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ऊर्जा मंत्री ने कहा- प्री-पेड बिजली मीटर विकल्प है-बाध्यता नहीं, संसद में हनुमान बेनीवाल ने पूछा 'फिर थोपा क्यों जा रहा'

ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने साफ किया कि प्री‑पेड मीटर उपभोक्ताओं के लिए एक विकल्प है, कोई जबरन व्यवस्था नहीं. सरकार का फोकस उपभोक्ताओं को इसके फायदों के जरिए प्रोत्साहित करने पर है.

ऊर्जा मंत्री ने कहा- प्री-पेड बिजली मीटर विकल्प है-बाध्यता नहीं, संसद में हनुमान बेनीवाल ने पूछा 'फिर थोपा क्यों जा रहा'
हनुमान बेनीवाल

पूरे देश में प्री-पेड बिजली मीटर की कवायद की जा रही है. वहीं प्री-पेड मीटर का मुद्दा लोकसभा में उठा. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में देशभर में लगाए जा रहे प्री‑पेड स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार से सवाल पूछा. उन्होंने पूछा कि क्या बिना उपभोक्ताओं की सहमति के प्री‑पेड मोड को लागू करना विद्युत अधिनियम, 2003 के मूल उद्देश्य के खिलाफ नहीं है? इस पर ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने साफ किया कि प्री‑पेड मीटर उपभोक्ताओं के लिए एक विकल्प है, कोई जबरन व्यवस्था नहीं. सरकार का फोकस उपभोक्ताओं को इसके फायदों के जरिए प्रोत्साहित करने पर है. जिसपर बेनीवाल ने पूछा फिर थोपा क्यों जा रहा है.

क्या कहा ऊर्जा मंत्री ने?

ऊर्जा मंत्री ने लोकसभा को बताया कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ता को यह अधिकार है कि वह प्री‑पेड मीटर चुन सकता है और इसके लिए उससे कोई सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) नहीं ली जा सकती. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पारंपरिक रूप से लगाए गए स्मार्ट मीटरों में पोस्ट‑पेड सेवा डिफॉल्ट मोड में बनी हुई है. केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार ने पोस्ट‑पेड विकल्प को पूरी तरह समाप्त नहीं किया है.

फिर प्री‑पेड मीटर पर जोर क्यों?

ऊर्जा मंत्री के अनुसार, जुलाई 2021 में शुरू की गई संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं. इन मीटरों में प्री‑पेड सुविधा इसलिए शामिल की गई है ताकि उपभोक्ता अपनी बिजली खपत पर रियल‑टाइम नजर रख सके. इसके साथ ही इससे गलत बिलिंग की शिकायतें खत्म होने की बात भी सरकार ने कही. खट्टर ने कहा कि इसमें  छोटे‑छोटे रिचार्ज से बिजली इस्तेमाल की सुविधा मिल सकेगी. जीरो बैलेंस पर सप्लाई कटने से पहले आपातकालीन क्रेडिट का विकल्प भी मिल सकेगा. सरकार का कहना है कि इन फायदों को देखते हुए उपभोक्ता स्वेच्छा से प्री‑पेड स्मार्ट मीटर अपनाएं, यही उद्देश्य है.

नए कनेक्शन पर क्या नियम है?

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 के तहत नए बिजली कनेक्शन सिर्फ स्मार्ट प्री‑पेड मीटर से दिए जा रहे हैं. अगर किसी राज्य को इससे अलग व्यवस्था करनी है, तो उसे राज्य विद्युत नियामक आयोग से मंजूरी लेनी होगी.

देश में कितने प्री‑पेड स्मार्ट मीटर लगे?

लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक देशभर में अब तक 6.13 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इनमें से 2.25 करोड़ मीटर प्री‑पेड मोड में चल रहे हैं. RDSS के तहत यह काम 31 मार्च 2028 तक पूरा किया जाना है. 

हनुमान बेनीवाल का सवाल क्यों अहम?

हनुमान बेनीवाल ने अपने सवाल के जरिए यह मुद्दा उठाया कि क्या उपभोक्ताओं की सहमति के बिना प्री‑पेड मीटर थोपे जा रहे हैं? क्या सरकार पोस्ट‑पेड विकल्प को पूरी तरह खत्म करने जा रही है? ऊर्जा मंत्री के जवाब से सरकार का रुख साफ हुआ कि कानूनन प्री‑पेड मीटर एक विकल्प है, लेकिन नीतिगत स्तर पर सरकार इसे आगे बढ़ा रही है. 

सरकार का दावा है कि प्री‑पेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ता और बिजली कंपनियों – दोनों के लिए फायदेमंद हैं. हालांकि, विपक्ष और कई उपभोक्ता संगठन इसे लेकर अब भी सवाल उठा रहे हैं. हनुमान बेनीवाल का सवाल इसी बहस को संसद के पटल पर फिर से ले आया है.

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