Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक बार फिर शिवसेना (UBT) के भीतर बड़ी टूट के कयास लगाए जा रहे हैं. चर्चा है कि उद्धव गुट के 5 सांसद पार्टी से अलग होकर एक स्वतंत्र ब्लॉक बनाने की तैयारी में हैं. इन अफवाहों के बीच उद्धव ठाकरे ने रविवार को पार्टी सांसदों के साथ एक अहम बैठक की. सूत्रों के मुताबिक, ठाकरे ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की और नेताओं को कड़ा संदेश दिया.
सांसदों की बैठक को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने भावुक लेकिन कड़े लहजे में कहा कि भले ही आज समय उनके पक्ष में न हो, लेकिन भविष्य निश्चित रूप से उनका होगा. उन्होंने पार्टी नेताओं से कहा कि अच्छे दिनों के आने तक सभी को धैर्य रखना होगा और कड़ा संघर्ष करना होगा. इसके साथ ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि जो इंसान खुद ही छोड़कर जाना चाहता है, उसे जबरदस्ती रोकने का क्या फायदा? अगर कोई जाना चाहता है, तो उसे जाने दो. मैं केवल उन्हें शुभकामनाएं दे सकता हूं और उम्मीद कर सकता हूं कि वे जहां जाएं, वहां उनके लिए चीजें बेहतर हों.
2022 की बगावत को किया याद
बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने साल 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई ऐतिहासिक बगावत का भी जिक्र किया. ठाकरे ने कहा कि ऐसा नहीं था कि वह उस वक्त चल रही गतिविधियों से पूरी तरह अनजान थे. उन्हें सब पता था, लेकिन वह किसी भी नेता पर रुकने के लिए दबाव बनाने के पक्ष में नहीं थे.
TMC की राह पर चल सकते हैं 'नाराज' सांसद
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए शिवसेना (UBT) के 'नाराज' सांसद तृणमूल कांग्रेस (TMC) वाला फॉर्मूला अपना सकते हैं. चर्चा है कि ये सांसद किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने के बजाय, उद्धव गुट से अलग होकर संसद में एक स्वतंत्र समूह बना सकते हैं. इसके बाद, यह गुट बाहर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को अपना समर्थन दे सकता है.
शिवसेना में होगी 5वीं बगावत
यदि इन 5 सांसदों की बगावत हकीकत में बदलती है, तो यह शिवसेना के इतिहास में पांचवां सबसे बड़ा विभाजन होगा. इससे पहले बाल ठाकरे और उद्धव ठाकरे के दौर में पार्टी ने चार बड़े झटके झेले हैं. सबसे पहले 1991 में छगन भुजबल ने बगावत की. इसके बाद 2005 में शिवसेना-भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री रहे नारायण राणे ने पार्टी छोड़ दी. इसके अलावा, 2006 में राज ठाकरे का अलग होकर मनसे का गठन करने से बड़ा झटका लगा था. शिवसेना में सबसे बड़ी बगावत 2022 में एकनाथ शिंदे ने की थी, जिससे न सिर्फ उनकी सरकार गिर गई, बल्कि पार्टी दो धड़ों में बंट गई थी.
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आदित्य ठाकरे के सांसदों पर है अंधविश्वास
पुणे में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूटीबी) के नेता Aaditya Thackeray ने पार्टी के सांसदों पर पूरा भरोसा जताया. आदित्य ठाकरे ने कहा कि कुछ लोग अंधभक्त होते हैं, लेकिन हमें अपने सांसदों पर अंधविश्वास है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी को अपने सांसदों की निष्ठा पर पूरा भरोसा है और वे शिवसेना के साथ मजबूती से खड़े हैं. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब महाराष्ट्र की राजनीति में कथित "ऑपरेशन टाइगर" को लेकर चर्चाएं तेज हैं और पार्टी के 5 सांसदों के टूटने की अटकलें लगाई जा रही हैं. आदित्य ठाकरे ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि शिवसेना (यूटीबी) के सांसदों पर पार्टी का पूरा विश्वास है.
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