Sawan Shivratri LIVE: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इसी पावन महीने में आने वाली शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है. आज यानी 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाई जा रही है. इस मौके पर सुबह से ही मंदिरों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंज रहे हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के जलाभिषेक की तैयारी कर रहे हैं. मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने और शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं. इसी के साथ कई जगहों पर कांवड़ यात्रा का समापन भी होता है. हालांकि, इस बार शिवरात्रि के दिन भद्रा का साया भी रहने वाला है. ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल है कि भद्रा के दौरान शिवलिंग पर जल चढ़ाया जा सकता है या नहीं और जलाभिषेक के लिए सबसे शुभ समय कौन सा रहेगा.
यहां हम आपको सावन शिवरात्रि से जुड़ी हर जरूरी जानकारी दे रहे हैं. आइए ज्योतिषाचार्य से जानते हैं शिवरात्रि पर शिवलिंग के जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, निशिता काल में पूजा का समय क्या रहेगा, शिवरात्रि व्रत के क्या नियम हैं और पूजा की सही विधि क्या है. इसके अलावा जानेंगे भगवान शिव को प्रसन्न करने के आसान उपाय, आज क्या करना चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए, सावन शिवरात्रि की धार्मिक मान्यता और पौराणिक कथा-
Sawan Shivratri: शिवलिंग पर क्या-क्या चढ़ाएं?
- सबसे पहले जल और गंगाजल से अभिषेक करें.
- इसके बाद कच्चे दूध, दही, घी और शक्कर से बना पंचामृत चढ़ाएं.
- इसके बाद बेलपत्र
- भांग
- धतूरा
- शमी के पत्ते
- आक और सफेद चंदन भी चढ़ाया जाता है.
दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
सावन शिवरात्रि पर गाजियाबाद के ऐतिहासिक दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में रात 12 बजे से ही श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक शुरू कर दिया था. सुबह होते-होते मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं. हर कोई अपने आराध्य भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए घंटों इंतजार करता नजर आया. मान्यता है कि दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर की महानता त्रेता युग से जुड़ी हुई है और यहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं.
शिवरात्रि के मौके पर मंदिर में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंज रहे हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि इस मंदिर में उनकी गहरी आस्था है और वे कई वर्षों से यहां आकर बाबा दूधेश्वर का जलाभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामना भगवान शिव के सामने रखते हैं.

Sawan Shivratri Vrat Katha: सावन शिवरात्रि व्रत कथा
ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं, अगर आप सावन शिवरात्रि के दिन व्रत रख रहे हैं, तो पूजा के बाद व्रत कथा का पाठ या श्रवण जरूर करें. ऐसे करने से व्रत का पूरा फल मिलता है.
यहां क्लिक कर पढ़ें- सावन शिवरात्रि व्रत की कथा
Shiv Chalisa: पढ़ें संपूर्ण शिव चालीसा
।। दोहा ।।
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
Sawan Shivratri LIVE: सावन शिवरात्रि पूजा विधि
- शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
- इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें.
- पूजा की जगह को गंगाजल से शुद्ध करें.
- शिवलिंग पर पहले जल और गंगाजल चढ़ाएं.
- इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें.
- अंत में साफ जल अर्पित करें.
- भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, चंदन, अक्षत और सफेद पुष्प चढ़ाएं.
- इसके बाद फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें.
- 'ॐ नमः शिवाय' और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें.
- शिव चालीसा का पाठ करें.
- भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें.
Sawan Shivratri LIVE: चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त
सावन शिवरात्रि की रात भगवान शिव की पूजा चार प्रहर में करने की परंपरा है. चारों प्रहर का समय इस प्रकार रहेगा-
- पहला प्रहर: शाम 7:04 बजे से रात 9:45 बजे तक
- दूसरा प्रहर: रात 9:45 बजे से 12:26 बजे तक
- तीसरा प्रहर: रात 12:26 बजे से सुबह 3:07 बजे तक
- चौथा प्रहर: सुबह 3:07 बजे से 5:49 बजे तक
Sawan Shivratri LIVE: सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं, आज सावन शिवरात्रि पर सुबह 5 बजकर 58 मिनट से दोपहर 3 बजकर 22 मिनट तक भद्रा का साया रहेगा. भद्रा के दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं लेकिन शुभ मुहूर्त में शिवलिंग का जलाभिषेक किया जा सकेगा.
जलाभिषेक का सबसे शुभ समय सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 6 बजे तक रहा. अगर आप इस समय जलाभिषेक नहीं कर पाए हैं, तो अभिजीत मुहूर्त में शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकते हैं. आज 11 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त 12:06 बजे से 12:58 बजे तक रहेगा. शाम के समय गोधूलि मुहूर्त रात 9:13 बजे से 9:32 बजे तक रहेगा.
Sawan Shivratri: आज शिवरात्रि का मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को सुबह 4 बजकर 53 मिनट पर शुरू हुई और 12 अगस्त को देर रात 1 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी. चूंकि शिवरात्रि में रात के समय चतुर्दशी तिथि का होना विशेष माना जाता है, इसलिए इस बार सावन शिवरात्रि आज यानी 11 अगस्त को मनाई जा रही है. इसी दिन व्रत रखना और रात में भगवान शिव की पूजा करना शुभ रहेगा.