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चैटबॉट नहीं, ये AI हैं इंसानों के लिए खतरा, साफ हो सकती है 33 प्रतिशत आबादी, गूगल के पूर्व रिसर्चर की चेतावनी

NDTV World Summit 2026 में DeepMind रिसर्चर Alex Turner ने बड़ी चेतावनी दी. उन्होंने एडवांस एआई के कारण मानवता के खत्म होने की 33% आशंका जताई.

चैटबॉट नहीं, ये AI हैं इंसानों के लिए खतरा, साफ हो सकती है 33 प्रतिशत आबादी, गूगल के पूर्व रिसर्चर की चेतावनी
AI को लेकर Alex Turner की चेतावनी
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे लिए काफी काम कर सकता है. लेकिन, इसके खतरे से निपटने का उपाय अभी तक हमारे पास नहीं है. इसको लेकर कई रिसर्चर्स पहले भी चेतावनी दे चुके हैं. अब Google DeepMind के पूर्व वैज्ञानिक और AI सेफ्टी रिसर्चर Alex Turner ने भी डराने वाली बात कही है. NDTV World Summit 2026 में इस खतरे को लेकर उन्होंने कहा है कि बेहद पावरफुल AI सिस्टम्स कुछ ऐसे टारगेट बना लें जिन्हें इंसान समझ या कंट्रोल न कर सकें, तो इसके रिजल्ट टेक्नोलॉजी से कहीं आगे जा सकते हैं, जो खुद पूरी मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकते हैं.

AI सेफ्टी रिसर्चर Alex Turner "इंटेलिजेंस विस्फोट" के प्रति आगाह किया है, जिसमें AI सिस्टम्स खुद को इतनी तेजी से बेहतर बना सकते हैं कि वे इंसानी कंट्रोल से पूरी तरह बाहर हो जाएंगे.

AI के कारण मानवता के खत्म होने की 33% आशंका

Alex Turner ने AI के खतरों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला अनुमान दुनिया के सामने रखा है. टर्नर ने अनुमान लगाया है कि एडवांस AI के कारण इंसानों के विलुप्त होने या हमारी सभ्यता के पूरी तरह तबाह होने की लगभग एक-तिहाई यानी 33% आशंका है. उन्होंने साफ किया कि ये आंकड़ा कोई फॉर्मल कैलकुलेशन नहीं है, बल्कि AI सुरक्षा रिसर्च में उनके अनुभवों पर आधारित एक प्रैक्टिकल अनुमान है.

उनकी चिंता की वजह ये है कि आज के 'फ्रंटियर AI' मॉडल्स को कैसे डेवलप किया जा रहा है. सामान्य इंजीनियरिंग के विपरीत, जहां मशीनों के एक-एक पार्ट को समझकर डिजाइन किया जाता है, एडवांस AI को केवल भारी मात्रा में डेटा और कंप्यूटर पावर देकर ट्रेन किया जा रहा है. टर्नर के अनुसार, इसके कारण डेवलपर्स के बिना पूरी तरह समझे ही AI के भीतर नई-नई क्षमताएं और प्रॉयोरिटी खुद-ब-खुद पैदा हो रही हैं. ये खतरा तब और गंभीर हो जाता है जब AI एजेंट्स केवल सवालों के जवाब देने के बजाय खुद स्वतंत्र रूप से काम करने लगते हैं, सिस्टम्स को एक्सेस करने लगते हैं और खुद बड़े फैसले लेने लगते हैं.

जब AI एजेंट्स ने की धोखाधड़ी और चुराया भारतीय संस्थाओं का डेटा

टर्नर ने AI द्वारा की गई कुछ कथित गड़बड़ियों और धोखाधड़ी के मामलों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कई रिपोर्ट की गई घटनाओं में AI एजेंट्स ने टेस्ट्स के दौरान कथित तौर पर धोखाधड़ी की, अपनी गलतियों को छुपाया और सुरक्षा कवच बंद होने के बाद आपस में तालमेल बिठाया. सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि AI एजेंट्स ने भारतीय कंपनियों और सरकारी संस्थाओं के संवेदनशील सिस्टम्स को एक्सेस कर लिया, और प्रभावित संस्थाओं को पता चले बिना ही उनके पर्सनल डेटा और प्राइवेट बिजनेस रिकॉर्ड्स को पूरी तरह उजागर कर दिया.

ऐसी घटनाएं साफ दर्शाती हैं कि AI सुरक्षा के लिए हम केवल इन बड़ी कंपनियों के भरोसे नहीं बैठ सकते कि वे खुद अपनी गलतियां दुनिया को बताएंगी. सरकारों को इसके लिए स्वतंत्र ऑडिटर्स की जरूरत होगी जो इन AI सिस्टम्स की जांच कर सकें और कंट्रोल खोने की घटनाओं पर तुरंत रिपोर्टिंग को जरूरी बनाया जा सके. उन्होंने बताया कि कई लोग सोचते हैं कि AI चैटबॉट जिनसे हम बात करते हैं, वे कैसे खतरनाक हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि AI चैटबॉट नहीं बल्कि AI एजेंट्स खतरनाक हो सकते हैं क्योंकि ये टारगेट को पूरा करने के लिए किसी  भी हद तक जा सकते हैं. 

क्या Google DeepMind जैसी कंपनियां खुद को कंट्रोल कर सकती हैं?

टर्नर ने इस बात पर भी बड़ा सवाल उठाया कि क्या इन बड़ी कंपनियों पर खुद को रेगुलेट करने के लिए भरोसा किया जा सकता है. Google DeepMind में अपने काम के अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब बिजनेस और सरकारी दबाव बढ़ता है, तो कंपनियों के नैतिक मूल्य बेहद कमजोर पड़ जाते हैं. उन्होंने बताया कि जब उनकी कंपनी ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के साथ एक ऐसी डील की, जिसने उनके नैतिक वादों को पूरी तरह तोड़ दिया, तो उन्होंने खुद इस कंपनी को छोड़ दिया.

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