पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
- साक्षी कहती है, वो प्रधानमंत्री के मन की बात की मुरीद है
- पीएमओ से सिडको को आदेश, स्कूल के लिये मैदान उपलब्ध कराए
- उम्मीद है जल्द स्कूल के मैदान में वो अपने सपने को पूरा करने में जुट जाएगी
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मुंबई:
नवी मुंबई से सटे कलंबोली के न्यू मुंबई इंग्लिश स्कूल में 9वीं में पढ़ने वाली साक्षी तिवारी के ख्वाब बड़े हैं। वो देश के लिये ओलिंपिक मेडल जीतना चाहती है लेकिन छोटे निजी स्कूल के पास एक अदद मैदान भी नहीं था.
साक्षी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मैदान के लिये खत लिख डाला. पीएमओ ने भी इस छात्रा को निराश नहीं किया. स्थानीय प्रशासक सिडको को खत लिखा, गुजारिश की कि स्कूल को मैदान दिया जाए. साक्षी कहती है, वो प्रधानमंत्री के मन की बात की मुरीद है, उसी को सुनकर उसने सीधे पीएम से संवाद का फैसला किया.
साक्षी का कहना है, "मन की बात सुनकर मुझे लगा कि मैं उनसे बात कर सकती हूं, मैंने इसलिये पत्र लिखा. हमारे स्कूल में मैदान नहीं है, मैं चाहती हूं कि इस मैदान में खेलकर रियो ओलिंपिक में जैसे लड़कियों ने मेडल जीता मैं भी जीतना चाहती हूं." पीएमओ से सिडको को आदेश आया है, फरमान है स्कूल के लिये मैदान उपलब्ध कराए.
सिडको के जनसंपर्क अधिकारी मोहन निनावणे ने इस बारे में पुष्टि करते हुए कहा, "सिडको जब स्कूल के लिये ज़मीन देता है तब हम मैदान भी साथ में अलॉट करते हैं, लेकिन ये निजी स्कूल है. हम देख रहे हैं कि नियमों के दायरे में रहते हुए इसे कैसे पूरा किया जाए." साक्षी ने 18 जुलाई को पीएम को खत लिखा था, उम्मीद है अब जल्द स्कूल के मैदान में वो ओलिंपिक में पदक के सपने को हकीकत में बदलने में जुट जाएगी, अपने ढेर सारे साथियों के साथ.
साक्षी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मैदान के लिये खत लिख डाला. पीएमओ ने भी इस छात्रा को निराश नहीं किया. स्थानीय प्रशासक सिडको को खत लिखा, गुजारिश की कि स्कूल को मैदान दिया जाए. साक्षी कहती है, वो प्रधानमंत्री के मन की बात की मुरीद है, उसी को सुनकर उसने सीधे पीएम से संवाद का फैसला किया.
साक्षी का कहना है, "मन की बात सुनकर मुझे लगा कि मैं उनसे बात कर सकती हूं, मैंने इसलिये पत्र लिखा. हमारे स्कूल में मैदान नहीं है, मैं चाहती हूं कि इस मैदान में खेलकर रियो ओलिंपिक में जैसे लड़कियों ने मेडल जीता मैं भी जीतना चाहती हूं." पीएमओ से सिडको को आदेश आया है, फरमान है स्कूल के लिये मैदान उपलब्ध कराए.
सिडको के जनसंपर्क अधिकारी मोहन निनावणे ने इस बारे में पुष्टि करते हुए कहा, "सिडको जब स्कूल के लिये ज़मीन देता है तब हम मैदान भी साथ में अलॉट करते हैं, लेकिन ये निजी स्कूल है. हम देख रहे हैं कि नियमों के दायरे में रहते हुए इसे कैसे पूरा किया जाए." साक्षी ने 18 जुलाई को पीएम को खत लिखा था, उम्मीद है अब जल्द स्कूल के मैदान में वो ओलिंपिक में पदक के सपने को हकीकत में बदलने में जुट जाएगी, अपने ढेर सारे साथियों के साथ.
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