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This Article is From Oct 09, 2015

14 साल की उम्र में बन गईं मां, पर नहीं छोड़ी पहलवान बनने की जिद

14 साल की उम्र में बन गईं मां, पर नहीं छोड़ी पहलवान बनने की जिद
पहलवानी अपनेआप में बहुत ही मुश्किल काम है, लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि दो बच्चों की मां 19 वर्षीय नीतू एक अंतरराष्ट्रीय पहलवान हैं। रोहतक में कुश्ती की ट्रेनिंग के दौरान जब नीतू अखाड़े में उतरती हैं, तो किसी अन्य युवा महिला पहलवान की तरह ही दिखती हैं, लेकिन वास्तव में इसके लिए उनको जिन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, उसकी कल्पना नहीं की जा सकती।

देश की अन्य कई महिला खिलाड़ियों की तरह ही नीतू को भी अपना सपना पूरा करने के लिए अकेले ही संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कहा, 'घर की परिस्थितियां ऐसी थीं कि मेरे लिए पहलवानी जारी रखना मुश्किल था। मेरे परिवार के सदस्य भी मुझे कुश्ती की अनुमति नहीं दे रहे थे।'

हुआ था बाल विवाह
साल 1995 में भिवानी में जन्मीं नीतू का बाल विवाह हुआ था। उनके परिवारवालों ने उनकी शादी महज 13 साल की आयु में कर दी थी। इतना ही नहीं 14 साल की आयु में वे दो बच्चों का मां भी बन गईं। नीतू ने बताया कि उनके घर में कमाई का कोई स्थायी साधन नहीं था। उन्होंने कहा, 'मेरे पति बेरोजगार थे। मेरी सास को थोड़ी पेंशन मिलती थी और हम उन्हीं पैसों से बच्चों की स्कूल फीस भरते थे और घर का खर्च भी चलाते थे।'

'कट्टर मानसिकता वाले लोगों का करना पड़ा सामना'
नीतू को केवल पैसों की तंगी से ही नहीं जूझना पड़ा, बल्कि उन्हें अपने सपने को पूरा करने के लिए रोहतक के कट्टरपंथी और पुरानी मानसिकता वाले लोगों का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया 'मेरा वजन 80 किग्रा था, इसलिए मैं वर्कआउट के लिए सुबह 3 बजे उठकर दौड़ने जाती थी, ताकि गांववालों के जागने से पहले लौटकर घर आ जाऊं।'   

कायम रखी सपनों की उड़ान
मातृत्व के दायित्व और पहलवानी के बीच संघर्ष के बावजूद नीतू की प्रतिभा दबाई नहीं जा सकी। उन्होंने जूनियर और सीनियर नेशनल चैम्पियनशिप में मेडल जीतने का सिलसिला जारी रखा। यही नहीं उन्होंने पिछले साल वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत का भी प्रतिनिधित्व किया। उनके कोच मनदीप सिंह गर्व से कहते हैं, 'वे समय का पूरा उपयोग करती हैं। वे ट्रेनिंग के समय कड़ी मेहनत करती हैं। यदि वे अपनी तकनीक सुधार लेती हैं, तो परिणाम देखने लायक होंगे।"

आर्थिक मदद की जरूरत
अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहलवान होने के बावजूद दो बच्चों की यह युवा मां अब भी बिना किसी सरकारी सपोर्ट के ट्रेनिंग ले रही है। यदि नीतू को किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद मिलती है, तो उससे न केवल उनकी अच्छी ट्रेनिंग में मदद मिलेगी, बल्कि उन्हें अपना जीवन स्तर सुधारने में भी आसानी होगी। 
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