हैदराबाद के बोराबंदा इलाके के भरत नगर में 40 साल के एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली. मृतक की पहचान शेख मुजीब के रूप में हुई है. परिजनों का कहना है कि 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) को लेकर वह मानसिक तनाव से जूझ रहा था, जिस वजह से उसकी मौत हुई है. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामला दर्ज किया है. पुलिस ने कहा कि जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
परिजनों का कहना है कि मुजीब अपने पहचान वाले दस्तावेजों में गलतियों और विसंगतियों के कारण कई महीनों से भारी मानसिक तनाव में था. सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम की स्पेलिंग और अन्य विवरणों में अंतर था, जिस वजह से वह काफी चिंता में रहने लगा था.
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दस्तावेज ठीक कराने के लिए कई एजेंटों पर खर्च किए पैसे
मुजीब को डर था कि दस्तावेजों की ये गलतियां बड़ी समस्याएं पैदा कर सकती हैं. परिवार ने आरोप लगाया कि चिंता थी कि दस्तावेजों से जुड़ी अनसुलझी समस्याएं उनके मतदाता पंजीकरण को प्रभावित कर सकती हैं और भविष्य में दिक्कतें पैदा कर सकती हैं. रिश्तेदारों ने बताया कि मुजीब ने अपने दस्तावेजों को ठीक कराने के लिए एजेंटों के माध्यम से काफी पैसे खर्च किए थे. बार-बार कोशिशों के बावजूद, कथित तौर पर गलतियां ठीक नहीं हो पाईं, जिससे वे निराश और परेशान हो गए थे.
एक लाख रुपये किए खर्च
मुजीब के भतीजे मोहम्मद इमाम का कहना है कि मेरे चाचा ने पासपोर्ट, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और अन्य रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज प्राप्त करने के लिए 1 लाख रुपये से अधिक खर्च किए थे. वे अपने दो बेटों के भविष्य को लेकर चिंतित होकर डिप्रेशन में चले गए थे.
मुजीब की पत्नी ने भी दावा किया कि उनके पति लगातार दबाव में थे, क्योंकि बार-बार कोशिशों के बावजूद उनके दस्तावेजों में विसंगतियां दूर नहीं हो पाई थीं.
पुलिस ने दस्तावेज संबंधी समस्या की नहीं की पुष्टि
हालांकि, पुलिस ने दस्तावेजों की समस्याओं या मतदाता सत्यापन प्रक्रिया और मौत के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की है. बोराबंदा पुलिस ने कहा कि वे मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं.
सब-इंस्पेक्टर वाई. कशैया ने बताया कि परिवार ने पुलिस को सूचित किया कि मुजीब डिप्रेशन से जूझ रहे थे. अधिकारी ने कहा कि परिवार के सदस्यों ने हमें बताया कि मुजीब डिप्रेशन में चले गए थे. हम मामले की जांच कर रहे हैं.
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