंने बताया कि परिवार इस बात का फ़ैसला स्थिति के आधार पर करेगा कि उन्हें वापस कब लौटना है.
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उन्होंने कहा, "अगले हफ़्ते से स्कूल शुरू होने वाले हैं, लेकिन हम स्थिति पर नज़र रखेंगे." "मैं ख़ुशकिस्मत हूं कि मैं हैदराबाद वापस आ सकती हूं और यहां मेरे पास अपना घर और परिवार है."
ईद पर घर वापसी
मिर्ज़ा ने बताया कि रमज़ान के दौरान हैदराबाद वापस आना उनकी एक पुरानी परंपरा है. उन्होंने कहा, "मैं हर ईद पर यहां आती हूं." "हम रमज़ान का आख़िरी हफ़्ता हैदराबाद में ही बिताने की कोशिश करते हैं, क्योंकि यहां के रमज़ान का अनुभव ही कुछ और होता है. परिवार के साथ रहना हमेशा ही अच्छा लगता है." उन्होंने बताया कि उनके बेटे को भी यहां आना उतना ही पसंद है, जितना उन्हें. मिर्ज़ा ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा, "उसे अपने दादा-दादी के पास आना बहुत पसंद है, क्योंकि यहां कोई भी उसकी किसी बात के लिए मना नहीं करता." "वह पहले ही काफ़ी यात्रा कर चुका है, इसलिए वह कहीं भी आसानी से घुल-मिल जाता है."
अगली सानिया को तैयार करना
पेशेवर टेनिस से संन्यास लेने के बाद, मिर्ज़ा ने अपना ध्यान एक नए प्रोजेक्ट 'नेक्स्ट सेट' पर केंद्रित किया है. यह एक ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य भारत की युवा महिला खिलाड़ियों को सहयोग देना है. उन्होंने कहा, "यह सिर्फ़ एक बिज़नेस नहीं है." "यह अगली पीढ़ी की मदद करने के बारे में है." इस कार्यक्रम के ज़रिए, युवा खिलाड़ियों को कोच, फ़िज़ियोथेरेपिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे सहयोगी स्टाफ़ के खर्च की चिंता किए बिना अपनी ट्रेनिंग पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर सकें. मिर्ज़ा ने कहा कि यह आइडिया उन्हें सालों तक यह पूछे जाने के बाद आया कि भारत ने उनके जैसा कोई दूसरा खिलाड़ी क्यों नहीं बनाया. उन्होंने कहा, "मैं उस सवाल का जवाब देते-देते थक गई थी." "इसलिए मैंने सोचा कि मुझे इस बारे में कुछ करने की कोशिश करनी चाहिए."
टॉप पर पहुंचने का लंबा सफ़र
मिर्ज़ा का मानना है कि भारत को एक और वर्ल्ड-क्लास महिला टेनिस खिलाड़ी तैयार करने से पहले अभी कुछ और सफ़र तय करना बाकी है. उन्होंने कहा, "सबसे पहले हमें असलियत पर आधारित लक्ष्य तय करने होंगे." "हम चाहते हैं कि भारतीय महिलाएं नियमित रूप से ग्रैंड स्लैम में वापसी करें और दुनिया के टॉप 100 या टॉप 150 खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाएं." उन्होंने कहा कि कई वजहें - जैसे कि पैसे की कमी, इंफ्रास्ट्रक्चर और जूनियर से प्रोफ़ेशनल टेनिस में जाने का मुश्किल दौर - अक्सर होनहार खिलाड़ियों की राह में रुकावट बन जाती हैं. उन्होंने कहा, "सिर्फ़ एक ही दिक्कत नहीं है." "कभी-कभी खिलाड़ी स्थिरता के लिए कॉलेज का रास्ता चुन लेते हैं, तो कभी पैसे की कमी आड़े आती है, और कभी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी." मिर्ज़ा के लिए अब लक्ष्य सीधा-सा है: एक ऐसा माहौल तैयार करना जहां होनहार युवा खिलाड़ियों को वह मदद मिल सके जिसकी उन्हें ज़रूरत है. उन्होंने कहा, "उन्हें बस अपने खेल पर ध्यान देना चाहिए."
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