- पावर बैंक और अलग से रखी गई लिथियम बैटरी को चेक इन सामान के साथ नहीं रखा जा सकता है.
- इसे हैंड बैग में रखना होता है, जिसे ट्रैवल कर रहा यात्री हमेशा अपने साथ ही रखता हो.
- भारतीय एयरलाइंस की गाइडलाइन के मुताबिक पावर बैंक और अलग से रखी गई लिथियम बैटरी चेक-इन सामान में नहीं रख सकते.
एक पावर बैंक ने स्विट्जरलैंड से अमेरिका जा रही एक फ्लाइट को अटलांटिक महासागर के ऊपर अपना रास्ता बदलने और आयरलैंड में उतारने पर मजबूर कर दिया. रविवार को स्विस फ्लाइट LX52 ज्यूरिख से बोस्टन जा रही थी. विमान में अचानक धुआं दिखाई दिया. जांच में एक यात्री का पावर बैंक इसके पीछे मिला. चालक दल ने आपात स्थिति घोषित की और विमान को डबलिन उतारा गया. विमान में 206 यात्री थे और किसी के घायल होने की खबर नहीं है.
पिछले कुछ हफ्तों में विमान में बैटरी से जुड़े कई मामले सामने आए हैं. इससे एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि आखिर मोबाइल, ईयरफोन, पावर बैंक और लैपटॉप जैसी रोजमर्रा की चीजों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी विमान के लिए इतनी बड़ी चिंता क्यों बन रही है?

भारत में पहले से हैं कड़े नियम
ऐसे खतरे को देखते हुए भारत में पहले से नियमों को बहुत कड़ा रखा गया है. मौजूदा सख्त गाइडलाइंस के मुताबिक-
- पावर बैंक और अलग से रखी गई लिथियम बैटरी को चेक इन सामान के साथ नहीं रखा जा सकता है.
- इसे हैंड बैग में रखना होता है, जिसे ट्रैवल कर रहा यात्री हमेशा अपने साथ ही रखता हो.
- भारतीय एयरलाइंस की मौजूदा गाइडलाइन के मुताबिक पावर बैंक और अलग से रखी गई लिथियम बैटरी को चेक-इन सामान में नहीं रखा जा सकता.
- इन्हें उस हैंड बैग में रखना होता है जो यात्रा के दौरान हमेशा आपके पास मौजूद रहने वाला हो.
- यानी इसे ट्रैवल कर रहे यात्री की पहुंच में रखने की सलाह दी जाती है.
- उड़ान के दौरान इनके इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक है.
- यानी पावर बैंक से किसी भी गैजेट को चार्ज करना वर्जित है
- पावर बैंक को उड़ान के दौरान चार्ज करना भी प्रतिबंधित है.

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इंडिगो के मौजूदा नियमों के अनुसार पावर बैंक और अतिरिक्त लिथियम बैटरियां हाथ में लेकर जाने वाले सामान में ही रखना चाहिए. यहां तक कि इसे फ्लाइट में ट्रैवल करने के दौरान ओवरहेड बिन या ओवरहेड कंपार्टमेंट के सामानों के साथ या खाने के साथ रखने की अनुमति नहीं है.
एयर इंडिया भी पावर बैंक को अतिरिक्त बैटरी मानता है. उसके नियमों में पावर बैंक को हाथ के सामान में रखने और शॉर्ट सर्किट से बचाने के लिए अलग-अलग सुरक्षित रखने की बात कही गई है.
यानी दुनिया में सामने आ रही घटनाओं के बीच भारत में इसे लेकर निर्देश स्पष्ट है. पावर बैंक को सामान में छिपाकर नहीं, ऐसी जगह रखें जहां जरूरत पड़ने पर चालक दल तुरंत उस तक पहुंच सके.

स्विस फ्लाइट में आखिर हुआ क्या?
स्विस की LX52 फ्लाइट एयरबस ए330 थी. ज्यूरिख से बोस्टन जा रहे विमान में अटलांटिक के ऊपर धुआं दिखाई दिया. धुएं की वजह बिजनेस क्लास में रखा एक पावर बैंक बताया गया. चालक दल ने स्थिति संभाली और विमान को डबलिन की ओर मोड़ दिया. सभी यात्री सुरक्षित उतर गए. स्विस एयरलाइंस के लिए यह कुछ ही हफ्तों के भीतर बैटरी से जुड़ी दूसरी गंभीर घटना है.
इससे पहले जुलाई के अंतिम हफ्ते में ज्यूरिख से न्यूयॉर्क जा रही स्विस एयरलाइंस की दूसरी फ्लाइट को अमेरिकी राज्य बांगोर में उतारना पड़ा था. उस मामले में बाद की तकनीकी जांच में पता चला कि हेडफोन का चार्जिंग केस सीट के अंदर फंस गया था. वह क्षतिग्रस्त होकर गर्म हो गया और उससे धुआं निकलने लगा.
इन घटनाओं के बाद स्विस ने यात्रियों को अपने बैटरी नियमों की फिर याद दिलाई है. एयरलाइन ने 2026 की शुरुआत से ही उड़ान के दौरान पावर बैंक के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है.

चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस
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जुलाई में चाइना ईस्टर्न की फ्लाइट में लगी थी आग
24 जुलाई को चाइना ईस्टर्न की एक घरेलू उड़ान में ओवरहेड सामान रखने वाले खाने में रखा पावर बैंक आग पकड़ बैठा. इस घटना ने फिर दिखाया कि विमान के ऊपरी हिस्से में बैटरी वाला सामान रखना क्यों चिंता का विषय है. अगर बैटरी में आग लगती है और वह यात्री की नजर से दूर हो, तो चालक दल को धुआं या गर्मी महसूस होने तक कुछ समय लग सकता है. ये वो ही समय है जब छोटी सी घटना बड़ा रूप ले सकती है.

बैटरी से आग लगने के खतरे को बताने वाले स्टिकर
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लिथियम-आयन बैटरी आखिर आग कैसे पकड़ती है?
लिथियम-आयन बैटरी कम वजन में काफी ऊर्जा जमा कर सकती है. इसी वजह से मोबाइल फोन से लेकर लैपटॉप, टैबलेट, कैमरा, स्मार्टवॉच, ईयरबड्स, स्मार्ट ग्लास, पावर बैंक समेत कई अन्य डिवाइस में इसका इस्तेमाल होता है.
लेकिन अगर बैटरी किसी वजह से क्षतिग्रस्त हो जाए, उसमें उत्पादन के दौरान ही कोई खराबी हो जाए, वह जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाए या उसमें शॉर्ट सर्किट हो जाए तो उसके अंदर बहुत तेज गर्मी पैदा हो सकती है. इसे थर्मल रनअवे कहा जाता है. इस स्थिति में बैटरी खुद तेजी से गर्म होती जाती है. ऐसे में आग लगने या आसपास के सामानों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है.

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विमान में आग बुझाना जमीन पर लगी आग से अधिक मुश्किल क्यों?
जमीन पर किसी बैटरी के जरिए लगी आग अगर विकराल रूप ले ले तो फायर ब्रिगेड की उस तक पहुंच बनाई जा सकती है. लेकिन विमानों में स्थिति बिल्कुल अलग होती है.
हजारों फीट की ऊंचाई पर चालक दल को सीमित जगह में आग या धुएं से निपटना होता है. अगर डिवाइस सीट के अंदर फंस गया हो या सामान रखने के खाने में छिपा हो तो उसे पहचानना भी मुश्किल हो सकता है.
यही वजह है कि विमानन सुरक्षा का जोर केवल आग बुझाने पर नहीं, बल्कि आग को जल्दी पहचानने पर भी होती है.

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पावर बैंक को चेक-इन सामान में क्यों नहीं रखना चाहिए?
केबिन में रखा पावर बैंक धुआं देने लगे तो यात्री या चालक दल उसे तुरंत देख सकते हैं. लेकिन चेक-इन बैग विमान के ऐसे हिस्से में होता है जहां यात्री और चालक दल की सीधी पहुंच नहीं होती.
इसीलिए पावर बैंक और अतिरिक्त लिथियम बैटरी को चेक-इन सामान में रखना प्रतिबंधित है. भारत में भी एयर इंडिया और इंडिगो की मौजूदा गाइडलाइन यही कहती है.

क्या मोबाइल फोन भी खतरनाक है?
सामान्य हालत में मोबाइल फोन लेकर विमान में यात्रा करना खतरनाक नहीं है. आधुनिक उपकरणों में बैटरी की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी इंतजाम होते हैं.
खतरा तब बढ़ता है जब बैटरी क्षतिग्रस्त हो, फूल गई हो, असामान्य रूप से गर्म हो रही हो या उसमें कोई खराबी हो.
इसलिए अगर फोन या कोई दूसरा उपकरण अचानक बहुत गर्म हो जाए, धुआं निकलने लगे या जलने जैसी गंध आए तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत चालक दल को सूचना देना सबसे सुरक्षित कदम है.

सीट में गिरा मोबाइल या ईयरफोन खुद निकालना क्यों गलत हो सकता है?
स्विस एयरलाइंस की जुलाई वाली घटना इसका अच्छा उदाहरण है. हेडफोन का चार्जिंग केस सीट के अंदर फंस गया था और दबने के कारण गर्म हो गया. इसलिए अगर कोई बैटरी वाला उपकरण सीट और उसके हिस्से के बीच गिर जाए तो सीट को हिलाकर या हाथ डालकर उसे निकालने की कोशिश करना जोखिम बढ़ा सकता है.
ऐसी स्थिति में चालक दल को बताना बेहतर है. उनके पास इससे निपटने की प्रक्रिया और उपकरण होते हैं.

यात्रियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
यात्रा से पहले अपनी एयरलाइन के मौजूदा नियम जरूर जांचें, क्योंकि बैटरी की क्षमता और एयरलाइन के अनुसार कुछ शर्तें अलग हो सकती हैं. पावर बैंक को चेक-इन बैगेज में न रखें. उसे हाथ के सामान में और अपनी पहुंच में रखें. ऊपर वाले सामान रखने के खाने में रखने से बचें.
बैटरी के टर्मिनल को सिक्के, चाबी या दूसरी धातु की वस्तुओं से संपर्क में न आने दें. जरूरत हो तो बैटरी को सुरक्षात्मक कवर या अलग पैकेट में रखें.
क्षतिग्रस्त, फूली हुई या असामान्य रूप से गर्म हो रही बैटरी वाले मोबाइल या अन्य डिवाइस को फ्लाइट में लेकर न जाएं.
और उड़ान के दौरान पावर बैंक का इस्तेमाल या चार्जिंग तभी करें जब आपकी एयरलाइन इसकी अनुमति देती हो. कई भारतीय एयरलाइंस ने इसके इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है.
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