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राजस्थान में पानी के लिए किसानों का उग्र प्रदर्शन, दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक जाम; महापंचायत जारी

राजस्थान में पांचना बांध के कमांड क्षेत्र की नहरों में बांध से पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. किसानों ने बीते दो दिनों में दूसरी बार दिल्ली-मुंबई रेल रूट पर इकट्ठा होकर रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया है.

राजस्थान में पानी के लिए किसानों का उग्र प्रदर्शन, दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक जाम; महापंचायत जारी
राजस्थान में पानी के लिए दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक जाम
  • पांचना बांध के पानी को लेकर किसान आंदोलन लगातार 12वें दिन जारी है.
  • एक ओर पानी के लिए प्रदर्शन चल रहा तो दूसरी ओर 39 गुर्जर बहुल गांवों के लोग बांध की निगरानी कर रहे हैं.
  • बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण लगातार दूसरे दिन दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर इकट्ठा हो गए.

राजस्थान में करौली और सवाई माधोपुर जिले के किसानों के बीच पांचना बांध का पानी नहरों में छोड़ने का मुद्दा अब बड़ा जनआंदोलन और राजनीतिक विषय बनता जा रहा है. वजीरपुर उपखंड के खंडीप गांव में चल रही किसान महापंचायत मंगलवार को 12वें दिन भी जारी रही. इस बीच आंदोलन उस समय उग्र हो गया जब बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और ग्रामीण दिल्ली मुंबई रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए और करीब एक घंटे तक प्रदर्शन करते हुए रेलवे ट्रैक जाम कर दिया. सूचना पर पहुंची पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने समझाइश कर ट्रैक खाली कराया.

39 गांवों के लोगों की बांध पर निगरानी

दरअसल, नहरों में पानी छोड़े जाने और उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना की मांग को लेकर हजारों किसान आंदोलन में डटे हुए हैं. वहीं दूसरी ओर पांचना बांध पर 39 गुर्जर बहुल गांवों द्वारा निगरानी लगातार जारी है. खंडीप गांव में आयोजित अनिश्चितकालीन महापंचायत में प्रतिदिन अलग-अलग गांवों की जिम्मेदारी तय की जा रही है. क्षेत्र के हजारों महिला-पुरुष ट्रैक्टरों, बसों और अन्य वाहनों से धरना स्थल पहुंच रहे हैं. रामरसिया, पद दंगल और जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से आंदोलन को निरंतर गति दी जा रही है.

12 दिन से लगातार किसानों का धरना जारी

गंगापुर सिटी विधायक और उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा लगातार 12 दिनों से धरना स्थल पर मौजूद हैं. उनके साथ पांचना कमांड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति, विभिन्न गांवों के पंच-पटेल तथा सर्व समाज के प्रतिनिधि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं. मंगलवार 16 जून को भी बड़ी संख्या में ग्रामीण रेलवे फाटक और ट्रैक पर पहुंच गए. सूचना पर पहुंची पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने समझाइश कर ट्रैक खाली कराया. दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग प्रभावित होने की आशंका के चलते प्रशासन और रेलवे अधिकारियों में हड़कंप मच गया.

धरना स्थल के निकट स्थित खंडीप रेलवे स्टेशन पर बीते दो दिनों में रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन के कारण प्रशासन की चिंता बढ़ गई है. 15 जून को प्रदर्शनकारियों ने करीब डेढ़ घंटे तक रेलवे ट्रैक पर जाम लगाया, जिससे दो ट्रेनों को रोकना पड़ा.

एक घंटे तक रुकी रही अवध एक्सप्रेस

एक दिन पहले भी आंदोलन के चलते अवध एक्सप्रेस को करीब आधे घंटे तक रोकना पड़ा था. रेलवे ट्रैक पर बढ़ती भीड़ और बार-बार हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए सोमवार शाम विधायक रामकेश मीणा के साथ वजीरपुर थाने में बैठक आयोजित की गई. बैठक में एसएसपी राकेश राजौरा और डीएसपी राज मीणा ने आंदोलनकारियों से रेलवे ट्रैक से दूर रहने की अपील की. साथ ही रेल यातायात बाधित नहीं करने की चेतावनी भी दी गई. 

12 दिन से किसानों का धरना प्रदर्शन जारी

पानी न मिलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

उधर धरने पर डटे किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन की बुवाई का समय नजदीक है, लेकिन अब तक कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है. इससे फसलों पर संकट मंडरा रहा है और किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. किसानों ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही पांचना बांध से नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा. किसानों ने सरकार और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की मांग की है.

पांचना बांध का विवाद उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद और अधिक चर्चाओं में आया है. कमांड क्षेत्र के किसानों का कहना है कि न्यायालय द्वारा नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश दिए जाने के बावजूद आदेशों की पालना नहीं हो रही है, किसानों का आरोप है कि खरीफ सीजन नजदीक होने के बावजूद सिंचाई पानी नहीं मिलने से हजारों किसानों की फसलें प्रभावित होने की आशंका है. उधर पांचना क्षेत्र के 39 गांवों के लोग बांध से पानी छोड़े जाने का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि पहले क्षेत्र के गांवों के लिए प्रस्तावित पेयजल एवं सिंचाई परियोजनाओं को पूरा किया जाए. इसी मांग को लेकर बांध क्षेत्र में ग्रामीणों की निगरानी लगातार जारी है. 

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