दक्षिण मुंबई का वार्ड 225 इस बार बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में खास चर्चा का केंद्र बना हुआ है. इसकी वजह यह है कि यह 227 वार्डों में इकलौता ऐसा वार्ड है, जहां महायुति के दो सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) आमने-सामने चुनावी मैदान में उतर चुके हैं.यह मुकाबला सिर्फ दलों के बीच नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व, स्थानीय पकड़ और भविष्य की नगर राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है.
बीजेपी बनाम शिवसेना: उम्मीदवारों का परिचय
इस हाई-प्रोफाइल वार्ड में बीजेपी ने मैदान में उतारा है हर्षिता नरवेकर को,जो महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नरवेकर की भाभी हैं.वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) की ओर से मौजूदा नगरसेविका सुजाता सनप चुनाव लड़ रही हैं, जो इस वार्ड से पहले ही दो बार जीत दर्ज कर चुकी हैं.दक्षिण मुंबई का यह वार्ड लंबे समय से शिवसेना का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है,ऐसे में बीजेपी का यहां से प्रत्याशी उतारना अपने आप में राजनीतिक संदेश देता है.
‘फ्रेंडली फाइट' या सियासी टकराव?
महायुति के नेताओं द्वारा इसे भले ही “फ्रेंडली फाइट” कहा जा रहा हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत में दोनों उम्मीदवार एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले करते नजर आ रहे हैं. मौजूदा नगरसेविका सुजाता सनप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमें चुनाव लड़ने के निर्देश मिले हैं. इसे फ्रेंडली फाइट कहा जा रहा है, लेकिन असली तस्वीर 16 जनवरी को सामने आएगी. यह मेरा स्थानीय वार्ड है. उन्होंने आगे कहा कि यह वार्ड सभी धर्मों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करता है और पहले भी जब बीजेपी और शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़े थे, तब शिवसेना ने जीत हासिल की थी.मैं तीसरे कार्यकाल के लिए पूरी तरह आश्वस्त हूं. स्थानीय मुद्दे सबसे अहम हैं—सड़कें, बुनियादी सुविधाएं और विकास.
बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हम 80% समाजसेवा और 20% राजनीति के सिद्धांत पर चलते हैं, अब हमारा लक्ष्य 100% समाजसेवा है. ठाकरे बंधुओं को चुनौती मानने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका फैसला जनता 16 जनवरी को करेगी.बीजेपी उम्मीदवार हर्षिता नरवेकर ने शिवसेना पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि हमारे सहयोगी इस सीट को छोड़ने को तैयार नहीं थे, लेकिन इस वार्ड में विकास की सख्त जरूरत है. इसलिए वरिष्ठ नेताओं ने फ्रेंडली फाइट का फैसला लिया. उन्होंने कहा कि दक्षिण मुंबई का वार्ड होने के बावजूद कई स्थानीय समस्याएं आज भी अनसुलझी हैं,जिनमें सबसे बड़ी समस्या कचरा प्रबंधन है. हमारा एकमात्र एजेंडा विकास है. बीएमसी में बीजेपी का होना जरूरी है, क्योंकि मुंबईकर विकास चाहते हैं.
पानी की समस्या और पुनर्विकास पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पानी की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा है. विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर के नेतृत्व में हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इमारतों का पुनर्विकास तेजी से हो. ठाकरे बंधुओं को लेकर उन्होंने सधे हुए लेकिन तीखे अंदाज में कहा कि कोई नहीं है टक्कर में क्यों खड़े हो चक्कर में.
वार्ड 225: क्यों है इतना अहम?
- यह दक्षिण मुंबई का प्रमुख वार्ड है
- शिवसेना का पारंपरिक गढ़ माना जाता है
- महायुति की आंतरिक शक्ति-संतुलन की परीक्षा
- 16 जनवरी के नतीजे भविष्य के गठबंधन समीकरण तय कर सकते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस वार्ड का परिणाम यह संकेत देगा कि महायुति के भीतर जमीनी स्तर पर तालमेल कितना मजबूत है.भले ही इसे “मैत्रीपूर्ण मुकाबला” कहा जा रहा हो, लेकिन वार्ड 225 की लड़ाई बीजेपी बनाम शिवसेना की असली ताकत का पैमाना बन चुकी है. अब देखना यह होगा कि जनता किसे विकास का सच्चा चेहरा मानती है.फैसला 16 जनवरी को होगा—जब मतपेटियां बताएंगी कि वार्ड 225 किसके साथ है.
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