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भारतीय बॉक्सिंग संघ में घमासान- प्रेसिडेंट ने जनरल सेक्रेटरी और जनरल सेक्रेटरी एवं ग्रुप ने प्रेसिडेंट को किया सस्पेंड

भारतीय बॉक्सिंग संघ में प्रेसिडेंट और जनरल सेक्रेटरी के बीच विवाद तेज हो गया है. प्रमोद कुमार का दावा है कि 34 में से 28 स्टेट यूनिट और एग्जीक्यूटिव बोर्ड के 70 प्रतिशत सदस्य उनके साथ हैं. उन्होंने 28 अक्टूबर को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रेसिडेंट को हटाने की बात कही है.

भारतीय बॉक्सिंग संघ में घमासान- प्रेसिडेंट ने जनरल सेक्रेटरी और जनरल सेक्रेटरी एवं ग्रुप ने प्रेसिडेंट को किया सस्पेंड
प्रतिकात्मक तस्वीर

भारतीय बॉक्सिंग संघ में घमासान मचा हुआ है. जनरल सेक्रेटरी और ग्रुप ने प्रेसिडेंट को सस्पेंड कर दिया है. जिसके बाद जनरल सेक्रेटरी प्रमोद कुमार और प्रेसिडेंट अजय सिंह आमने-सामने आ गए हैं. प्रमोद कुमार का कहना है कि चल रहे विवाद पर 34 में से 28 स्टेट यूनिट हमारे साथ है. यही नहीं उनका यह भी कहना है कि एग्जीक्यूटिव बोर्ड के 70% सदस्यों ने प्रेसिडेंट को सस्पेंड किया है. वह आगे कहते हैं कि 28 अक्टूबर को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रेसिडेंट को बाहर दिखाएंगे. 

इससे पहले भारतीय बॉक्सिंग संघ के प्रेसिडेंट अजय सिंह ने कथित वित्तीय अनियमितताओं, जांच में सहयोग नहीं करने और अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने के आरोप में जनरल सेक्रेटरी प्रमोद कुमार को सस्पेंड कर दिया था. अजय सिंह ने मंगलवार (13 अक्टूबर 2026) को जारी निलंबन आदेश में कुमार के खिलाफ कई आरोपों का हवाला दिया, जिनमें जरूरी मंजूरी के बिना प्रसारण व्यवस्था के लिए आदेश जारी करना भी शामिल है. कुमार पर राष्ट्रीय चैंपियनशिप रद्द होने की जांच में सहयोग न करने और अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए अनधिकृत बैठक बुलाने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया गया था. 

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, 'जांच पूरी होने तक या सक्षम पदाधिकारी द्वारा आदेश में संशोधन या उसे रद्द किए जाने तक बीएफआई संविधान के लागू प्रावधानों के तहत आपको तत्काल प्रभाव से महासचिव के पद से अंतरिम रूप से निलंबित किया जाता है.' आदेश में हालांकि यह स्पष्ट किया गया कि निलंबन एक अंतरिम उपाय है और इसे 'आरोपों को लेकर अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा.'

यह फैसला ऐसे समय में आया है जबकि कुमार ने एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में अजय सिंह और बीएफआई के कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक पर अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए ‘आपराधिक धमकी' देने का आरोप लगाया था. मलिक ने इस आरोप को ‘बेबुनियाद‘ बताया था.

अजय सिंह ने बीएफआई के आदेश में आरोप लगाया कि महासंघ को पिनैकल ब्रॉडकास्ट प्रोडक्शंस से नोटिस मिले थे, जिसमें पिछले साल नवंबर में ग्रेटर नोएडा में खेले गए विश्व मुक्केबाजी फाइनल्स कप में प्रसारण के लिए लगभग 1.5 करोड़ रुपये देने के लिए कहा गया था.

कुमार ने इससे पहले अध्यक्ष को लिखे गए एक पत्र में कहा था कि पिनैकल ने टूर्नामेंट के प्रयोजन और प्रसारण के लिए दो करोड़ रुपये देने का वादा किया था. लेकिन कंपनी ने इस तरह के किसी भी वादे से इनकार किया है.

आदेश में कहा गया है, 'महासंघ को हाल ही में पिनैकल ब्रॉडकास्ट प्रोडक्शंस से नोटिस मिले हैं, जिनमें नवंबर 2025 में ग्रेटर नोएडा में खेले गए विश्व मुक्केबाजी फाइनल्स कप के प्रसारण के लिए लगभग 1.5 करोड़ रुपये का दावा किया गया है.'

इसके अनुसार, 'जबकि आपने जो पत्र अध्यक्ष को भेजा था उससे यह लगा कि पिनैकल ने टूर्नामेंट के प्रायोजन और प्रसारण के लिए दो करोड़ रुपये देने का आश्वासन दिया था.'

आदेश में कहा गया है, 'पिनैकल ने अब इस तरह के किसी भी आश्वासन से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है. इससे उस पत्र की प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह पैदा होता है जिसे आपने व्यक्तिगत रूप से पिनैकल की ओर से जारी किया था.'

अजय सिंह ने हिमाचल प्रदेश के नाहन में 16 से 23 अगस्त तक होने वाली बीएफआई एलीट पुरुष और महिला ओपन मुक्केबाजी चैंपियनशिप को अंतिम समय में रद्द किए जाने की जांच का भी हवाला दिया. इसके लिए 17 अगस्त को जांच समिति का गठन किया गया था.

सिंह ने कहा, 'आप बार-बार समय मांग रहे हैं. आप आपको जारी किए गए नोटिस और विधिवत गठित जांच समिति के सवालों का जवाब देने में नाकाम रहे हैं.'

इसके अलावा कुमार ने 28 अक्टूबर को होने वाली एक विशेष आम बैठक (एसजीएम) बुलाई थी, जिसमें उन्होंने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए संबद्ध राज्य इकाइयों के बहुमत के समर्थन का दावा किया था.

आदेश में कहा गया है, 'यह बेहद चिंताजनक है कि जांच में सहयोग करने के बजाय आपने बीएफआई के सीनियर अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं और अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए बैठक बुलाने का नोटिस जारी किया है.'

इसमें कहा गया है कि बीएफआई के संविधान के अनुसार कुमार को मंजूरी लिए बिना इस तरह के नोटिस जारी करने या विशेष आम बैठक बुलाने का कोई अधिकार नहीं है.

आदेश में कहा गया है कि कुमार निलंबन जारी रहने तक अपने कार्य और किसी भी तरह का पत्र व्यवहार नहीं करें. (भाषा इनपुट के साथ) 

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