राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ स्थित कोलसिया गांव में भारतीय सेना में जेसीओ राकेश कुमार दूत का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया. जेसीओ (JCO) राकेश कुमार दूत की झुंझुनूं-चिड़ावा स्टेट हाईवे पर बगड़ तिराहा बस स्टैंड के निकट भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई थी. झुंझुनूं के एक फौजी सपूत की असामयिक मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी. आज राकेश कुमार दूत का पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटकर सेना के वाहन से उनके पैतृक गांव कोलसिया लाया गया. उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और पूर्व सैनिक पहुंचे. कोलसिया में पूरे सैन्य सम्मान के साथ जेसीओ राकेश कुमार दूत को अंतिम विदाई दी गई.

अपने फौजी पिता को सलामी देता बेटा
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5 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
राकेश कुमार दूत का पार्थिव शरीर जैसे ही सेना के वाहन से उनके गांव पहुंचा, उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. घर का माहौल उस समय और अधिक भावुक हो गया, जब राकेश का पांच वर्षीय मासूम बेटा अपने पिता को अंतिम बार देखता रहा. मोक्षधाम में सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर राकेश को अंतिम सलामी दी. इसके बाद उनके पांच वर्षीय पुत्र ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी. अंतिम संस्कार के दौरान सेना की ओर से तिरंगा पुत्र को सौंपा गया.

परिवार के इकलौते बेटे की असामयिक मौत पर घर पर गमगीन माहौल
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14 अगस्त को ड्यूटी पर लौटना था
राकेश कुमार दूत भारतीय सेना में एजुकेशन हवलदार के पद पर कार्यरत थे. हाल ही में उनकी पदोन्नति जूनियर कमीशंड ऑफिसर के रूप में हुई थी. वह दिल्ली में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 23 जुलाई को अवकाश लेकर घर आए थे और 14 अगस्त को दोबारा ड्यूटी जॉइन करने वाले थे. उनकी मूल तैनाती नासिक में थी.
राकेश के पिता शीशराम दूत भी पूर्व सैनिक थे, जिनका वर्ष 2018 में निधन हो गया था. राकेश परिवार के इकलौते पुत्र थे. परिवार में वृद्ध माता, पत्नी संजू, पांच वर्षीय पुत्र और विवाहित बहन डॉ. पूनम हैं. बेटे की असमय मौत से पूरा परिवार गहरे सदमे में है.
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