दुनिया में कई ऐसी लग्जरी कारें हैं, जिनकी कीमत करोड़ों में है, लेकिन फेरारी (Ferrari 250 GTO) की बात ही अलग है. यह सिर्फ एक महंगी कार नहीं, बल्कि ऑटोमोबाइल इतिहास की सबसे दुर्लभ और कीमती कारों में शामिल है. 1962 से 1964 के बीच Ferrari ने इसकी सिर्फ 36 यूनिट तैयार की थीं. इसकी कीमत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2018 में इसकी एक कार करीब 70 मिलियन डॉलर में बिकी थी, जो भारतीय मुद्रा में आज के हिसाब से सैकड़ों करोड़ रुपये बैठती है.
F1 टीम के मालिक के गैराज में भी है ये Ferrari
इस बेहद दुर्लभ कार के मालिकों में कनाडा के अरबपति लॉरेंस स्ट्रोक (Lawrence Stroll) भी शामिल हैं. वह मशहूर बिजनेसमैन और Formula 1 टीम Aston Martin के मालिकों में से एक हैं. स्टॉल ने 2018 में उस निवेशक समूह का नेतृत्व किया था, जिसने Force India F1 टीम को बचाया था. बाद में यही टीम Racing Point और फिर Aston Martin बनी. दिलचस्प बात यह है कि लॉरेंस स्ट्रोक के बेटे लांस स्ट्रॉल भी Formula 1 में Aston Martin के लिए रेस करते हैं.
1996 में खरीदी थी Ferrari 250 GTO
Celebrity Networth की रिपोर्ट के मुताबिक, लॉरेंस स्ट्रोक के पास मौजूद Ferrari 250 GTO का चेसिस नंबर 3451GT है. उन्होंने इसे नवंबर 1996 में खरीदा था. हालांकि, उस समय उन्होंने इसके लिए कितनी रकम चुकाई थी, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है. स्ट्रोक को दुनिया के प्रमुख Ferrari कलेक्टर्स में गिना जाता है. एक समय उनके कलेक्शन में करीब 25 Ferrari शामिल थीं. इनमें 250 GTO के अलावा 330 P4, 288 GTO, F40, F50 और Enzo जैसी बेहद दुर्लभ कारें भी शामिल रही हैं.
क्यों खास है Ferrari 250 GTO?
फरारी 250 GTO को दुनिया की सबसे खूबसूरत कारों में गिना जाता है. इसे मूल रूप से रेसिंग के लिए तैयार किया गया था और इसने 24 Hours of Le Mans समेत कई बड़ी यूरोपीय रेसों में हिस्सा लिया. 1962 से 1964 के बीच फरारी ने कुल 36 250 GTO बनाए. इनमें 33 सीरीज I और 3 सीरीज II कारें थीं. सीरीज II मॉडल में डिजाइन के साथ-साथ चेसिस और इंजन में भी बदलाव किए गए थे.
बाद में चार सीरीज-I कारों को फरारी फैक्ट्री में वापस ले जाकर सीरीज II/GTO '64 स्टाइल में दोबारा तैयार किया गया. यही वजह है कि 250 GTO की कुल संख्या को लेकर कई बार भ्रम देखने को मिलता है.
70 मिलियन डॉलर में बिकी थी एक 250 GTO
इस कार की कीमत ने पिछले कुछ दशकों में जबरदस्त छलांग लगाई है. 1960 के दशक में इसकी कीमत करीब 18,500 डॉलर थी. 1969 में एक समय इसकी कीमत करीब 2,500 डॉलर तक गिर गई थी. इसके बाद इसका मूल्य लगातार बढ़ता गया. 2018 में WeatherTech के संस्थापक David MacNeil ने एक Ferrari 250 GTO के लिए करीब 70 मिलियन डॉलर चुकाए थे. भारतीय पैसों में यह रकम आज के हिसाब से 500 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है. यही वजह है कि अच्छे कंडीशन वाली 250 GTO की अनुमानित कीमत कई मामलों में 800 करोड़ रुपये तक मानी जाती है.
फरारी 250 GTO को अक्सर कारों की दुनिया की Mona Lisa कहा जाता है. इसकी वजह सिर्फ इसका डिजाइन नहीं, बल्कि इसकी बेहद कम संख्या, रेसिंग इतिहास और कलेक्टर्स के बीच इसकी जबरदस्त मांग है. इतनी दुर्लभ होने के कारण 250 GTO खुले बाजार में बेहद कम दिखाई देती है. कई सौदे निजी तौर पर होते हैं, इसलिए हर कार की वास्तविक कीमत सार्वजनिक नहीं होती.
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