पूर्व वर्ल्ड चैंपियन स्पेन ने 5 लाख की आबादी वाले काबो वेर्दे के खिलाफ आपस में 92 फीसदी सटीक पास के साथ खेलते हुए 8 बार टारगेट पर शॉट लगाए. वर्ल्ड कप जीतने की मज़बूत दावेदार स्पेन ने 40 साल के गोलकीपर वोजिन्हा को 8 बार मात देने की बड़ी कोशिशें कीं. मगर 8 में से 7 बार किले की दीवार बनकर गोल रोकने वाले वोज़िन्हा ने पूर्व वर्ल्ड चैंपियन और मौजूदा यूरोपीय चैंपियन स्पेन के नाक में दम कर दिया. 6 बार तो वोज़िन्हा ने बॉक्स के अंदर अकेले गोल बचाया और टीम के सुपरमैन बन गए.
अपना पहला वर्ल्ड कप खेल रही 67वें (अब 64वें) नंबर की टीम काबो वेर्दे का नाम अब दुनिया भर के फ़ुटबॉल फ़ैन्स की ज़ुबां पर है और वोज़िन्हो फ़ुटबॉल की दुनिया के सुपरहीरो बन गए हैं.

इंस्टाग्राम पर 10 घंटे में 5 मिलियन हुए फ़ॉलोअर्स
40 साल और 12 दिन की उम्र के साथ वर्ल्ड कप का पहला मैच खलनेवाले गोलकीपर ने सबसे उम्रदराज़ फ़ुटबॉल खिलाड़ी के तौर पर वर्ल्ड कप के लिए डेब्यु करने का रिकॉर्ड तो बनाया ही. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक यूट्यूब चैनल CazeTV ने मैच के दौरान वोज़िन्हा के लिए फ़ैन्स से अपील की और कुछ ही घंटों में उनके फॉलोअर्स की बाढ़ लग गई.
इंस्टाग्राम पर गोलकीपर वोज़िन्हा के फ़ॉलोअर्स की कुछ ही घंटों में संख्या 50,000 से बढ़कर 15 लाख हो गई. 10 घंटों के अंदर ही ये संख्या बढ़कर 51 लाख हो गई. हर घंटे ये संख्या अभी लाखों की रफ़्तार से बढ़ती ही जा रही है. सिर्फ़ 10 आईलैंड या द्वीपों वाले काबो वेर्दे की आबादी सवा 5 लाख के क़रीब है और वोज़िन्हा के इंस्टाग्राम पर उनके फ़ैन्स की संख्या अभी ही उससे 10 गुना ज़्यादा बढ़ चुकी है.
‘छोटी आवाज' की गूंज
जोसिमर जोसे एवोरा डायस का नाम दुनिया में अब वोज़िन्हा (Vozinha) के नाम से मशहूर हो चुका है. वोज़िन्हा का पुर्तगाली भाषा में मतलब होता है, ‘छोटी आवाज'. वोज़िन्हा को ये प्यारा सा नाम उनके उनके दादा-दादी ने दिया था.
दिलचस्प ये भी है कि बतौर प्रोफ़ेशनल फुटबॉलर वोज़िन्हा का सफर 25 साल की उम्र में शुरू हुआ और वो अबतक 9 क्लब और 5 देशों (केप वर्डे, अंगोला, मोल्डोवा, पुर्तगाल, साइप्रस और स्लोवाकिया) के लिए फ़ुटबॉल खेल चुके हैं.
मां को नहीं मिला वीज़ा, क्यों रो पड़े वोज़िन्हा?
केप वेर्दे के लिए वोज़िन्हा ने 2012 में डेब्यु किया और अबतक वो 89 मैच में अपना ज़ौहर दिखा चुके हैं. वोज़िन्हा सुपरस्टार लैमीन यामाल और फ़ैर्रान टोरेस से सितारों के भी दबाव में नहीं आए. मैच ख़त्म होते ही वो भावुक होकर रो पड़े और अपने इंटरव्यू में कहा, 'मैं दादा-दादी के साथ बड़ा हुआ, वो अब नहीं हैं. मेरी मां वीजा की वजह से स्टेडियम नहीं आ पाईं. मैं पूरी जिंदगी इसी पल के लिए मेहनत करता रहा.'
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