Harsh Singh 'Golden Boy' of the Commonwealth Games: कभी दुबले पतले शरीर की वजह से लोग उन्हें "खजूर" कहकर चिढ़ाते थे. शायद तब किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही लड़का एक दिन देश के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतेगा. लेकिन मेहनत, जिद और लगातार संघर्ष के दम पर हर्ष सिंह ने अपने नाम के आगे अब एक नई पहचान जोड़ दी है, कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन.
ग्लासगो में शुक्रवार को खेले गए पुरुषों के 60 किग्रा जूडो फाइनल में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को 10-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. फाइनल में भारतीय जूडोका ने शुरुआत से ही मुकाबले पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा. उनके हर दांव में आत्मविश्वास दिखा और बचाव इतना मजबूत रहा कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी पूरे मुकाबले में एक भी अंक हासिल नहीं कर सके. आखिर तक हर्ष ने अपना दबदबा कायम रखा और एकतरफा अंदाज में खिताबी मुकाबला जीत लिया.
जैसे ही मुकाबला समाप्त हुआ, हर्ष ने दोनों हाथ हवा में उठाकर जीत का जश्न मनाया. स्टैंड में मौजूद भारतीय दल तालियों से गूंज उठा. यह सिर्फ एक गोल्ड मेडल नहीं था, बल्कि उस खिलाड़ी की कहानी का सबसे सुनहरा अध्याय था, जिसने तानों को अपनी ताकत बना लिया.
पांच साल की उम्र में शुरू हुआ सफर
24 मई 2003 को जन्मे हर्ष सिंह का बचपन दक्षिण पश्चिम दिल्ली के काकरोला गांव में बीता. वह एक दिहाड़ी मजदूर परिवार से आते हैं. बचपन में उनमें भरपूर ऊर्जा थी और दिन भर मैदान में दौड़ते रहते थे. एक दिन उन्होंने अपने दोस्तों को विक्ट्री जूडो अकादमी में अभ्यास करते देखा. बस यहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई. महज पांच साल की उम्र में उन्होंने जूडो सीखना शुरू कर दिया.
उस समय उनका शरीर बेहद दुबला पतला था. इसी वजह से आसपास के लोग उन्हें "खजूर" कहकर बुलाते और चिढ़ाते थे. लेकिन हर्ष ने कभी इन बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. उन्होंने हर ताने का जवाब मैट पर अपने प्रदर्शन से दिया.
घरेलू मुकाबलों से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
हर्ष ने जूनियर और सीनियर स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय सर्किट में अपनी अलग पहचान बनाई. नेशनल रैंकिंग प्रतियोगिताओं और चयन ट्रायल में लगातार अच्छे नतीजों के दम पर उन्हें भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलने का मौका मिला. उन्होंने टोक्यो ग्रैंड स्लैम, एशियन चैंपियनशिप और कई आईजेएफ वर्ल्ड टूर प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया. इन मुकाबलों ने उन्हें बड़े मंच का अनुभव दिया, जिसका फायदा ग्लासगो में साफ दिखाई दिया.
भारत के लिए आया एक और गोल्ड
हर्ष सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड जीतने वाले दूसरे भारतीय जूडोका बने. इससे पहले महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में अस्मिता डे ने कनाडा की हेइडी क्वाच को 2-1 से हराकर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया था. हर्ष की जीत के साथ जूडो में भारत का प्रदर्शन और मजबूत हुआ. हर्ष के गोल्ड मेडल के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की पदक संख्या 19 पहुंच गई. भारत के खाते में अब पांच गोल्ड, 10 सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल हैं.
कभी "खजूर" कहकर चिढ़ाया जाने वाला यह लड़का आज देश के लिए गोल्डन बॉय बन चुका है. यह कहानी सिर्फ एक मेडल की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है जो हर मुश्किल के बाद और मजबूत होता गया. हर्ष सिंह ने साबित कर दिया कि पहचान लोगों की बातों से नहीं, अपने प्रदर्शन से बनती है.
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