सेना का अफसर बनने का सपन लिए शुभम जुयाल ने खुद नहीं सोचा होगा कि उनकी जिंदगी इस कदर मोड़ लेगी कि वह कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम पर खड़े होंगे. शुभम के पिता सेना में रहे थे और उनका भी सपना सेना में असफर बनने का था. लिखित परीक्षा निकालने के बाद जब वह एसएसबी के इंटरव्यू के लिए जा रहे थे तो चीजे एकदम से बदल गई. सड़क हादसे में शुभम को अपना एक पैर गंवाना पड़ा. अस्पताल में बिस्तर पर पड़े हुए शुभम ने भविष्य के बारे में सोचने के बचाए आज में जीने का फैसला लिया. और इसका नतीजा शानिवार को ग्लासगो में दिखा, जब उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में पुरुषों की शॉट पुट में एफ57 इवेंट में सिल्वर अपने नाम किया है. इस इवेंट का गोल्ड भारत के ही सोमन राणा के नाम रहा.
When determination takes the field, medals follow.
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) August 1, 2026
Heartiest congratulations to Soman Rana on winning Gold & Shubham Juyal on winning Silver in the Men's Shot Put F57 Para Athletics event at #Glasgow2026.
Your achievements are a source of immense pride for the nation.… pic.twitter.com/Qt1M2CHMSp
इंटरव्यू के दिन हुआ एक्सीडेंट
उत्तराखंड के रुड़की में जन्मे शुभम जुयाल बचपन से ही वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना देखते थे. उनके पिता सेना में थे. जब उनके पिता नायब सूबेदार के पद से रिटायर हुए, तो उनकी इच्छा थी कि उनका बेटा अपने पिता की विरासत को और ज़्यादा सम्मान और गर्व के साथ आगे बढ़ाए.
2022 से पहले शुभम की ज़िंदगी उम्मीद और जोश से भरी थी. वह आर्मी में सर्विस एंट्री स्कीम के तहत ऑफिसर बनने के लिए ACC का रिटन एग्जाम पास करके SSB यानी इंटरव्यू की तैयारी कर रहे थे. शुभम इस इंटरव्यू के जाते समय एक बाइक एक्सीडेंट का शिकार हो गया. 26 साल की छोटी सी उम्र में उसकी दुनिया सूनी हो गई.
एक्सीडेंट ने न सिर्फ उसके शरीर को बल्कि ज़िंदगी के सपनों को भी पूरी तरह से कुचल दिया. इस दुर्घटना के चलते उनका एक पैर काटना पड़ा. हॉस्पिटल के बेड पर अपने एक पैर के साथ लेटे हुए उन्हें एहसास हुआ कि इंसान की ज़िंदगी कितनी अनिश्चित है – और यही उसकी ज़िंदगी में सबसे बड़ा बदलाव लाया. उस दिन से, उसने चीज़ों को 'कल' पर टालना बंद कर दिया और 'वर्तमान' में जीने और काम करने का फैसला किया.
एक्सीडेंट के बाद ज़िंदगी आसान नहीं थी. 2023 में शुभम को पुणे के आर्टिफिशियल लिम्ब सेंटर भेजा गया, जहां उन्हें दो ऑप्शन दिए गए. पहला था नौकरी के लिए डिप्लोमा कोर्स या पैरा-स्पोर्ट्स. खुद को साबित करने के जुनून से प्रेरित होकर उन्होंने पैरा-स्पोर्ट्स में जाने का फैसला किया. यह उनकी दूसरी पारी की शुरुआत थी – कमज़ोरी उनकी निराशा नहीं बनी बल्कि हिम्मत और लगन उनकी ताकत बन गई.
शुभम दो बार के ओलंपियन और सूबेदार सुमन राणा से प्रेरित हुए, जो पहले ही भारत के लिए मेडल ला चुके थे. ऐसे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ट्रेनिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह भी देश के लिए मेडल ला सकते हैं.
ग्लागसो में जीता सिल्वर
कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों के शॉट पुट एफ57 इवेंट में भारत के लिए सोमन ने गोल्ड जीता, जबकि शुभम के खाते में सिल्वर आया. यह भारत का पहला गोल्ड मेडल था और साथ ही इस इवेंट में देश की पहली 'डबल पोडियम' फिनिश भी था.
🥈🇮🇳 Shubham Juyal delivers!
— Abhishek Kumar (@Abhishe99532223) August 1, 2026
A superb 13.28m throw earns Shubham Juyal the Silver Medal, adding another proud podium finish for Team India at #CWG2026.#TeamIndia #ParaAthletics pic.twitter.com/wzvkf54zTg
सोमन राणा ने अपने दूसरे प्रयास में 13.40 मीटर का विनिंग थ्रो किया, जिसे प्रतियोगिता के बाकी समय में कोई भी प्रतिद्वंद्वी पार नहीं कर सका. वहीं, शुभम ने अपने छठे और अंतिम प्रयास में 13.28 मीटर का थ्रो करते हुए सिल्वर मेडल की स्थिति हासिल की.
शुभम ने फाइनल के दौरान बेहतरीन निरंतरता दिखाई. उन्होंने 13.08 मीटर से शुरुआत की, उसके बाद 12.42 मीटर का थ्रो किया, और फिर तीसरे राउंड में सुधार करते हुए 13.27 मीटर तक पहुंचे. इसके बाद उन्होंने 13.16 मीटर और 12.88 मीटर का थ्रो किया, और अंत में अपने आखिरी प्रयास में 13.28 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके सिल्वर मेडल पक्का किया.
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