राजस्थान में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. भीलवाड़ा के बाद अब बांसवाड़ा में भी ऐसा मामला सामने आया. महात्मा गांधी अस्पताल में शुक्रवार (11 जुलाई) सुबह करीब दो घंटे के भीतर ही 2 प्रसूताओं की मौत हो गई. दोनों महिलाओं ने अपनी पहली संतान को जन्म दिया था, लेकिन ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर ही उनकी मौत हो गई. घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. घटना की सूचना मिलने पर जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव भी हॉस्पिटल पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. उन्होंने जांच के भी निर्देश दिए हैं.
एनीमिया और हाई ब्लड प्रेशर बताई वजह
जानकारी के मुताबिक, जिले की सवनिया निवासी लक्ष्मी (21) ने गंभीर एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित थी. हॉस्पिटल प्रशासन ने बताया कि ऑपरेशन के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई, नवजात बच्ची सुरक्षित है. वहीं, कानेला निवासी लीला (32) ने बेटे को जन्म दिया, लेकिन सिजेरियन प्रसव के करीब 24 घंटे बाद उसकी भी मौत हो गई. प्रारंभिक तौर पर अस्पताल प्रशासन ने हाई ब्लड प्रेशर को मौत का संभावित कारण बताया है. उसका नवजात पुत्र गंभीर हालत में एसएनसीयू में भर्ती है.
5 एक्सपर्ट्स की कमेटी गठित
वहीं, परिजनों ने इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं. अस्पताल प्रशासन ने 5 विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच समिति गठित की है, जो ऑपरेशन से लेकर उपचार तक की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी. मौत के कारणों के हर पहलू की पड़ताल की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

बांसवाड़ा कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव मौके पर पहुंचे.
दवाइयों के सैंपल भी टेस्ट के लिए भेजे गए
एहतियात के तौर पर पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में उपयोग किए जा रहे मैग्नीशियम सल्फेट इंजेक्शन, सोडियम क्लोराइड आईवी और कंपाउंड सोडियम लैक्टेट आईवी समेत 3 दवाइयों के सैंपल भी जांच के लिए लिए गए हैं. भीलवाड़ा और बांसवाड़ा से पहले कोटा, जोधपुर और बीकानेर में मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं.
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