राजस्थान के सरकारी शिक्षक की सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले बर्खास्तगी हो गई. बांसवाड़ा जिले में कार्यरत शिक्षक लक्ष्मीनारायण रिटायरमेंट का इंतजार कर रहा था, लेकिन इससे पहले ही शिक्षा विभाग ने उसके खिलाफ एक्शन ले लिया. साल 1992 में जिले के बागीदौरा ब्लॉक में लक्ष्मीनारायण की नियुक्ति हुई थी. अब 34 साल बाद खुलासा हुआ है कि उसने फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी हासिल की थी. मामला सामने आने के बाद विभाग ने बर्खास्त कर दिया.
नियुक्ति के दौरान शिक्षक ने दी फर्जी मार्कशीट
राजस्थान संपर्क पोर्टल पर शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी. जिला परिषद ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर और संबंधित विभागों को शिकायत की जानकारी दी. फिर मामले की पड़ताल शुरू हुई और सामने आया कि नियुक्ति के समय प्रस्तुत मार्कशीट फर्जी थीं. लक्ष्मीनारायण ने सेकेंडरी, हायर सेकेंडरी और एसटीसी परीक्षा के फर्जी दस्तावेज पेश किए थे.
थर्ड डिवीजन पास, फर्स्ट डिवीजन बताकर ली नौकरी
जांच में खुलासा हुआ कि शिक्षक सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी परीक्षाओं में थर्ड डिवीजन से पास हुआ था. जबकि नियुक्ति के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में फर्स्ट डिवीजन बताया. शिक्षा विभाग (बीकानेर) के पास एसटीसी परीक्षा का कोई रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं मिला, जिससे दस्तावेजों के फर्जी होने की बात सामने आई.
29 जून को बर्खास्तगी का आदेश जारी
जिला स्थापना समिति की बैठक में प्रकरण पर मंथन हुआ. फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 91(3) के तहत कार्रवाई शुरू की गई. विभाग ने लक्ष्मीनारायण को 29 जून को तत्काल प्रभाव से राजकीय सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया. जबकि अगले ही दिन यानी 30 जून को रिटायरमेंट था. जिला परिषद के अधिकारियों ने बताया कि शिक्षक के दस्तावेजों में फर्जीवाड़े की बात सामने आने के बाद पड़ताल की. सरकारी सेवा में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी. सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया गया है.
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