करौली नगर परिषद में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. जांच में ऐसे नाम सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिनमें नगर परिषद के बाबुओं के भाई-बहन, रिश्तेदार, ठेकेदार, उनके परिजन और आर्थिक रूप से सक्षम लोग भी लाभार्थियों की सूची में शामिल हैं. आरोप है कि गरीबों के लिए बनी योजना का लाभ अपात्र लोगों तक पहुंचा, जबकि वास्तविक जरूरतमंद आज भी पक्के मकान का इंतजार कर रहे हैं. मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.
प्रभावशाली लोगों को मिले घर
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और बेघर परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है. लेकिन करौली नगर परिषद में लाभार्थियों की सूची को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. आरोप है कि कई सरकारी कर्मचारी, परिषद कर्मियों के रिश्तेदार, ठेकेदारों के परिवार और पहले से पक्के मकान में रहने वाले लोगों को भी योजना का लाभ दे दिया गया.
इतना ही नहीं, कुछ ऐसे लोगों के नाम भी सूची में शामिल बताए जा रहे हैं, जो तीन मंजिला मकानों में रहते हैं या जिनके मकानों में सीसीटीवी जैसी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं.
496 लाभार्थियों को जारी हुईं किस्तें
नगर परिषद रिकॉर्ड के अनुसार, कुल 496 लाभार्थियों को योजना की पहली किस्त जारी की गई. 496 को पहली किस्त, 485 को दूसरी किस्त, 431 को तीसरी किस्त और 359 को चौथी किस्त जारी की गई. रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि 496 में से 407 मकानों का निर्माण पूर्ण बताया गया है, जबकि 412 मकान छत स्तर तक पहुंच चुके हैं, और 449 मकानों में फिनिशिंग का काम चल रहा है.
47 मकानों पर सवाल, फिर भी कार्रवाई नहीं
मामले में सबसे बड़ा सवाल उन 47 लाभार्थियों को लेकर उठ रहा है, जिनके मकानों का निर्माण नहीं हुआ. नगर परिषद की ओर से उन्हें नोटिस जारी करने की प्रक्रिया बताई जा रही है, लेकिन आरोप है कि जिन लोगों ने पक्के मकान होने के बावजूद योजना का लाभ लिया, उनके खिलाफ अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
एक ही परिवार के कई सदस्यों को मिला लाभ
जांच में ऐसे मामले भी सामने आने का दावा किया जा रहा है, जहां एक ही परिवार के दो, तीन या उससे अधिक सदस्यों के नाम पर अलग-अलग आवास स्वीकृत हुए. कुछ मामलों में पति-पत्नी, भाई-बहन और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर भी योजना का लाभ मिलने के आरोप हैं.
तीन मंजिला मकानों तक पहुंचा योजना का लाभ
शिकायतों के अनुसार, बाहरी क्षेत्र ही नहीं बल्कि शहर के अंदर भी कई ऐसे परिवार योजना के लाभार्थी बने, जिनके पास पहले से पक्के और बहुमंजिला मकान हैं. कुछ मकानों में आधुनिक सुविधाएं और सीसीटीवी कैमरे तक लगे होने की बात भी सामने आई है. ऐसे मामलों ने पात्रता प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
विधायक दर्शन सिंह गुर्जर का बयान
करौली विधायक दर्शन सिंह गुर्जर ने कहा कि उन्हें इस पूरे मामले की शिकायत मिली है. उनके अनुसार, यदि नगर परिषद के बाबुओं, कर्मचारियों या उनके रिश्तेदारों ने नियमों के विरुद्ध प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लिया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी सरकार तक पहुंचाई जाएगी. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
ADM महावीर सिंह, प्रशासक ने बताया कि जिला स्तर पर कमेटी बनाकर जांच करेंगे. दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे. ACM एवं कार्यवाहक नगर परिषद आयुक्त प्यारेलाल सोथवाल ने बताया कि हम लोग कलक्ट्रेड लेवल पर जांच कर रहे हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बता पाएंगे.
क्या है नियम?
प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभार्थी को निर्माण की प्रगति के आधार पर चरणबद्ध किस्तें जारी की जाती हैं. पहली किस्त स्वीकृति और निर्माण शुरू होने के बाद, जबकि दूसरी, तीसरी और अंतिम किस्त निर्माण के अलग-अलग चरण पूरे होने पर दी जाती है. ऐसे में यदि अपात्र व्यक्ति लाभार्थी बने हैं तो पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है.
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