IIT बॉम्बे के ग्रेजुएट और दिग्गज AI रिसर्चर ऋषभ अग्रवाल ने मेटा के उस जॉब ऑफर को 'ना' कह दिया, जिसकी कीमत सोशल मीडिया पर ₹8.5 करोड़ ($1 मिलियन) बताई जा रही थी. खुद ऋषभ ने खुलासा किया कि मेटा का ऑफर इस रकम से कई गुना ज्यादा बड़ा था. आइए जानते हैं कि आखिर क्यों इस भारतीय ने जुकरबर्ग की नौकरी छोड़ अपनी खुद की राह चुनी.
कौन हैं ऋषभ अग्रवाल?
ऋषभ अग्रवाल भारत के सबसे होनहार और टैलेंटेड AI रिसर्चर्स में से एक हैं. उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा JEE में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 33 हासिल की थी. इसके बाद उन्होंने IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में अपनी पढ़ाई पूरी की. ऋषभ ने यहीं पर अपनी रफ्तार नहीं रोकी, बल्कि उन्होंने कनाडा के मशहूर 'Mila' संस्थान से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में पीएचडी (PhD) भी पूरी की.
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Google और Meta में शानदार करियर
ऋषभ का बायोडाटा इतना मजबूत है कि दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियां उन्हें अपनी टीम में शामिल करना चाहती हैं. उन्होंने अपने करियर में Google Brain, Google DeepMind, Waymo और Meta Superintelligence Labs जैसे टेक दिग्गजों के साथ काम किया है. इतना ही नहीं, उन्होंने गूगल के सबसे एडवांस AI मॉडल 'Gemma' और 'Gemini' को बनाने में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
क्यों ठुकराया जुकरबर्ग का ऑफर?
ऋषभ अप्रैल 2025 में मेटा की सुपरइंटेलिजेंस लैब्स के साथ जुड़े थे. लेकिन महज 5 महीने के भीतर ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए ऋषभ ने बताया कि Google और Meta जैसी कंपनियों में साढ़े सात साल बिताने के बाद अब वह एक अलग तरह का रिस्क लेना चाहते थे. उन्होंने मार्क जुकरबर्ग की ही एक मशहूर बात को कोट करते हुए लिखा, "इस तेजी से बदलती दुनिया में सबसे बड़ा रिस्क कोई भी रिस्क ना लेना है."
शुरू किया खुद का AI स्टार्टअप
मेटा की करोड़ों की नौकरी और सुख-सुविधाओं को छोड़ने के बाद ऋषभ अग्रवाल अब 'Periodic Labs' नाम के एक एआई स्टार्टअप के फाउंडिंग मेंबर के रूप में काम कर रहे हैं. यह स्टार्टअप कोई आम एआई टूल्स नहीं बना रहा है, बल्कि यह एक ऐसा 'AI साइंटिस्ट' तैयार कर रहा है जो असली दुनिया के वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए परिकल्पना तैयार कर सके.
जेफ बेजोस और एनवीडिया का साथ
ऋषभ अग्रवाल के इस आइडिया और काबिलियत को देखते हुए दुनिया के दिग्गज निवेशकों ने उन पर भरोसा जताया है. उनके इस एआई स्टार्टअप को दुनिया के दूसरे सबसे अमीर इंसान जेफ बेजोस (Jeff Bezos) और दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया (Nvidia) का बड़ा सपोर्ट मिला है. उनका यह स्टार्टअप आने वाले समय में नई दवाइयों, नए मटेरियल्स और फिजिक्स के क्षेत्र में नए आविष्कारों को बहुत तेज गति देने का काम करेगा.