पंजाब में दहशत का पर्याय बने सीरियल किलर रामस्वरूप सोढ़ी की खौफनाक कहानी इंसानियत को झकझोर कर रख देती है. होशियारपुर के गढ़शंकर के चौड़ा गांव का रहने वाला यह आरोपी एक के बाद एक 11 हत्याओं को अंजाम दे चुका है. फतेहगढ़ साहिब जिले में ही इसने तीन लोगों की निर्मम हत्या की. यह दरिंदा पहले लोगों को शराब पिलाकर अपने जाल में फंसाता, फिर यौन संबंध बनाता उसके बाद पैसों की मांग करता और मना करने पर बेरहमी से हत्या कर देता. हैरानी की बात यह है कि वारदात के बाद वह मृतकों के पास बैठकर माफी मांगता और फरार हो जाता.
रूपनगर पलिस के अनुसार, आरोपी ने करीब 18 महीने में 11 हत्याएं करने तक की बात कबूल की थी, जिसमें से एक हत्या होशियारपुर से पार्षद जसवंत राय के भाई गुरनाम सिंह गामा की थी जो कि सिंगड़ीवाला के पास रेलवे फाटक के पास खोखा (छोटी सी दुकान) चलाता था.
किशन सिंह के परिवार का दर्द
इस सीरियल किलर का पहला शिकार सरहिंद के ब्राह्मण माजरा इलाके के रहने वाले किशन सिंह बने थे, जिनकी फरवरी 2024 को हत्या की गई थी. परिवार के चचेरे भाई सुखजीत सिंह ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि किशन सिंह का शव सोहन फार्म के पास पड़ा है. जब वे मौके पर पहुंचे तो देखा कि उसकी बेहद बेरहमी से हत्या की गई थी और शव को मिट्टी में दबाने की कोशिश की गई थी.
पिता अवतार सिंह ने कहा कि इस घटना ने उनके परिवार को पूरी तरह बर्बाद कर दिया।. उन्होंने बताया कि बेटे की मौत के बाद परिवार टूट गया और उसकी पत्नी भी बच्चों समेत घर छोड़कर चली गई. चाची जसविंदर कौर ने रोते हुए कहा कि उन्होंने किशन सिंह को बेटे की तरह पाला था, लेकिन आरोपी ने पहले उसे शराब पिलाई, फिर पैसों को लेकर विवाद हुआ और उसकी हत्या कर दी गई.
संजीव कुमार ‘लकी' के परिवार की आपबीती
दूसरा पीड़ित संजीव कुमार उर्फ लकी, सरहिंद जीटी रोड क्षेत्र का रहने वाला था और अंबाला में काम करता था. उसके चाचा सुरजीत सिंह ने बताया कि 2 मई 2024 की रात लकी घर के बाहर था. आरोपी ने पहले उसके साथ शराब पी और फिर उसे अकेले ले जाकर गला घोंटकर हत्या कर दी. हत्या के बाद आरोपी उसका बैग लेकर फरार हो गया.
परिवार को शुरू में शक नहीं हुआ, लेकिन जब लकी रातभर घर नहीं लौटा तो खोजबीन शुरू हुई और सुबह उसका शव मिला. मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपी को रोपड़ में पुलिस ने गिरफ्तार किया और उसने खुद इस हत्या को कबूल किया.
लकी के पिता रणजीत सिंह ने बताया कि उनका बेटा इकलौता सहारा था. हत्या के समय उसकी पत्नी गर्भवती थी. दुखद बात यह है कि लकी अपनी बेटी का चेहरा भी नहीं देख सका. बेटी के जन्म के बाद बहू भी घर छोड़कर चली गई. परिवार ने आरोपी के लिए फांसी की सजा की मांग की है.
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