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सुनेत्रा पवार ने CEC को पत्र लिखकर क्या खुद मुसीबत मोल ली है? एक लाइन छीन सकती है मां-बेटे की कुर्सी

सुनेत्रा पवार ने कथित तौर पर चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा था कि 28 जनवरी के बाद आयोग के साथ किया गया पार्टी का सारा पत्राचार रद्द माना जाए. इस एक लाइन ने एनसीपी के संगठनात्मक ढांचे को संकट में डाल दिया है.

सुनेत्रा पवार ने CEC को पत्र लिखकर क्या खुद मुसीबत मोल ली है? एक लाइन छीन सकती है मां-बेटे की कुर्सी
  • सुनेत्रा ने CEC को लिखे पत्र में 28 जनवरी से 26 फरवरी के बीच पार्टी के पत्राचार को रद्द मानने का आग्रह किया है
  • इस पत्र से सुनेत्रा को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने और पार्थ पवार का राज्यसभा नामांकन खतरे में पड़ सकता है
  • सुनेत्रा पवार ने 14 पदाधिकारियों की सूची भेजी थी, जिसमें 12 नेताओं के पार्टी में पदों को जिक्र नहीं है
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क्या सुनेत्रा पवार ने खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है? क्या उनका एनसीपी अध्यक्ष पद खतरे में है? क्या उनके बेटे पार्थ पवार का राज्यसभा नामांकन रद्द हो जाएगा? ये सवाल एनसीपी में घमासान के बीच सुनेत्रा पवार की तरफ से चुनाव आयोग को लिखे गए पत्र से खड़े हो रहे हैं. इस लेटर की एक लाइन के चलते पार्टी के कई बड़े फैसलों पर कानूनी तलवार लटकती सकती है.

प्रफुल्ल पटेल पर लगे गंभीर आरोप

दरअसल एनसीपी (शरद पवार) के नेता रोहित पवार ने आरोप लगाया था कि अजित पवार के निधन के 18 दिन बाद ही प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश की थी. आरोप यह भी था कि चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पार्टी के संविधान को भी बदलने की मांग की गई थी और पार्टी के सभी अधिकार प्रफुल्ल पटेल को देने की बात कही गई थी. 

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सुनेत्रा ने फैसले रद्द करने को लिखा पत्र

इन दावों के बीच अजित पवार की पत्नी, महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और एनसीपी की प्रमुख सुनेत्रा पवार ने केंद्रीय चुनाव आयुक्त को एक पत्र लिखा और अनुरोध किया कि 28 जनवरी से लेकर 26 फरवरी के बीच पार्टी की तरफ से भेजे गए पत्रों को आधिकारिक नहीं माना जाए और रद्द समझा जाए. इस पत्र को सुनेत्रा पवार द्वारा अपनी अनुपस्थिति में लिए गए फैसलों को पलटने की कोशिश माना गया. 

पत्र से पार्टी पर कानूनी संकट

सोशल मीडिया पर सुनेत्रा पवार के नाम से एक पत्र वायरल हो रहा है. इस लेटर पर कथित तौर पर सुनेत्रा पवार के दस्तखत हैं, जिसमें उल्लेख किया गया है कि 28 जनवरी के बाद चुनाव आयोग के साथ किया गया पार्टी का सारा पत्राचार रद्द माना जाए. इस एक लाइन ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को संकट में डाल दिया है.

सूत्रों का कहना है कि अगर इस दौरान किया गया पत्राचार रद्द होता है तो प्रफुल्ल पटेल द्वारा सुनेत्रा पवार को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला भी रद्द हो सकता है. इतना ही नहीं, अगर 28 जनवरी के बाद का पत्राचार अवैध घोषित होता है तो पार्थ पवार का नामांकन और उनकी राज्यसभा सांसदी भी खतरे में पड़ सकती है. चर्चा है कि पार्थ पवार के राज्यसभा के “एबी फॉर्म” पर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के हस्ताक्षर हैं. 

पार्टी के लिए मुसीबत बन सकता है लेटर

इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के अंदर नेतृत्व और अधिकारों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग के पास जमा किए गए दस्तावेजों में तकनीकी खामियां पार्टी के लिए ही मुसीबत खड़ी कर सकती हैं. फिलहाल पार्टी के शीर्ष नेताओं की ओर से इस वायरल पत्र पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है.

लेटर में 12 नेताओं के पदों का जिक्र नहीं

बताया जा रहा है कि पत्र में सुनेत्रा पवार ने केंद्रीय चुनाव आयोग को 14 पदाधिकारियों की एक सूची भी भेजी थी, जिसमें खुद को पार्टी अध्यक्ष और शिवाजीराव गर्जे को कोषाध्यक्ष बताया गया था. हालांकि बाकी 12 सदस्यों की सूची में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल और यहां तक कि उनके बेटे जय पवार के नाम तो शामिल हैं, लेकिन उनके आधिकारिक पदों का कहीं जिक्र नहीं है.

सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार की तरफ से चुनाव आयोग को यह पत्र तब लिखा गया था, जब अजीत पवार गुट के अंदर संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर आंतरिक मतभेद सतह पर आने लगे थे. पत्र के पीछे उस वक्त तर्क दिया गया था कि आधिकारिक पत्राचार केवल अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से ही होना चाहिए, अन्यथा पार्टी के भीतर शक्ति का असंतुलन पैदा हो जाएगा.

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