जापान में खेले जा रहे एशियन गेम्स में आज भारत के लिए बड़ा दिन है क्योंकि शाम को एथलेटिक्स में आधा दर्जन मेडल्स दांव पर हैं. अगर इनमें से कुछ पदक भारत के हाथ लगते हैं, तो निश्चित रूप से यह भारत की कुल पोजीशन पर बहुत ही बड़ा असर डालेगा. ये तमाम पदक एक के बाद एक करके 52 मिनट के भीतर दांव पर होंगे. ऐसे में आप समय निकालें और भारतीय खेल महारथियों के मुकाबले देखने के लिए तैयार हो जाएं. एक से बढ़कर एक मुकाबला एथलेटिक्स में होने जा रहा है. चलिए बारी-बारी से जानिए कि एथलेटिक्स की किन प्रतिस्पर्धाओं में ये मुकाबले हैं, खिलाड़ी कौन से हैं और कितने बजे इनकी शुरुआत होगी.
1. महिला 400 मीटर हर्डल्स फाइनल (3:53 बजे)
इस रेस में विद्या रामराज और अनु राघवन हिस्सा लेंगे. दोनों एथलीटों ने अपने हीट मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन कर फाइनल में जगह बनाई. एशियाई स्तर पर विथ्या रामराज का फॉर्म बहुत मजबूत रहा है. हालांकि मुख्य मुकाबला जापानी और बहरीनी धावकों से कड़ा रहेगा, लेकिन भारत के लिए पोडियम (मेडल) फिनिश की प्रबल संभावना है.विथ्या रामराज ने पिछले कुछ समय से इस स्पर्धा में अपनी असाधारण गति और बाधाओं को पार करने की सटीक तकनीक से भारतीय एथलेटिक्स में एक अलग पहचान बनाई है. उनके साथ अनुभवी अनु राघवन का ट्रैक पर होना टीम के अनुभव को और मजबूत करता है. एशियाई स्तर पर इनका मुकाबला जापान और चीन की धावकों से है, लेकिन हीट राउंड में इनके शानदार टाइमिंग को देखते हुए पोडियम फिनिश की प्रबल संभावना है.

(विद्या रामराज फोटो: X)
2. पुरुष 400 मीटर हर्डल्स फाइनल (4.03 बजे)
इस वर्ग में पदक की जंग लड़ने के लिए संतोष कुमार और तमिलरासन ट्रैक पर उतरेंगे. संतोष ने हीट में बेहतरीन तकनीक दिखाते हुए फाइनल का टिकट कटाया है. इस स्पर्धा में कड़ा मुकाबला एशियाई रिकॉर्ड धारकों के साथ है, बावजूद इसके उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन को देखते हुए शीर्ष-5 या मेडल की रेस में कड़ी टक्कर देने की पूरी उम्मीद है. संतोष कुमार ने अपने कड़े क्वालिफाइंग हीट मुकाबलों में बेहतरीन सहनशक्ति और फुर्ती का प्रदर्शन करते हुए फाइनल का टिकट कटाया है. इस स्पर्धा में एशिया और दुनिया के शीर्ष हर्डलर्स के साथ उनका कड़ा मुकाबला होना तय है. अपनी मजबूत लय, गति और तकनीकी निरंतरता के दम पर वे इस फाइनल में एक बड़ा उलटफेर करने और शीर्ष खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर देने का पूरा दम रखते हैं.

(अविनाश साल्वे सोर्स: X)
3. पुरुष 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल (4:13 बजे)
अविनाश साबले भारत के सबसे भरोसेमंद लॉन्ग-डिस्टेंस स्टीपलचेज रनर हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव और रेस को नियंत्रित करने की क्षमता बेजोड़ है. इस इवेंट में उनकी रणनीतिक दौड़ और तकनीकी दक्षता उन्हें बाकी प्रतिस्पर्धियों से आगे रखती है. वे भारत के लिए स्वर्ण पदक के सबसे प्रबल दावेदार हैं.रेस की पेस (गति) को नियंत्रित करने, वाटर जंप पर बेहतरीन संतुलन बनाने और अंतिम लैप में अपनी पूरी ताकत झोंक देने की उनकी कला बेजोड़ है.
4. पुरुष लॉन्ग जंप फाइनल (4:25 बजे)
श्रीशंकर मुरली और डेविड सोलोमन इस प्रतिस्पर्धा में भारत के लिए पदक की लड़ाई लड़ने लंबे कूद भरेंगे. श्रीशंकर अपनी फिटनेस और बेहतरीन कमबैक के बाद शीर्ष फॉर्म में हैं, तो वही सोलोमन भी फाइनल में अपनी छाप छोड़ने को तैयार हैं. एशियाई क्षेत्र के दिग्गजों के बीच श्रीशंकर से देश को एक और मेडल की पूरी उम्मीद है.श्रीशंकर मुरली अपनी बेहतरीन फिटनेस, दमदार टेक-ऑफ और लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंच पर निरंतर प्रदर्शन के कारण देश के शीर्ष लॉन्ग जम्पर हैं. वहीं, उभरते युवा एथलीट डेविड सोलोमन भी इस बड़े फाइनल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने उतर रहे हैं. एशियाई क्षेत्र के दिग्गजों के बीच यह भारतीय जोड़ी अपने सर्वश्रेष्ठ थ्रो और जंप के दम पर देश के लिए मेडल पक्का करने की पूरी क्षमता रखती है.
5. पुरुष 1500 मीटर फाइनल (4.35 बजे)
गुलवीर सिंह ने पहले ही अन्य लंबी दूरियों की स्पर्धाओं में शानदार मेडल जीतकर अपनी फॉर्म का लोहा मनवाया है. यूनुस शाह का साथ मिलने से मिडिल-डिस्टेंस रनिंग में भारतीय रणनीति मजबूत हुई है, और यह जोड़ी पदक तालिका में उलटफेर करने का दम रखती है. गुलवीर सिंह ने हालिया प्रतियोगिताओं में लंबी दूरी की दौड़ में लगातार शानदार प्रदर्शन कर अपनी बेहतरीन शारीरिक फिटनेस और मानसिक मजबूती साबित की है. वहीं, यूनुस शाह का साथ मिलने से मिडिल-डिस्टेंस रनिंग में भारतीय रणनीति और अधिक आक्रामक हो गई है. रेस के अंतिम पलों में अपनी रणनीति बदलकर आगे निकलने की इनकी कला इन्हें पदक की रेस में एक मजबूत और खतरनाक दावेदार बनाती है.

(गुलवीर सिंह फोटो: X)
6. पुरुष जेवेलिन थ्रो फाइनल (4:45 बजे)
भारत की भाला फेंक परंपरा विश्वस्तरीय रही है. नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी में रोहित यादव और यश वीर पर देश की उम्मीदें टिकी हैं. दोनों थ्रोअर्स के पास अंतरराष्ट्रीय अनुभव है और वे पोडियम फिनिश हासिल करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं. नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी के बावजूद, रोहित यादव और यश वीर सिंह जैसे युवा व अनुभवी थ्रोअर्स के कंधों पर देश की बड़ी उम्मीदें टिकी हैं. दोनों खिलाड़ियों के पास बड़े टूर्नामेंट्स का अच्छा अनुभव है और वे अपने पहले ही प्रयास से दूरी के नए मील के पत्थर छूकर पोडियम पर जगह बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
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