जल्लीकट्टू पर बैन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन की फाइल फोटो...
- इस मुद्दे पर तमिलनाडु के अलावा देशभर के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन.
- तमिल बहुल धारावी, सायन जैसे इलाकों में लोगों ने मानव श्रृंखला बनाई.
- इन लोगों की मांग है कि जल्लीकट्टू से बैन हटाया जाए.
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मुंबई:
जल्लीकट्टू को कानून की शक्ल में मान्यता दिलवाने की कोशिशें तेज़ हैं. वहीं इसके समर्थन में तमिलनाडु के अलावा देशभर के कई शहर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है.
मुंबई में तमिल बहुल धारावी और सायन जैसे इलाकों में भी लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर जल्लीकट्टू के समर्थन में नारे लगाए. मुंबई के किंग्स सर्किल माटुंगा से शुरू होकर ये मानव श्रृंखला चेंबूर तक जाएगी. धारावी 65 फीट रोड पर भी कई लोग हाथों में पोस्टर बैनर लेकर सड़क पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि जल्लीकट्टू से बैन हटाया जाए. लोगों की नाराज़गी पेटा के ख़िलाफ भी है.
इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि 'हम लोगों को तमिलनाडु की संपन्न संस्कृति पर गर्व है. तमिल लोगों की सांस्कृतिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी. केंद्र सरकार तमिलनाडु के विकास के लिए हर कदम उठाने को तैयार है'.
केंद्र सरकार जल्लीकट्टू के लिए आए अध्यादेश के ड्राफ्ट को मंजूरी दे चुकी है. अगर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी उसे मंजूरी दे देते हैं तो 'जंतु निर्ममता निवारण अधिनियम' में संशोधन करके राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मई 2014 में जल्लीकट्टू पर रोक लगा दी थी. जल्लीकट्टू को बैन करने की मांग को लेकर एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया और पीपल फॉर द एथिक्ल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल और कॉमपैशन अनलिमिटिड प्लस एक्शन कोर्ट पहुंचा था. उनके साथ जानवरों के अधिकार के लिए लड़ने वाले कई और संगठन भी शामिल थे.
मुंबई में तमिल बहुल धारावी और सायन जैसे इलाकों में भी लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर जल्लीकट्टू के समर्थन में नारे लगाए. मुंबई के किंग्स सर्किल माटुंगा से शुरू होकर ये मानव श्रृंखला चेंबूर तक जाएगी. धारावी 65 फीट रोड पर भी कई लोग हाथों में पोस्टर बैनर लेकर सड़क पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि जल्लीकट्टू से बैन हटाया जाए. लोगों की नाराज़गी पेटा के ख़िलाफ भी है.
इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि 'हम लोगों को तमिलनाडु की संपन्न संस्कृति पर गर्व है. तमिल लोगों की सांस्कृतिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी. केंद्र सरकार तमिलनाडु के विकास के लिए हर कदम उठाने को तैयार है'.
केंद्र सरकार जल्लीकट्टू के लिए आए अध्यादेश के ड्राफ्ट को मंजूरी दे चुकी है. अगर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी उसे मंजूरी दे देते हैं तो 'जंतु निर्ममता निवारण अधिनियम' में संशोधन करके राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मई 2014 में जल्लीकट्टू पर रोक लगा दी थी. जल्लीकट्टू को बैन करने की मांग को लेकर एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया और पीपल फॉर द एथिक्ल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल और कॉमपैशन अनलिमिटिड प्लस एक्शन कोर्ट पहुंचा था. उनके साथ जानवरों के अधिकार के लिए लड़ने वाले कई और संगठन भी शामिल थे.
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