विज्ञापन

नीम करोली बाबा के आश्रम से लौटकर Steve Jobs ने क्या कहा था? फिर बना दिया Apple

'Hanuman Ansh' मूवी के बीच नीम करोली बाबा फिर चर्चा में आ गए हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि Apple बनाने से पहले Steve Jobs क्यों आए थे कैंची धाम और भारत से लौटकर क्या बोले?

नीम करोली बाबा के आश्रम से लौटकर Steve Jobs ने क्या कहा था? फिर बना दिया Apple

Hanuman Ansh मूवी अभी बॉक्स-ऑफिस पर धूम मचा रही है. नीम करोली बाबा के जीवन पर बनी इस मूवी (हनुमान अंश) को दर्शक काफी ज्यादा पसंद कर रहे हैं. असल में भी नीम करोली बाबा के कई अनुयायी हैं, जो उनसे काफी प्रभावित रहते हैं. आमलोगों के अलावा कई स्टार्स और टेक दिग्गज भी आध्यात्मिक संत नीम करोली बाबा से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाए. अभी सोशल मीडिया पर Apple के फाउंडर Steve Jobs की भी चर्चा हो रही है. 

असमंजस भरे दौर में भारत पहुंचे थे स्टीव जॉब्स

आपको बता दें कि Apple के फाउंडर Steve Jobs उनसे मिलने भारत आए थे. 1970 के दशक के मध्य में Steve Jobs अपने पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के असमंजस भरे दौर में उत्तराखंड के कैंची में स्थित नीम करोली बाबा के आश्रम पहुंचे थे. हालांकि, कई लोगों को नहीं पता है कि जब वे नीम करोली बाबा के आश्रम और भारत से वापस लौटे तो उन्होंने इसके बारे में क्या कहा. 

फोटो- आश्रम की वेबसाइट से

फोटो- आश्रम की वेबसाइट से

स्टीव जॉब्स Apple बनाने से पहले भौतिकी संसार से अलग कुछ तलाश कर रहे थे. इसी बीच उन्हें सुझाव मिला कि वे भारत जाए. जिसके बाद उन्होंने भारत की यात्रा की और नीम करोली बाबा के आश्रम पहुंचे. हालांकि, नीम करौली बाबा का 1973 में निधन हो चुका था. लेकिन स्टीव जॉब्स ने आश्रम के शांत वातावरण को महसूस करते हुए और बाबा के शिष्यों से बातचीत करते हुए वहां समय बिताया. ये एक्सपीरियंस जॉब्स के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. कहा जाता है कि इसी अनुभव ने उन्हें क्लियरिटी और मोटिवेशन की.जिसने आगे चलकर Apple की डिजाइन फिलॉसफी को शेप दिया.

कई जगहों की यात्रा करने पर बदल गया अनुभव

The Juggernaut के अनुसार, अपनी भारत यात्रा के दौरान स्टीव जॉब्स हरिद्वार से नैनीताल और मनाली भी गए. उन्होंने उत्तर भारत के कई पवित्र स्थलों का दौरा किया. स्थानीय लोगों के साथ बिताए समय ने उन्हें पूरब और पश्चिम के बीच के अंतर को समझने में मदद की.

उन्होंने अपनी 1974 की यात्रा के बारे में कहा कि "भारत के ग्रामीण इलाकों के लोग हमारी तरह अपनी बुद्धि (इंटेलेक्ट) का इस्तेमाल नहीं करते हैं. वे इसके बजाय अपनी इन्ट्यूशन का इस्तेमाल करते हैं. उनकी इन्ट्यूशन दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में कहीं अधिक विकसित है. इन्ट्यूशन एक बहुत शक्तिशाली चीज है, मेरी राय में बुद्धि से भी अधिक शक्तिशाली. इसका मेरे काम पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है."

Latest and Breaking News on NDTV

सात महीने में चेंज हो गई पर्सनलिटी

जॉब्स ने भारत में सात महीने बिताए. यहां की संस्कृति को अपनाया और एक डीप पर्सनलिटी चेंज से गुजरे. अमेरिका वापस लौटने पर उन्होंने खुद को अपने मां-पिता के लिए "पहचानने में न आने वाला" बताया.

पूरी यात्रा के दौरान एक किताब उनके साथ रही. आइजैकसन की जीवनी के अनुसार, जॉब्स ने परमहंस योगानंद की "Autobiography of a Yogi" पहली बार किशोरावस्था में पढ़ी थी. फिर भारत में इसे दोबारा पढ़ा और इसके बाद अपने जीवन भर हर साल एक बार इसे पढ़ना जारी रखा.

अपनी इस यात्रा को याद करते हुए जॉब्स ने कहा था, "ये एक ऐसा अनुभव था जिसने सादगी और फोकस को लेकर मेरे नजरिए को गढ़ा. इसने मुझे अपने विजन में स्पष्टता के महत्व को समझने में मदद की." बाद में जॉब्स ने Facebook के को-फाउंडर Mark Zuckerberg सहित अन्य लोगों को भी इस आश्रम जाने की सलाह दी थी. 

ये भी पढ़ें- नया फोन लेने का प्लान? इस महीने लॉन्च हो रहे ये दमदार मोबाइल, iPhone से OPPO तक शामिल

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Hanuman Ansh, Steve Jobs, Neem Karoli Baba Ashram, Steve Jobs Apple, Apple
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com