कंटेंट क्रिएटर्स के दिलों पर राज करने वाली दिग्गज एक्शन कैमरा कंपनी GoPro इस समय अपने जीवन के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. AI की बढ़ती लोकप्रियता जहां कुछ कंपनियों के लिए वरदान साबित हो रही है. वहीं, गोप्रो जैसी स्थापित कंपनियों के लिए यह काल बन कर आई है. अमेरिकी शेयर मार्केट (SEC) के पास दाखिल की गई एक नई रिपोर्ट में GoPro ने खुद चेतावनी दी है कि कंपनी का आगे चल पाना अब बेहद मुश्किल लग रहा है. कंपनी पर यानी कंगाल होने का खतरा मंडरा रहा है और वह खुद को बचाने के लिए नए कर्ज और फंडिंग की तलाश कर रही है.
AI की वजह से कैसे आया गोप्रो पर संकट
यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि AI की वजह से एक कैमरा कंपनी कैसे बंद हो सकती है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा तकनीकी कारण है. दरअसल, दुनिया भर में AI कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर्स की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है, जिसकी वजह से मेमोरी हार्डवेयर और कंपोनेंट्स की शॉर्टेज हो गई है. इस भारी डिमांड के कारण मेमोरी हार्डवेयर की कीमतों में 80 प्रतिशत से लेकर 110 प्रतिशत तक का जबरदस्त उछाल आया है. गोप्रो के पास वेंडर्स से मिलने वाले पार्ट्स की सप्लाई भी बेहद कम हो गई है. एक तरफ जहां पार्ट्स महंगे हो रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ अप्रैल और मई 2026 के महीनों में गोप्रो कैमरों की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

कमाई में भारी गिरावट और नए प्रोडक्ट्स का फ्लॉप होना
कैलिफोर्निया की इस मशहूर कंपनी ने बताया कि साल 2026 की पहली तिमाही के दौरान उनकी कुल कमाई (Revenue) में 26 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है. इस बर्बादी के पीछे कंपनी के नए प्रोडक्ट्स का समय पर न आना भी एक बड़ी वजह है. गोप्रो का 360-डिग्री कैमरा 'MAX2', जो सितंबर 2025 में लॉन्च होने वाला था, वह तकनीकी दिक्कतों और देरी की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुआ. बाजार में नए प्रोडक्ट्स के न टिक पाने और मंदी के कारण कंपनी के पास अब रोजमर्रा के ऑपरेशन्स चलाने के लिए भी पैसों की भारी किल्लत हो गई है.
कर्मचारियों पर गिरी गाज और बड़े पैमाने पर छंटनी
खुद को मुनाफे में वापस लाने और खर्चों को कम करने के लिए गोप्रो ने बहुत सख्त कदम उठाए हैं. अप्रैल 2026 में कंपनी ने अपने कुल कर्मचारियों में से लगभग एक-चौथाई यानी 23 प्रतिशत वर्कफोर्स को नौकरी से निकालने का प्लान बनाया. इस छंटनी से लगभग 145 कर्मचारी सीधे प्रभावित हो रहे हैं. हालांकि, कर्मचारियों को निकालने की यह प्रक्रिया भी कंपनी के लिए काफी महंगी साबित हो रही है, क्योंकि सेवरेंस पैकेज और हेल्थकेयर बेनिफिट्स देने में कंपनी के करीब 15 मिलियन डॉलर (लगभग 125 करोड़ रुपये) खर्च होने का अनुमान है. यह छंटनी साल 2026 के अंत तक पूरी की जाएगी.
क्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा GoPro का नाम
GoPro ने साल 2024 में भी दो अलग-अलग चरणों में अपने कर्मचारियों की छंटनी की थी, लेकिन वे प्रयास भी कंपनी को इस गड्ढे से बाहर नहीं निकाल पाए. फिलहाल कंपनी अपने कर्ज देने वाले पार्टनर्स के साथ बातचीत कर रही है ताकि कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके. अगर आने वाले कुछ हफ्तों में GoPro को कोई बड़ा फाइनेंसर या खरीदार नहीं मिलता है, तो टेक जगत की यह दिग्गज कंपनी हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दफन हो सकती है.
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