आईपीएस मनीष अग्रवाल शुरू से ही विवादो में रहे. वे एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. वे 2010 बैच के आईपीएस हैं. नौकरी के शुरुआती समय में साल 2013-14 में जम्मू कश्मीर में एसीबी ने उन पर रिश्वत का मामला दर्ज किया था. IPS अग्रवाल के खिलाफ एक हत्या के मामले में पैसे मांगने की शिकायत आई थी. इस मामले में जम्मू कश्मीर एसीबी ने मनीष अग्रवाल सहित जांच अधिकारी और अन्य के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी. हालांकि, इस मामले में उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली.
शादी के बाद बदला कैडर
उन्होंने राजस्थान कैडर की एक आईपीएस महिला से शादी की, और उनका कैडर बदल गया. शादी के बाद राजस्थान आ गए. हालांकि, उनकी यह शादी ज्यादा समय तक नहीं चल पाई. कुछ दिनों बाद ही तलाक हो गया. तलाक के बाद उन्होंने दूसरी शादी की है.
दौसा में भी घूस लेने का लगा आरोप
दौसा में एसपी थे तो हाईवे निर्माण कंपनी से रिश्वत मांगने का आरोप लगा था. हाईवे रिश्वत विवाद के समय जांच में सामने आया था कि कई थानों के इंचार्जों को IPS अग्रवाल बिना कारण 16 और 17 सीसीए के नोटिस देते थे, और फिर उन्हें रफा दफा करने के बदले में रिश्वत मांगते थे. इसके अलावा उनके खिलाफ दौसा में एक बलात्कार के मामले को दबाने के बदले में 25 लाख रुपए मांगने की शिकायत भी मिली थी. इसकी जांच पुलिस मुख्यालय की विजिलेंस शाखा ने की थी.

मनीष अग्रवाल 2010 बैच के IPS अधिकारी हैं
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अब साले ने लगाए गंभीर आरोप
अब उन पर उनके साले ने नाबालिग बेटे को कथित तौर पर अपने पास रखने का आरोप लगाया है. बच्चे के माता-पिता यानी आईपीएस के साले ने बच्चे को वापस दिलाने के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, हालांकि अदालत ने इस मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के तहत राहत देने से इनकार कर दिया है, और कस्टडी से जुड़े विवाद के लिए सक्षम सिविल अदालत में याचिका दायर करने के लिए कहा है. आईपीएस ने कोर्ट में बताया कि उन्होंने बच्चे को कानूनी रूप से गोद लिया है.
साले में बताया- 20 दिन के लिए दिया था बच्चा
दरअसल, आईपीएस मनीष अग्रवाल और उनकी पत्नी फैमिली प्लानिंग कर रहे थे. इसके लिए आईवीएफ इलाज चल रहा था. साले ने याचिका में बताया कि उनकी बहन को डॉक्टर ने सलाह दी कि घर में बच्चा रहना ठीक होगा, इसलिए उन्होंने अपने बेटे को केवल 20 दिन के लिए उनके पास भेजा था. इसके बाद आईपीएस मनीष और उनकी पत्नी ने बच्चे को लौटाने से इनकार कर रहे हैं, जबकि न तो उन्होंने बच्चे को विधिक रूप से गोद दिया है और न ही माता-पिता ने ऐसा कोई औपचारिक सहमति पत्र दिया है.
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