BA में रामचरितमानस, मेडिकल की पढ़ाई हिन्दी में लेकिन अटल बिहारी हिन्दी विश्वविद्यालय में 74 कोर्स, 29 शिक्षक सब अतिथि!

मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में शुरू करने की भी योजना है, योजना मेडिकल में संघ संस्थापक डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार, जनसंघ के दीनदयाल उपाध्याय, डॉ भीमराव अंबेडकर सहित चरक, आचार्य सुश्रुत, और स्वामी विवेकानंद के विचारों को पढ़ाने की भी है.

भोपाल:

मध्यप्रदेश में अब BA फर्स्ट ईयर के छात्र भगवान श्री राम के बारे में पढ़ेंगे. उच्च शिक्षा विभाग ने 'रामचरितमानस का व्यावहारिक दर्शन' नाम से सिलेबस तैयार किया है.  वहीं इंजीनियरिंग के छात्र, इंजीनियरिंग के गुर सिखाने के लिए राम सेतु निर्माण के बारे में पढ़ेंगे, वहीं मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में शुरू करने की भी योजना है, योजना मेडिकल में संघ संस्थापक डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार, जनसंघ के दीनदयाल उपाध्याय, डॉ भीमराव अंबेडकर सहित चरक, आचार्य सुश्रुत, और स्वामी विवेकानंद के विचारों को पढ़ाने की भी है.

मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षामंत्री मोहन यादव चाहते हैं इसी साल से बीए प्रथम वर्ष के छात्र ऐसे ही दर्शनशास्त्र में 100 नंबरों के लिये रामचरितमानस का व्यावहारिक दर्शन पढ़ें हालांकि ये अनिवार्य नहीं वैकल्पिक होगा.

आदेश के मुताबिक, विषय का मुख्य उद्देश्य है पढ़ाई के बाद छात्र व्यक्तित्व विकास के विभिन्न आयामों पर केंद्रित होकर संतुलित नेतृत्व क्षमता व मानवतावादी दृष्टिकोण को विकसित करने योग्य बनें. छात्र उन जीवन मूल्यों को भी जान सकें, जिसकी समाज में आज जरूरत है. छात्र तनाव प्रबंधन और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में प्रेरक कुशल वक्ता बन सके. रामायण, रामचरितमानस के अलावा व्याख्यानों में वेद, उपनिषद का भी ज़िक्र है.

मोहन यादव कहते हैं रामायण हो, महाभारत हो, गौरवशाली महापुरूषों का जीवन हो, अहिल्याबाई, विक्रमादित्य, राजा भोज हैं -  नई शिक्षा नीति के माध्यम से हमें अतीत को पढ़ने का मौका मिलेगा, प्राचीन ज्ञान विज्ञान को समझ पाएंगे हम कल्पना कर सकते हैं रामसेतु की ... जिसे नासा ने भी सिद्ध किया है सुप्रीम कोर्ट में भी जीत मिली थी.


अंग्रेजी के फाउंडेशन कोर्स में सी राजगोपालचारी की महाभारत की प्रस्तावना पढ़ाई, दोनों भाषाओं में योग और ध्यान को भी तीसरे फाउंडेशन कोर्स के रूप में पेश किया गया है. इसमें ओम ध्यान और मंत्रों का पाठ शामिल है. उर्दू गजल, उर्दू जबान को भी पाठ्यक्रम में रखा गया है.

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हुक्मरानों के बयान और ऐलान आपने सुन लिये, हिन्दी विश्वविद्यालय की दशा देख ली अब हिन्दी के नाम पर सियासत की हकीकत भी जान लें, 2015 में करीब 10 करोड़ रुपए खर्च कर भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ, राजभाषा को लेकर 13 प्रमुख घोषणाएं हुई लेकिन 6 साल बाद 7 पर अमल शुरु हुआ, 6 अधूरी है.