भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 54 किग्रा वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया. फाइनल मुकाबले में उन्होंने पूरे मैच के दौरान दबदबा बनाए रखा. तीसरे और अंतिम राउंड में भी प्रीति पवार पूरी तरह कंट्रोल में नजर आईं. उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो पर लगातार सटीक पंच लगाए और उन्हें वापसी का कोई मौका नहीं दिया. आखिरी मिनट तक प्रीति का अटैकिंग खेल जारी रहा, जिसमें उनका दमदार लेफ्ट हुक और राइट हैंड पंच खास आकर्षण रहे.
सभी पांचों जज ने भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में 10-8 का फैसला दिया. बैंटमवेट वर्ग की विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज प्रीति ने दूसरे राउंड में भी आक्रामक प्रदर्शन जारी रखा और मुकाबले पर अपना नियंत्रण बनाए रखते हुए भारत के लिए दिन का पहला स्वर्ण पदक हासिल किया. भिवानी की एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता 22 वर्षीय प्रीति ने सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी.
मां और बहन मिठाई बांटकर मनाई खुशी
#WATCH | Rohtak, Haryana: Mother and sister of Indian boxer Preeti Pawar celebrate after she clinched gold medal in the Women's 54kg category at Commonwealth Games https://t.co/GTIOpCUPDZ pic.twitter.com/u6mzFRpHX1
— ANI (@ANI) August 1, 2026
प्रीति के गोल्ड मेडल जीतते ही हरियाणा के रोहतक में जश्न का माहौल बन गया. उनकी ऐतिहासिक सफलता पर मां और बहन भावुक हो उठीं और मिठाई बांटकर खुशी मनाई. परिवार ने प्रीति की इस उपलब्धि को वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम बताते हुए पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया.
प्रीति ने चाचा के कहने पर खेल में रखा कदम
#WATCH | Rohtak, Haryana: Indian boxer Preeti Pawar clinched gold medal in the Women's 54kg category at Commonwealth Games
— ANI (@ANI) August 1, 2026
Her mother says, "It feels wonderful; I am truly happy. In the beginning, Preeti didn't really like the sport. She got into it because her uncle was a… pic.twitter.com/wEx9KZFbKd
प्रीति पवार की मां ने बताया कि शुरुआत में प्रीति को बॉक्सिंग में ज्यादा रुचि नहीं थी, लेकिन उनके चाचा बॉक्सिंग कोच थे और उन्हीं के कहने पर उन्होंने इस खेल में कदम रखा. मां ने कहा कि परिवार के सदस्य के कोच होने से भरोसा बना और प्रीति ने लगातार मेहनत जारी रखी. जीत और हार दोनों से सीखते हुए उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया, जिसका नतीजा आज गोल्ड मेडल के रूप में सामने आया. उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रीति आगे भी कड़ी मेहनत कर देश के लिए और पदक जीतेंगी.
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