पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज (AFMC) का 'कैप्टन देवर्षि शर्मा कीर्ति चक्र परेड ग्राउंड'. तारीख 10 जुलाई 2026 की एक बेहद खास और ऐतिहासिक सुबह. चारों तरफ अनुशासन की गूंज, मिलिट्री बैंड की धुन और भारत मां की रक्षा का संकल्प लेते 141 मेडिकल ग्रेजुएट्स. इन्हीं जांबाज अफसरों के बीच सीना ताने खड़े थे नवनियुक्त लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ चौधरी. लेकिन, सफेद वर्दी पहने इस बेटे की आंखें भीड़ में सिर्फ एक सूरत तलाश रही थीं अपनी मां प्रेम देवी की सूरत. वही मां, जिसने अपने लाल से वादा किया था कि जब वह देश का अफसर बनेगा, तो वह ठेठ राजस्थानी पोशाक और पारंपरिक गहनों में सज-धजकर उसकी पासिंग आउट परेड में आएगी और अपने फौजी बेटे को जी भरकर दुलारेगी.
कठोर अनुशासन पिघला, छलक पड़े कड़क अफसरों के आंसू
लेकिन कुदरत की लिखावट भी कितनी बेदर्द होती है! सफलता के इस सबसे बड़े और गौरवशाली मुकाम पर मां तो पहुंचीं, लेकिन तस्वीरों के एक बेजान फ्रेम में कैद होकर. जब पिता डॉ. ईश्वर राम बाजिया ने अपने बेटे के हाथों में उसकी मां की तस्वीर थमाई, तो कठोर सैन्य अनुशासन में ढले लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ खुद को रोक न सके. उन्होंने मां की तस्वीर को पहले भावुक सैल्यूट किया और फिर उसे अपने सीने से लगा लिया. एक ओर कंधे पर चमकते अफसर के स्टार थे, तो दूसरी ओर मां की कमी से छलकते आंसुओं का सैलाब. बेटे और मां के इस मर्मस्पर्शी मिलन को देखकर परेड ग्राउंड में मौजूद सख्त से सख्त आर्मी अफसरों का दिल भी पसीज गया और कई अधिकारियों की आंखों से बरबस आंसू छलक पड़े. वहां उपस्थित हर शख्स का सीना गर्व और आंखें वेदना से भर आईं.

afmc passing out parade lieutenant siddharth choudhary
राजस्थान के बीजापुर गांव से AFMC तक का सफर
NDTV से बातचीत करते हुए पिता डॉ. ईश्वर राम बाजिया ने इस रुला देने वाले पल के पीछे की पूरी दास्तान बयां की. यह कहानी शुरू होती है राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले की नावां तहसील के बीजापुरा गांव से. इसी छोटे से गांव में 29 नवंबर 2004 को मां प्रेम देवी की कोख से सिद्धार्थ चौधरी का जन्म हुआ था. बचपन से ही सिद्धार्थ की आंखों में भारतीय सेना की वर्दी पहनने का एक ही जुनून और सपना तैरता था.

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डॉक्टरों के परिवार से फौजी अफसर बनने का सपना
सिद्धार्थ का परिवार डॉक्टरों का परिवार रहा है. पिता डॉ. ईश्वर राम बाजिया, दो चाचा सोहन लाल बाजिया व प्रहलाद राम बाजिया, और बड़ी बहन डॉ. प्रियंका बाजिया सभी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हैं. परिवार की परंपरा को निभाते हुए सिद्धार्थ ने भी डॉक्टरी की राह चुनी, लेकिन अपने सीने में जलती सेना में जाने की ललक को बुझने नहीं दिया. उन्होंने दोनों सपनों को एक साथ जिया और सेना की 'मेडिकल कोर' को अपना लक्ष्य बनाया. कठिन मेहनत के बाद नीट (NEET) परीक्षा पास की और साल 2022 में पुणे के आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज (AFMC) में उनका दाखिला हुआ, जहां उन्हें करीब चार साल की एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करनी थी.

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मां का वो अधूरा सपना और वादा
मां प्रेम देवी को पता था कि एमबीबीएस पूरा होते ही उनके बेटे को भारतीय सेना की मेडिकल कोर में बतौर अधिकारी कमीशन मिलेगा. उस दिन एक भव्य पासिंग आउट परेड होगी, जिसमें देश भर से कैडेट्स के माता-पिता जुटेंगे. प्रेम देवी अक्सर बेटे सिद्धार्थ से बड़े चाव से कहा करती थीं कि वह उसकी पासिंग आउट परेड में राजस्थान की पारंपरिक पोशाक और तमाम आभूषण पहनकर पहुंचेगी तथा वर्दी पहने बेटे के साथ ढेर सारी तस्वीरें खिंचवाएगी.

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2 फरवरी का वो मनहूस दिन
2 फरवरी 2024 का वो मनहूस दिन सिद्धार्थ की जिंदगी में अंधेरा लेकर आया. घर पर शाम करीब चार बजे चाय पीते-पीते मां प्रेम देवी ने अचानक दुनिया को अलविदा कह दिया. उनके प्राण पखेरू उड़ गए. उस समय सिद्धार्थ पुणे में AFMC के अपने प्रैक्टिकल इम्तिहान दे रहे थे. मां के जाने की खबर मिलते ही वह सिर्फ एक दिन के लिए गांव पहुंचे, भारी मन से मां का अंतिम संस्कार किया और कर्तव्यों से बंधे होने के कारण वापस पुणे लौट गए.

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"पापा! प्लीज़ मम्मी को भी साथ लेकर आना..."
वक्त बीता और AFMC पुणे के 60वें बैच की पढ़ाई पूरी हुई. जून 2026 में जब अंतिम परिणाम घोषित हुआ, तो सिद्धार्थ चौधरी पास होकर लेफ्टिनेंट बन चुके थे. पिता डॉ. ईश्वर राम बाजिया बताते हैं कि जब 10 जुलाई 2026 की पासिंग आउट परेड की तारीख तय हुई, तो बेटे सिद्धार्थ ने घर फोन किया. उसने पूछा, "घर से कौन-कौन आ रहा है? किसकी टिकट बुक हुई है?" और फिर अचानक बेहद मासूमियत से कहा, "पापा! प्लीज़ मम्मी को भी साथ लेकर आना... मम्मी ने मुझसे वादा किया था कि वो मेरी परेड में ज़रूर आएंगी.
बेटे की इस ममताभरी और रुला देने वाली ज़िद को सुनकर पिता का गला रुंध गया, आंखें छलक पड़ीं. वह बस घोंटकर रह गए और इतना ही कह पाए-"हां बेटा, मैं तुम्हारी मां को ज़रूर लेकर आऊंगा.

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परेड के दौरान छुपाकर रखी मां की फोटो
परेड में शामिल होने के लिए पिता डॉ. ईश्वर राम बाजिया, बहन डॉ. प्रियंका बाजिया, दादी भंवरी देवी और चाची (जो मौसी भी हैं) नेमा देवी समेत पूरा परिवार पुणे के लिए रवाना हुआ. डॉ. बाजिया को बेटे की वह ज़िद पल-पल याद आ रही थी. इसलिए वह बेटी प्रियंका के कमरे में फ्रेम करवाकर रखी गई पत्नी प्रेम देवी की तस्वीर को भी अपने साथ ले आए. 10 जुलाई की सुबह छह बजे जब ऐतिहासिक परेड शुरू हुई, तो पिता ने शुरुआत में मां की तस्वीर बेटे को नहीं दिखाई. डॉ. बाजिया नहीं चाहते थे कि इस गौरवमयी और अनुशासित परेड के दौरान बेटा मानसिक रूप से कमजोर पड़े या भावुक हो.

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तस्वीर सीने से लगाई और मौसी को किया सैल्यूट
परेड शानदार तरीके से समाप्त हुई. सुबह करीब दस बजे जब सभी नए नवेले मेडिकल ग्रेजुएट्स बेहद खुशी के साथ अपने-अपने परिवारों से गले मिल रहे थे, तब पिता ने लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ के हाथों में उनकी मां की वह फ्रेम की हुई फोटो थमा दी. तस्वीर देखते ही सिद्धार्थ की आंखें भर आईं और उन्होंने मां की तस्वीर को अपने सीने से चिपका लिया. उस पल उन्होंने अपनी मां के स्वरूप में मौजूद अपनी मौसी को सैल्यूट कर मां का आशीर्वाद लिया.

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AFMC पुणे: 60वां बैच कमीशनिंग समारोह आंकड़े
सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (AFMS): कुल 141 मेडिकल ग्रेजुएट्स को अधिकारी के रूप में कमीशन प्रदान किया गया.
महिला अधिकारियों की भागीदारी: इस बैच में 25 महिला कैडेट्स शामिल थीं.
सेवावार बंटवारा: भारतीय सेना (Army) में 112, भारतीय वायु सेना (Air Force) में 17 और भारतीय नौसेना (Navy) में 12 अधिकारी शामिल हुए. सर्वश्रेष्ठ कैडेट सम्मान: फ्लाइंग ऑफिसर अनन्या फडके को सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंडर आउटगोइंग कैडेट के लिए प्रतिष्ठित 'राष्ट्रपति का स्वर्ण पदक' प्रदान किया गया.
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