- राजस्थान की 23 वर्षीय साध्वी प्रेम बाइसा की संदिग्ध मौत का मामला अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है
- साध्वी के पिता वीरम नाथ ने पोस्टमार्टम कराने और एंबुलेंस सेवा लेने से इनकार कर अपनी निजी गाड़ी में शव ले गए थे
- पिता ने तीन घंटे तक शव को गोद में लेकर अपनी स्कॉर्पियो में बैठे रहने के दौरान असामान्य व्यवहार किया था
राजस्थान के पारेऊ गांव की 23 वर्षीय साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत का राज गहराता जा रहा है. नाथ संप्रदाय की परंपरा के अनुसार उन्हें समाधि तो दे दी गई, लेकिन उनकी मृत्यु के पीछे की गुत्थी सुलझने के बजाय उलझती जा रही है. इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू साध्वी के पिता, वीरम नाथ का वह व्यवहार रहा, जिसे चश्मदीदों और पुलिस दोनों ने 'असामान्य' करार दिया है.
अस्पताल में पोस्टमार्टम से इनकार और निजी वाहन का मोह
मामले की शुरुआत 28 जनवरी की शाम को हुई. जोधपुर के प्रकाशा अस्पताल के डॉक्टरों ने जब साध्वी को मृत घोषित किया, तो डॉक्टर प्रवीण जैन ने उनके पिता को पोस्टमार्टम कराने की स्पष्ट सलाह दी थी. अस्पताल प्रशासन ने शव ले जाने के लिए एंबुलेंस की पेशकश भी की, लेकिन वीरम नाथ ने इसे ठुकरा दिया. वे एंबुलेंस के बजाय अपनी बेटी के शव को अपनी निजी गाड़ी में रखकर वापस आश्रम ले गए. यह पहला मौका था जब उनके फैसले पर सवाल उठे.

3 घंटे तक कार में शव को गोद में लेकर बैठे रहे पिता
सबसे हैरान करने वाला दृश्य बोरानाडा आश्रम के बाहर देखा गया. भक्त रुद्र प्रताप सिंह राजपुरोहित और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आश्रम पहुंचने के बाद भी पिता शव को अंदर नहीं ले गए. करीब 3 घंटे तक वीरम नाथ सड़क पर खड़ी अपनी सफेद स्कॉर्पियो में बैठे रहे. वे अपनी मृत बेटी के शव को गोद में लिए हुए थे, लेकिन उनके हाव-भाव सामान्य दुखी पिता जैसे नहीं लग रहे थे. चश्मदीदों ने बताया कि इस भावुक स्थिति में भी वे लगातार किसी से फोन पर बात कर रहे थे, जिसने मौके पर मौजूद लोगों को हैरत में डाल दिया.

पुलिस से हिचकिचाहट और मोबाइल देने में आनाकानी
जब रात करीब 10:30 बजे जोधपुर पुलिस और एसीपी छवि शर्मा मौके पर पहुंचीं, तो पिता का व्यवहार और भी संदिग्ध नजर आया. जोधपुर एसीपी छवि शर्मा ने बताया, "जब मैं वहां पहुंची, तो पाया कि पिता वाहन में शव को गोद में लेकर बैठे थे. वे पोस्टमार्टम कराने में हिचकिचा रहे थे. हालांकि वे न्याय की मांग कर रहे थे, लेकिन कानूनी प्रक्रिया (पोस्टमार्टम) के लिए तैयार नहीं थे." इतना ही नहीं, पुलिस के अनुसार पिता ने साध्वी का मोबाइल फोन देने से भी साफ इनकार कर दिया था. काफी मशक्कत और वहां मौजूद लोगों के समझाने के बाद ही वे फोन पुलिस को सौंपने और सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए.

सदमा या कुछ और? जांच जारी
पुलिस प्रशासन अब इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि क्या पिता का यह व्यवहार केवल गहरे सदमे (ट्रॉमा) के कारण था या इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है. साध्वी का फोन अब पुलिस के कब्जे में है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी सुरक्षित रखा गया है. अंतिम संस्कार के बाद अब सबकी निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं, ताकि यह साफ हो सके कि उस इंजेक्शन और उस रात के 'असामान्य' व्यवहार के पीछे का असली सच क्या है.
पिता और अन्य गवाहों से होगी पूछताछ
अंतिम संस्कार के बाद एनडीटीवी से बात करते हुए वीरम नाथ ने स्वीकार किया कि इंस्टाग्राम पोस्ट उन्होंने ही साध्वी की अंतिम इच्छा के अनुसार किया था. उन्होंने कहा, “उसने कहा था पापा गुरुजी, मुझे न्याय चाहिए. उसने संतों को पत्र लिखा है. इसलिए मैंने उसकी अंतिम इच्छा पूरी की. मैं कुछ भी छिपाना नहीं चाहता.” उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि कंपाउंडर ने गलत या एक्सपायर्ड इंजेक्शन दिया हो, जो मेडिकल रिपोर्ट से स्पष्ट होगा.
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