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60Hz या 120Hz...मोबाइल में इन रिफ्रेश रेट का क्या है काम? Mobile खरीदने से पहले जान लें

रिफ्रेश रेट का मतलब है कि आपके फोन की स्क्रीन एक सेकंड में कितनी बार खुद को अपडेट करती है. इसे हर्ट्ज यानी Hz में मापा जाता है.

60Hz या 120Hz...मोबाइल में इन रिफ्रेश रेट का क्या है काम? Mobile खरीदने से पहले जान लें

आपने अक्सर मोबाइल की लॉन्चिंग या फिर एड्स के दौरान उसके रिफ्रेश रेट (Refresh Rate) के बारे में जरूर सुना होगा. हालांकि ज्यादातर लोग मोबाइल की बैटरी, कैमरा और स्टोरेज के अलावा बाकि किसी फीचर्स पर खास ध्यान नहीं देते. लेकिन मोबाइल में उसका रिफ्रेश रेट भी काफी मायने रखता है. 60Hz, 90Hz, 120Hz या 240Hz जैसे शब्द सुनकर कई लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं, इसीलिए भी समझ नहीं पाते कि आखिर इससे होता क्या है. लेकिन बता दें कि रिफ्रेश रेट आपकी मोबाइल स्क्रॉलिंग, गेमिंग और वीडियो से जुड़ा होता है. 

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रिफ्रेश रेट क्या है?
रिफ्रेश रेट का मतलब है कि आपके फोन की स्क्रीन एक सेकंड में कितनी बार खुद को अपडेट करती है. इसे हर्ट्ज यानी Hz में मापा जाता है. अगर फोन की डिस्प्ले 60Hz है, तो वह एक सेकंड में 60 बार रिफ्रेश होगी. इसी तरह 120Hz डिस्प्ले एक सेकंड में 120 बार अपडेट होती है. जितनी ज्यादा बार स्क्रीन अपडेट होगी, उतना ही स्मूद आपको मूवमेंट दिखाई देगा. यही वजह है कि हाई रिफ्रेश रेट वाली स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग और एनिमेशन ज्यादा फास्ट और स्मूद लगते हैं.

हाई रिफ्रेश रेट से फोन ज्यादा स्मूद
जब रिफ्रेश रेट ज्यादा होता है, तो स्क्रीन का रिस्पॉन्स टाइम कम हो जाता है. इसका मतलब यह है कि आप जैसे ही स्क्रीन को टच करते हैं, फोन तुरंत रिएक्ट करता है. गेम खेलते समय या तेजी से सोशल मीडिया स्क्रॉल करते वक्त यह फर्क साफ महसूस होता है. 120Hz या उससे ज्यादा रिफ्रेश रेट वाले फोन में लेग कम होता है और मूवमेंट ज्यादा नैचुरल लगता है.

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टच सैंपल रेट और रिफ्रेश रेट में अंतर
अक्सर लोग टच सैंपल रेट और रिफ्रेश रेट को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग चीजें हैं. टच सैंपल रेट बताता है कि स्क्रीन एक सेकंड में कितनी बार आपकी उंगली के टच को पहचानती है. ज्यादा टच सैंपल रेट होने से गेमिंग में फायदा होता है, क्योंकि फोन आपकी हर मूवमेंट को जल्दी समझ पाता है. कई गेमिंग फोन्स में टच सैंपल रेट रिफ्रेश रेट से भी ज्यादा होता है.

अब LTPO तकनीक क्या है?
हाई रिफ्रेश रेट का सबसे बड़ा नुकसान बैटरी पर पड़ता है. इसी समस्या को हल करने के लिए कंपनियों ने वैरिएबल रिफ्रेश रेट और LTPO तकनीक को अपनाया है. इसमें फोन खुद तय करता है कि किस समय कितनी रिफ्रेश रेट की जरूरत है. जब आप गेम खेलते हैं या स्क्रॉल करते हैं, तब डिस्प्ले हाई रिफ्रेश रेट पर काम करती है. वहीं फोटो देखने या स्टैटिक कंटेंट के समय यह रिफ्रेश रेट कम कर देती है, जिससे बैटरी की बचत होती है.

हाई रिफ्रेश रेट फोन
अगर आप मोबाइल पर ज्यादा गेम खेलते हैं, सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग पसंद करते हैं या स्मूद एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो 90Hz या 120Hz डिस्प्ले वाला फोन आपके लिए अच्छा रहेगा. लेकिन अगर आपका इस्तेमाल कॉलिंग, चैटिंग और वीडियो देखने तक सीमित है और बैटरी लाइफ ज्यादा जरूरी है, तो 60Hz डिस्प्ले भी पूरी तरह पर्याप्त है. आज के समय में अच्छी बात यह है कि हाई रिफ्रेश रेट सिर्फ महंगे फोन्स तक सीमित नहीं रहा और बजट फोन्स में भी यह फीचर मिलने लगा है.

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