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पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ से स्ट्रोक के मरीजों का हो रहा है उपचार, 914 मरीजों का इलाज

पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत स्ट्रोक के मरीजों का इलाज किया जा रहा है. इसके जरिए राज्य में सैकड़ों मरीजों का उपचार हुआ है.

पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ से स्ट्रोक के मरीजों का हो रहा है उपचार, 914 मरीजों का इलाज
सीएम भगवंत मान (फोटो- एक्स)
चंडीगढ़:

स्ट्रोक किसी परिवार के जीवन में आने से पहले दस्तक नहीं देता. एक पल पहले व्यक्ति सामान्य रूप से चल-फिर रहा होता है, बात कर रहा होता है और अपना काम कर रहा होता है; लेकिन अगले ही पल किसी धमनी में रुकावट या मस्तिष्क के ब्लड वेसल फटने से, सामान्य दिन एक गंभीर चिकित्सीय आपातकाल में बदल सकता है. पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत स्ट्रोक उपचार से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि राज्य की स्वास्थ्य योजना सामान्य स्ट्रोक प्रबंधन से लेकर एडवांस्ड इमेजिंग , इंटेंसिव केयर और लंबे समय तक चलने वाले उपचार तक मस्तिष्क संबंधी आपात स्थितियों में मरीजों की सहायता कर रही है.

स्ट्रोक, जिसे अक्सर ‘ब्रेन अटैक' कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या कोई ब्लड वेसल फट जाता है. ऑक्सीजन की कमी होने पर मस्तिष्क की कोशिकाएं मरने लगती हैं. हाई ब्लड प्रेशर , डायबिटीज , हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली इसकी प्रमुख जोखिम में शामिल हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्ट्रोक आज भी दुनिया भर में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है, जिनमें से बड़ी संख्या ऐसे ज़ोखिम कारकों से जुड़ी है जिन्हें रोका जा सकता है. वहीं, अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का भी कहना है कि समय पर उपचार से मरीज की रिकवरी बेहतर हो सकती है, जबकि ब्लड प्रेशर ,डायबिटीज और जीवनशैली से जुड़े जोखिमों पर बेहतर नियंत्रण से स्ट्रोक की संभावना को कम किया जा सकता है.

स्ट्रोक का इलाज काफी महंगा हो सकता है, जिससे अनेक परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है. राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब के हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीजों का 4.15 करोड़ की लागत से उपचार किया गया. इनमें एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के 48 मामले दर्ज किए गए, जिन पर 14.27 लाख का सबसे अधिक खर्च आया.

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के रिकॉर्ड के अनुसार, एक्यूट स्ट्रोक और एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक श्रेणियों में सबसे अधिक मरीजों का इलाज हुआ, जबकि हेमरेजिक स्ट्रोक के मामले अपेक्षाकृत कम थे, लेकिन प्रति मरीज उपचार लागत अधिक रही. कुल खर्च का बड़ा हिस्सा सीटी/एमआरआई जांच तथा ट्रेकियोस्टॉमी और रक्त चढ़ाने जैसी अतिरिक्त चिकित्सा प्रक्रियाओं वाले मामलों पर हुआ.

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाने का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार आर्थिक चिंता के कारण इलाज में देरी न करे. उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर समय पर उपचार मिले. स्ट्रोक जैसी आपात स्थितियों में हर मिनट महत्त्वपूर्ण होता है और आर्थिक सहायता इलाज में होने वाली देरी और जीवन बचाने के बीच का अंतर साबित हो सकती है.”
 

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