Abohar Mayor Election: पंजाब के अबोहर नगर निगम में शुक्रवार को हुए मेयर चुनाव ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी. हाल ही में हुए नगर निगम चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मेयर पद पर कब्जा बरकरार नहीं रख सकी, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने सत्ता अपने नाम कर ली. इतना ही नहीं, AAP ने मेयर के साथ-साथ सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर भी जीत दर्ज कर ली. यह नतीजा इसलिए चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि 50 वार्डों वाले निगम में भाजपा के पास 28 पार्षद थे, जबकि AAP के पास केवल 20 सीटें थीं. परिणाम के बाद क्रॉस वोटिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
भाजपा के पास था स्पष्ट बहुमत
अबोहर नगर निगम पंजाब का एकमात्र नगर निगम था जहां हालिया निकाय चुनाव में भाजपा बहुमत हासिल करने में सफल रही थी. 50 वार्डों वाले निगम में भाजपा ने 28 सीटें जीती थीं. वहीं आम आदमी पार्टी को 20 सीटें मिली थीं. कांग्रेस और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की थी. इन आंकड़ों के आधार पर माना जा रहा था कि मेयर चुनाव में भाजपा आसानी से जीत हासिल कर लेगी.
मेयर चुनाव में AAP ने पलट दिया समीकरण
शुक्रवार शाम हुए चुनाव में राजनीतिक गणित पूरी तरह बदल गया. मेयर पद के लिए आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को कुल 27 वोट मिले. AAP के 20 पार्षदों के अलावा भाजपा के पांच पार्षदों, एक कांग्रेस पार्षद और एक निर्दलीय सदस्य ने भी कथित रूप से AAP उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया. इसी समर्थन के दम पर AAP ने मेयर पद पर जीत दर्ज कर ली.
तीनों प्रमुख पदों पर AAP का कब्जा
मेयर चुनाव के साथ हुए अन्य चुनावों में भी AAP ने बढ़त बनाए रखी. पार्टी ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद पर भी जीत हासिल कर ली. इससे नगर निगम की सत्ता पूरी तरह आम आदमी पार्टी के हाथों में चली गई.
भाजपा ने जताई नाराजगी
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा खेमे में नाराजगी देखी गई. पार्टी नेताओं का कहना है कि बहुमत होने के बावजूद सत्ता हाथ से निकलना गंभीर मामला है. वहीं राजनीतिक गलियारों में भाजपा पार्षदों की कथित क्रॉस वोटिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
क्यों खास है ये सीट?
अबोहर नगर निगम का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पंजाब के उन क्षेत्रों में शामिल है जहां भाजपा का संगठनात्मक आधार अपेक्षाकृत मजबूत माना जाता है. ऐसे में बहुमत होने के बावजूद मेयर पद गंवाना भाजपा के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जबकि आम आदमी पार्टी इसे बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देख रही है.
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