प्रतीकात्मक फोटो
- नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बयां कर रहे हालात
- दिल्ली में 1,73,947 मामले, मुंबई में 40,000 मामले दर्ज हुए
- मुंबई में सायबर क्राइम से जुड़े अपराध 50 फीसदी बढ़े
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मुंबई:
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है. बुजुर्ग, महिलाओं और बच्चों को अपराधी निशाना बना रहे हैं. इसके अलावा सायबर क्राइम से जुड़े अपराध 50 फीसदी बढ़े हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं. अपराधों में राजधानी दिल्ली जहां पहले नंबर पर है वहीं दूसरे नंबर पर मुंबई है.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में साल 2015 में बच्चों के साथ अपराध के कुल 13,921 मामले दर्ज हुए जबकि 2014 में यह आंकड़ा 8,115 था. पूरे देश में बच्चों के साथ अपराध का यह सबसे बड़ा आंकड़ा था. बुजुर्गों के साथ अपराध की वारदातों में 14.6 फीसदी की बढ़त के साथ, इस मामले में महाराष्ट्र पहले नंबर पर रहा. अपहरण के मामले 158.7 फीसदी बढ़े, जबकि छेड़खानी की वारदातों में 23.5 फीसदी इजाफा हुआ. अपराध के सारे मामलों को मिला दें, तो 1,73,947 मामलों के साथ दिल्ली पहले नंबर पर रहा, जबकि 40,000 मामलों के साथ मुंबई दूसरे नंबर पर. आईटी शहर बेंगलुरु में भी 35,576 मामले दर्ज किए गए.
मुंबई पुलिस का कहना है कि इन आंकड़ों में सुधार के लिए वह कोशिश कर रही है. मुंबई पुलिस के प्रवक्ता अशोक दुधे ने कहा " हम स्कूल-कॉलेजों और झुग्गी बस्तियों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं. स्थानीय पुलिस कर्मियों के नंबर भी सबको दिए गए हैं ताकि वे किसी भी संदेहास्पद या आपात स्थिति की सूचना दे पाएं."
हालांकि कई लोगों की यह भी दलील है कि मुंबई में पुलिस फौरन मामले दर्ज करती है इसलिये यह आंकड़े बढ़े हैं. मुंबई में दस साल तक के बच्चों की गुमशुदगी के मामलों को भी अपहरण के तहत ही दर्ज किया जाता है. आईपीसी में सेक्शन 166 ए के जुड़ने से अगर कोई अफसर छेड़छाड़ या बलात्कार के मामले को दर्ज करने में ढिलाई बरतता है तो उसे दो साल की सजा हो सकती है. ऐसे प्रावधानों की वजह से भी महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध को लेकर पुलिस ज्यादा सजग हुई है.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में साल 2015 में बच्चों के साथ अपराध के कुल 13,921 मामले दर्ज हुए जबकि 2014 में यह आंकड़ा 8,115 था. पूरे देश में बच्चों के साथ अपराध का यह सबसे बड़ा आंकड़ा था. बुजुर्गों के साथ अपराध की वारदातों में 14.6 फीसदी की बढ़त के साथ, इस मामले में महाराष्ट्र पहले नंबर पर रहा. अपहरण के मामले 158.7 फीसदी बढ़े, जबकि छेड़खानी की वारदातों में 23.5 फीसदी इजाफा हुआ. अपराध के सारे मामलों को मिला दें, तो 1,73,947 मामलों के साथ दिल्ली पहले नंबर पर रहा, जबकि 40,000 मामलों के साथ मुंबई दूसरे नंबर पर. आईटी शहर बेंगलुरु में भी 35,576 मामले दर्ज किए गए.
मुंबई पुलिस का कहना है कि इन आंकड़ों में सुधार के लिए वह कोशिश कर रही है. मुंबई पुलिस के प्रवक्ता अशोक दुधे ने कहा " हम स्कूल-कॉलेजों और झुग्गी बस्तियों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं. स्थानीय पुलिस कर्मियों के नंबर भी सबको दिए गए हैं ताकि वे किसी भी संदेहास्पद या आपात स्थिति की सूचना दे पाएं."
हालांकि कई लोगों की यह भी दलील है कि मुंबई में पुलिस फौरन मामले दर्ज करती है इसलिये यह आंकड़े बढ़े हैं. मुंबई में दस साल तक के बच्चों की गुमशुदगी के मामलों को भी अपहरण के तहत ही दर्ज किया जाता है. आईपीसी में सेक्शन 166 ए के जुड़ने से अगर कोई अफसर छेड़छाड़ या बलात्कार के मामले को दर्ज करने में ढिलाई बरतता है तो उसे दो साल की सजा हो सकती है. ऐसे प्रावधानों की वजह से भी महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध को लेकर पुलिस ज्यादा सजग हुई है.