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12 साल की उम्र में वह घटना, 36 में रचा इतिहास, बदल गई सुचिका तरियाल की जिंदगी, जो नहीं सोचा, अब वह कर दिखाया

सुचिका तरियाल की कहानी बताती है कि आप अपना काम करते रहें, नियति ने पहले से ही आपके लिए कुछ तय रखा है. 36 साल की इस एथलीट ने यह बखूबी दिखाया है

12 साल की उम्र में वह घटना,  36 में रचा इतिहास, बदल गई सुचिका तरियाल की जिंदगी, जो नहीं सोचा, अब वह कर दिखाया
एशियन गेम्स में पदक सुनिश्चित करने वालीं भारतीय MMA की खिलाड़ी सुचिका तरियाल
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भारतीय महिलाएं कमाल कर रही हैं, धमाल कर रही हैं. फिर क्षेत्र चाहे कुछ भी हो. जापान में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 में दूसरे दिन रविवार को एमएमए (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स) में सुचिका तरियाल ने कर दिखाया. उन्होंने यह भी साबित किया कि बड़ी उपलब्धियों के लिए उम्र भी कोई मायने नहीं रखती. दरअसल आज अगर ऐसा हुआ, तो उसके पीछे उनके साथ 12 साल की उम्र में घटित एक घटना रही. तब 12 साल की उम्र में हुई छेड़छाड़ की एक घटना ने सुचिका तरियाल की जिंदगी का रुख ही बदल दिया. अपनी रक्षा के लिए शुरू हुई यह कोशिश आगे चलकर जूडो, जू-जित्सु और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के सफर में बदल गई. और रविवार को रोहतक की रहने वाली 36 वर्षीय सूचिका ने एशियन गेम्स में भारतीय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के लिए एक नया इतिहास रच दिया

आइची-नागोया खेलों में महिलाओं की पारंपरिक -60 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में तरियाल ने मंगोलिया की अल्टानचिमेग बागलमा को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया और भारत के लिए कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लिया. इसके साथ ही वह एशियन गेम्स में डेब्यू कर रहे मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स खेल में पदक सुरक्षित करने वाली देश की पहली एथलीट बन गईं.

आत्मरक्षा से कॉम्बैट स्पोर्ट्स की दुनिया तक

छेड़छाड़ की घटना के बाद जूडो सीखने का फैसला कभी उन्होंने कभी अंतरराष्ट्रीय मंच पर करियर बनाने के लिए नहीं लिया गया था. लेकिन सूचिका ने धीरे-धीरे खुद को भारत के सबसे बहुमुखी कॉम्बैट एथलीटों में से एक के रूप में ढाला. उन्होंने जूडो से शुरुआत की, इसके बाद जू-जित्सु और आखिरकार 2017 में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स का रुख किया.

उनके जूडो करियर ने उन्हें आठ राष्ट्रीय खिताब और अंतरराष्ट्रीय सफलताएं दिलाईं, जिनमें 2019 राष्ट्रमंडल जूडो चैंपियनशिप और 2019 दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक शामिल हैं. सुचिका ने साल 2018 राष्ट्रमंडल जूडो चैंपियनशिप में रजत पदक भी जीता और कई एशियाई चैंपियनशिप में भाग लिया। बर्मिंघम में 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में, उन्होंने महिलाओं की -57 किग्रा श्रेणी में प्रतिस्पर्धा की.

जू-जित्सु में उनका सफर तब एक और बड़ी उपलब्धि पर पहुंचा, जब उन्होंने 2024 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया. सुचिका ने 2017 में जीत के साथ अपने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स करियर की शुरुआत की थी, लेकिन जूडो और जू-जित्सु जारी रखते हुए उन्होंने इस खेल से सात साल का ब्रेक लिया. वह दिसंबर 2024 में पेशेवर मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में वापस आईं और बहरीन में जीत हासिल की.

सुचिका कहती हैं, 'जूडो ने मुझे मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के लिए तैयार किया, जो मेरे लिए कॉम्बैट स्पोर्ट्स का सर्वोच्च स्तर है. जूडो की वजह से, मैं ग्राउंड फाइटिंग और ग्रैपलिंग में कुशल थी. मुझे इसके लिए सिर्फ स्टैंडिंग गेम और स्ट्राइकिंग स्किल्स सीखनी पड़ीं. बदलाव मुश्किल नहीं था, यह ऑल-राउंड स्किल्स की परीक्षा है.'

दूसरा एशियन गेम्स, अलग कहानी

आइची-नागोया खेल तरियाल के लिए दूसरा मौका हैं. साल 2022 में हांग्झू में, उन्होंने कुराश में भाग लिया था, लेकिन परिणाम उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा सुचिका कहती हैं, 'जिंदगी ने मुझे एशियन गेम्स में दूसरा मौका दिया है. हांग्झू में मेरी तैयारी पर्याप्त नहीं थी. इस बार, मैं पूरी तरह तैयार हूं.' खेल मंत्रालय की योजना द्वारा समर्थित, उन्होंने इस साल जनवरी और मई में एशियाई मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स चैंपियनशिप में लगातार कांस्य पदक जीतने के बाद इन खेलों में प्रवेश किया.

युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा

कॉम्बैट-स्पोर्ट्स के अलावा भी वह एक जाना-पहचाना चेहरा हैं. उन्हें उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों और महिला सशक्तिकरण में योगदान के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है. उन्होंने कहा, 'मैं वाकई युवा महिलाओं को इसे अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहती हूं. अगर एक लड़की भी मुझे देखकर कहती है, 'अगर सूचिका कर सकती है, तो मैं भी कर सकती हूं,' तो मुझे बहुत खुशी होगी. आधुनिक समय में, महिलाओं को अपनी रक्षा खुद करने की जरूरत है, और माता-पिता को अपने बच्चों को कॉम्बैट स्पोर्ट्स में आने देना चाहिए.'

F & Q= Freqently Asked Questions

प्र. 1: सूचिका तरियाल कौन हैं और उन्होंने एशियन गेम्स में क्या इतिहास रचा?

उ.: सूचिका तरियाल हरियाणा के रोहतक की रहने वाली 36 वर्षीय कॉम्बैट एथलीट हैं. उन्होंने आइची-नागोया एशियन गेम्स में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के 60 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंचकर भारत के लिए पहला एशियन गेम्स मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स पदक पक्का किया.

प्र. 2: सूचिका ने मार्शल आर्ट्स सीखने की शुरुआत क्यों की थी?

उ.: 12 साल की उम्र में हुई एक छेड़छाड़ की घटना के बाद अपनी आत्मरक्षा के उद्देश्य से उन्होंने जूडो सीखना शुरू किया था, जो बाद में उनके खेल करियर में बदल गया.

प्र. 3: सूचिका तरियाल ने अपने करियर में जूडो और जू-जित्सु में क्या-क्या प्रमुख उपलब्धियां हासिल की हैं?

उ.: उन्होंने जूडो में आठ राष्ट्रीय खिताब जीते, 2019 राष्ट्रमंडल जूडो चैंपियनशिप और 2019 दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक तथा 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता. इसके अलावा, उन्होंने 2024 विश्व चैंपियनशिप में जू-जित्सु में स्वर्ण पदक हासिल किया.

प्र. 4: सूचिका का पिछला एशियन गेम्स (हांग्झू 2022) कैसा रहा था?

उ.: हांग्झू एशियन गेम्स में उन्होंने 'कुराश' खेल में भाग लिया था, लेकिन भारत में इस खेल की कम लोकप्रियता और अपर्याप्त तैयारी के कारण वे अपनी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थीं.

प्र. 5: युवा महिलाओं और कॉम्बैट स्पोर्ट्स को लेकर सूचिका का क्या संदेश है?

उ.: सूचिका का मानना है कि आधुनिक समय में महिलाओं को आत्मरक्षा सीखनी चाहिए. उनका कहना है कि महिलाएं दर्द सहने की क्षमता और मजबूत मानसिक स्थिति के कारण कॉम्बैट स्पोर्ट्स में बहुत बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं.

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