विज्ञापन

'Aim For Gold' सिखाने वाला कोच जसपाल राणा के निधन से रो पड़ी उनकी अकादमी, उनके शूटिंग रेंज से ग्राउंड रिपोर्ट

जिन सीढ़ियों पर खिलाड़ियों को AIM FOR GOLD का सपना दिखाया, आज वही अकादमी अपने गुरु को याद कर रो रही है. जसपाल राणा सिर्फ चैंपियन नहीं, हजारों युवाओं की प्रेरणा थे. पढ़िए उनके शूटिंग रेंज से किशोर कुमार रावत की ये ग्राउंड रिपोर्ट...

'Aim For Gold' सिखाने वाला कोच जसपाल राणा के निधन से रो पड़ी उनकी अकादमी, उनके शूटिंग रेंज से ग्राउंड रिपोर्ट
NDTV

देहरादून के पौंधा-मझौन इलाके में स्थित राणा इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग स्पोर्ट्स में गम पसरा हुआ है. जिस अकादमी में कभी खिलाड़ियों की आवाज, गोल्ड जीतने के सपने और कोच जसपाल राणा की प्रेरणा से भरी बातें गूंजती थीं, आज वहां सन्नाटा पसरा हुआ है. भारत के सबसे सफल पिस्टल निशानेबाजों में गिने जाने वाले जसपाल राणा के 49 वर्ष की उम्र में निधन की खबर ने न सिर्फ खेल जगत को झकझोर दिया है, बल्कि उनकी अकादमी से जुड़े हर शख्स को गहरे सदमे में डाल दिया है.

जसपाल राणा शूटिंग अकादमी
Photo Credit: NDTV

अकादमी (शूटिंग रेंज) के परिसर में कदम रखते ही जसपाल राणा की मौजूदगी हर तरफ महसूस होती है.  शूटिंग रेंज के हर स्टेप पर लिखे  UPWARDS & ONWARDS TOWARDS TRIUMPH, STEP UP TO THE CHALLENGE, AIM FOR GOLD के हर शब्द मानो याद दिला रहे हों कि जसपाल ने खुद कितनी मेहनत और समर्पण से अपनी मंजिल हासिल की और यहां प्रैक्टिस कर रहे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे थे, पर साथ ही मेरे जेहन में यह भी चल रहा था कि इन शब्दों को जीवन देने वाला शख्स अब इस दुनिया में नहीं रहा.

28 जून 1976 को उत्तराखंड के टिहरी जिले के चिलामू गांव में जन्मे जसपाल राणा ने बचपन से ही निशानेबाजी की दुनिया में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी. उनके पिता नारायण सिंह राणा सेना से जुड़े रहे और निशानेबाजी के प्रशिक्षक भी थे. पिता से मिली ट्रेनिंग और मार्गदर्शन ने जसपाल राणा को कम उम्र में ही एक प्रतिभाशाली निशानेबाज बना दिया.

Photo Credit: NDTV

मनु भाकर ने भी ली थी यहां ट्रेनिंग

युवा खिलाड़ियों को तैयार करने के उद्देश्य से जसपाल राणा ने देहरादून के पौंधा-मझौन क्षेत्र में राणा इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग स्पोर्ट्स की स्थापना की. यह संस्थान सिर्फ एक शूटिंग रेंज नहीं, बल्कि उभरते निशानेबाजों के लिए एक बड़ा प्रशिक्षण केंद्र बन गया. यहां अलग-अलग राज्यों के खिलाड़ी ट्रेनिंग लेने पहुंचते रहे हैं.

Photo Credit: NDTV

इस अकादमी की सबसे बड़ी पहचान यह भी रही कि ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने भी यहां प्रशिक्षण लिया था और बाद में ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया. जसपाल राणा ने भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा देने के साथ-साथ कई प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.

अकादमी में आज भी उनकी सोच और काम करने का तरीका दिखाई देता है. यहां 50 मीटर, 25 मीटर और 10 मीटर की आधुनिक शूटिंग रेंज बनाई गई हैं, जहां खिलाड़ी नियमित प्रशिक्षण लेते हैं. कैंटीन में जसपाल राणा की तस्वीरें लगी हैं, जिनमें उन्हें शूटिंग में मेडल जीतते हुए देखा जा सकता है. उनके जीते हुए मेडल भी यहां सहेजकर रखे गए हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं.

Photo Credit: NDTV

छात्रों से मिलने अक्सर शूटिंग रेंज आते थे राणा

अकादमी के असिस्टेंट कोच अनिल कवि के लिए अभी भी इस खबर पर यकीन कर पाना मुश्किल है. वे कहते हैं, "जब भी जसपाल राणा देहरादून स्थित शूटिंग रेंज में आते थे, तो छात्रों से जरूर मिलते थे. वह हमेशा खिलाड़ियों को मेहनत करने और अपनी ट्रेनिंग पर पूरा ध्यान देने की सलाह देते थे."

अनिल कवि के मुताबिक, "करीब डेढ़ सप्ताह पहले भी जसपाल राणा देहरादून आए थे और अकादमी में चल रही ट्रेनिंग को लेकर चर्चा की थी."

Anil Kavi

अनिल कवि
Photo Credit: NDTV

अनिल कवि बताते हैं कि जसपाल राणा सिर्फ बड़े खिलाड़ी या कोच नहीं थे, बल्कि अकादमी के हर छोटे-बड़े काम में दिलचस्पी लेते थे. कभी पिस्टल और राइफल की सफाई करते दिखाई देते, तो कभी बागवानी करते नजर आते. अकादमी उनके लिए सिर्फ एक संस्थान नहीं, बल्कि एक सपना थी जिसे वह लगातार बेहतर बनाने में जुटे रहते थे.

Photo Credit: NDTV

उनके निधन से उनका परिवार भी गहरे दुख में है. पौंधा-मझौन में जसपाल राणा का घर भी मौजूद है. जसपाल राणा के छोटे भाई के ससुर युद्ध वीर सिंह राणा कहते हैं कि उन्हें अब तक विश्वास नहीं हो रहा कि जसपाल राणा उनके बीच नहीं रहे. वहीं उनके चचेरे भाई सुरेंद्र उन्हें बेहद मिलनसार और जमीन से जुड़ा इंसान बताते हैं. उनके मुताबिक, अचानक आई इस खबर ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है.

Photo Credit: NDTV

जसपाल राणा को बेहद पसंद था सादा भोजन 

अकादमी की कैंटीन में काम करने वाले जग्गू की आंखें भी नम हैं. वह बताते हैं कि जसपाल राणा जब भी देहरादून आते थे, तो किसी खास व्यवस्था की मांग नहीं करते थे. वह आम छात्रों के साथ बैठकर खाना खाते थे और बेहद सादा भोजन पसंद करते थे. यही सादगी उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थी.

Photo Credit: NDTV

आज राणा इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग स्पोर्ट्स में हर कोना जसपाल राणा की यादों को संजोए हुए है. सीढ़ियों पर लिखा "AIM FOR GOLD" का संदेश अब भी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का हौसला दे रहा है, लेकिन इसे सिखाने वाला गुरु अब हमेशा के लिए खामोश हो चुका है. उनकी कमी सिर्फ परिवार या अकादमी ही नहीं, बल्कि भारतीय निशानेबाजी की पूरी दुनिया लंबे समय तक महसूस करेगी.

Photo Credit: NDTV

जिन सीढ़ियों पर खिलाड़ियों को AIM FOR GOLD का सपना दिखाया, आज वही अकादमी अपने गुरु को याद कर रो रही है. जसपाल राणा सिर्फ चैंपियन नहीं, हजारों युवाओं की प्रेरणा थे. उनका जाना भारतीय शूटिंग के लिए अपूरणीय क्षति है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Jaspal Rana, Shooting
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com