कॉमनवेल्थ गेम्स में शानिवार का दिन भी भारत के लिए जबरदस्त रहा. जहां बॉक्सिंग में स्वर्णिम शुरुआत हुई तो एथलेटिक्स में भी भारत ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक अपने नाम किए. पुरुषों के शॉट पुट F57 फाइनल में भारत ने ऐतिहासिक 'डबल' जीत हासिल की. भारत के लिए पैरा एथलेटिक्स में शॉट पुट F57 में सोमन राणा ने 13.40 मीटर के प्रयास के साथ गोल्ड जीता, जबकि शुभम जुयाल ने 13.28 मीटर का थ्रो के साथ सिल्वर अपने नाम किया. ये दोनों ही प्रयास इन खिलाड़ियों के लिए इस सीज़न के सर्वश्रेष्ठ थ्रो थे. शॉट पुट F57 एक ऐसा इवेंट है जिसमें एथलीट को बैठकर और बेल्ट से बंधकर पूरी तरह से अपने शरीर के ऊपरी हिस्से और धड़ की ताकत का इस्तेमाल करना होता है. ग्लासगो 2026 में CWG में पुरुषों के F57 शॉट पुट इवेंट की शुरुआत हुई.
नेशनल लेवल बॉक्सर से शॉटपुट गोल्ड तक
2001 में गोरखा राइफल्स में सिपाही के तौर पर सेना में शामिल हुए सोमन राणा ने बॉक्सिंग से अपने करियर की शुरुआत की थी. लेकिन एक हादसे के बाद, जिसमें उनकी जिंदगी पूरी तरह बदली, राणा ने शॉटपुट का रुख किया. सोमन ने 22 साल की उम्र में सर्विसेज़ स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड की ओर से 2005 की सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में मिडिलवेट डिवीज़न में हिस्सा लिया था. SSCB भारतीय बॉक्सिंग की सबसे मज़बूत घरेलू टीमों में से एक है.
इस इवेंट से बिना किसी मेडल के लौटे अपनी यूनिट 8 गोरखा राइफल्स की दूसरी बटालियन में लौट आए. उन्हें जरा भी अंदाज़ा नहीं था कि उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली है. इसके बाद लाइन ऑफ कंट्रोल पर अपनी ड्यूटी के दौरान एक लैंडमाइन पर उनका पैर पड़ा था और इस हादसे में उन्होंने अपना दांया पैर गंवा दिया था.
राणा कहते हैं,"मैं अपनी ड्यूटी कर रहा था. कश्मीर में एक मिशन चल रहा था. मेरी यूनिट एक सर्च मिशन पर थी, तभी मेरा पैर एक लैंडमाइन पर पड़ गया. बस इसी तरह मैंने अपना दाहिना पैर खो दिया और घायल हो गया."

स्पोटस्टार की रिपोर्ट के अनुसार, चोट से ठीक होने के बाद, राणा पुणे के आर्मी रिहैबिलिटेशन सेंटर गए, जहां प्रोस्थेटिक लेग लगाया गया. वे याद करते हुए कहते हैं,"मैंने ज़िंदगी भर स्पोर्ट्स में हिस्सा लिया था. जब मैं छोटा था, तो वॉलीबॉल खेलता था. जब मैं आर्मी में था, तो नेशनल लेवल का बॉक्सर बन गया था. लेकिन अब मेरा स्पोर्ट्स करियर खत्म हो चुका था. जब मैं अपनी यूनिट में लौटा, तो मैंने 10 साल तक एडमिनिस्ट्रेटिव ड्यूटी की."
सोमन राणा ने जिंदगी ने एक बाद फिर करवट ली. इसके बाद उन्होंने आर्मी की पैरालंपिक नोड में शॉट पुट में अपनी किस्मत आज़माने का फ़ैसला किया. शॉटपुट में राणा को अधिक दिक्कत नहीं आई. राणा कहते हैं,"असल में, राइट क्रॉस मारने और शॉट पुट फेंकने में ज़्यादा फ़र्क नहीं है. मेरा राइट हुक बहुत ज़बरदस्त था, लेकिन मेरा राइट क्रॉस भी बुरा नहीं था. इसलिए शॉट पुट में ढलना आसान रहा."
एक साधारण किसान परिवार से आने वाले सोमन राणा का नोड से जुड़ने के बाद से प्रदर्शन में ज़बरदस्त सुधार हुआ है. सोमन राणा ने टोक्यो पैरालंपिक्स 2020 और पैरालंपिक्स 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया और अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शॉट पुट F57 इवेंट में स्वर्ण अपने नाम किया है.
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