
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने शांति मार्च निकाला. इसका नेतृत्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किया. रोशनपुरा चौराहे पर जनसभा हुई. पैदल मार्च रंगमहल चौराहे से शुरू होकर मिंटो हॉल में गांधी प्रतिमा के सामने पहुंचकर खत्म हुआ. इसमें हजारों की संख्या में लोग गांधी टोपी पहनकर और हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगे थे, पोस्टर थे, जिस पर लिखा था 'नागरिकता पर कैसा सवाल, हम सब हैं इस मिट्टी के लाल' और 'मुद्दों से भटकाना बंद करो, आपस में लड़वाना बंद करो.'
वैसे मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पहले ही साफ कर दिया है कि इस कानून को राज्य में लागू नहीं किया जाएगा. रैली के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ''आज जो एनआरसी और सीएए लाया गया है, यह संविधान पर हमला करने वाला कानून है. प्रश्न ये नहीं है कि इसमें क्या लिखा है, प्रश्न ये है कि इसमें क्या नहीं लिखा है. जो नहीं लिखा है, वह इसके दुरुपयोग के दरवाजे खोलता है. आज अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है, रोजगार नहीं है, किसान परेशान हैं. इस पर संसद में कोई बहस नहीं. जनता का ध्यान मोड़ने के लिए जो राजनीति बीजेपी ने की है वो साफ नजर आ रही है. शांतिपूर्ण मार्च किया है क्योंकि पूरे देश मे संदेश देना चाहते हैं कि किस प्रकार आने वाली पीढ़ी को बर्बाद किया जाएगा.''
वहीं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि ''नागरिकता का मुद्दा एक अलग चीज है. जिस तरह उनका छिपा हुआ एजेंडा है, उससे सावधान रहना चाहिए.'' वहीं कैबिनेट मंत्री जीतू पटवारी ने कहा ''प्रधानमंत्री आज बड़े बहुमत से जीते हों लेकिन एक दिन नहीं रहोगे. आज मैं जीवित हूं कल नहीं रहूंगा, लेकिन देश रहेगा, इसकी रक्षा करना हमारा दायित्व है.''
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इस बीच बीजेपी ने 15 दिनों का अभियान चलाने का फैसला किया है ताकि नागरिकता संशोधन से जुड़ी गलतफहमियों को दूर किया जा सके. बीजेपी नेता विश्वास सारंग ने कहा ''तुष्टिकरण के कारण जिस तरह से देश में असमंजस का माहौल पैदा कर रहे हैं, अराजकता का माहौल पैदा कर रहे हैं, घर-घर जाकर बताना होगा कि सीएए क्या है? इसके क्या परिणाम होंगे... ये नागरिकता लेने वाला नहीं, देने वाला कानून है. लेकिन मुझे शर्म आती है जब कांग्रेस और वाम दलों के नेता इस तरह से देश में अराजकता का माहौल पैदा करने की कोशिश करते हैं.''
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विरोध मार्च से पहले मंच पर मुख्यमंत्री कमलनाथ, उनके कैबिनेट के सहयोगियों के साथ सभी धर्मों के धर्मगुरू भी नजर आए.
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