जयपुर में एक CA पर फर्जी तरीके से अरबों रुपये विदेश भेजने का आरोप लगा है. सीए अभिषेक जैन पर आरोप लगा है कि उसने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर करीब 2395 करोड़ रुपये विदेश भिजवाने में अहम भूमिका निभाई. यह लेन-देन 2021 से 2024 के बीच के तीन सालों में हुए. आयकर विभाग ने मामले की जांच की जिससे फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने का खुलासा हुआ. एफआईआर में रुपयों को विदेश भेजने के लिए करीब 40 फर्मों के नाम पर प्रमाण पत्र जारी किए गए. हालांकि जिनके नाम से रकम भेजी गई, उनमें से कई की आय बेहद कम पाई गई या उन्होंने रिटर्न दाखिल नहीं किया.
क्या है पूरा मामला
इनकम टैक्स विभाग ने चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक जैन के खिलाफ जयपुर के पत्रकार कॉलोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई है. आरोप है कि सीए ने बिना सही दस्तावेजों की जांच के फॉर्म 15सीबी के 3,168 सर्टिफिकेट जारी किए. इन सर्टिफिकेट्स के आधार पर करीब 2395 करोड़ रुपए विदेश भेजे गए. 15सीबी सर्टिफिकेट किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक प्रमाण पत्र है, जिसका उपयोग भारत से विदेश में धन भेजने के दौरान टैक्स और टीडीएस की स्थिति को सत्यापित करने के लिए किया जाता है.
यह मामला 18 अगस्त को इनकम टैक्स विभाग की जांच शाखा द्वारा किए गए सर्वे के बाद सामने आया. इस दौरान जयपुर के पत्रकार कॉलोनी इलाके में सीए अभिषेक जैन के ऑफिस की भी जांच की गई. विभाग की शिकायत के अनुसार, सर्वे के दौरान मिले दस्तावेजों में विदेशी लेनदेन से जुड़े फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट का ब्योरा मिला. एफआईआर के मुताबिक, यह लेनदेन वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान हुआ.
संदिग्ध कंपनियां
विभाग ने इस लेनदेन से जुड़े कई लोगों और कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं. शिकायत में कहा गया है कि इनमें से कुछ ने तो इनकम टैक्स रिटर्न भी दाखिल नहीं किया था या उनकी कोई बड़ी बिजनेस गतिविधि या आय नहीं थी, फिर भी उनके नाम पर बड़ी रकम विदेश भेजी गई.
शिकायत में कहा गया है कि जरूरी जांच प्रक्रिया का ठीक से पालन नहीं किया गया. आरोप है कि करीब 40 फर्मों, कंपनियों और ट्रस्टों के जरिए विदेशी रकम भेजी गई, जिन्हें विभाग ने संदिग्ध या फर्जी बताया है.
पुलिस अब बैंक खातों, विदेशी लेनदेन के रिकॉर्ड, फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट और कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी. जांच एजेंसियां यह भी देखेंगी कि लेनदेन शुरू करने वाले लोगों और किसी बिचौलिए या अन्य शामिल लोगों की क्या भूमिका थी. जांच से ही पता चलेगा कि यह गड़बड़ी सिर्फ सर्टिफिकेट जारी करने तक सीमित थी या यह किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा थी.
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