महाराष्ट्र के पालघर में एक अस्पताल में डॉक्टरों पर हुए हमले के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. मामले की जांच के दौरान केस डायरी का ठीक से रखरखाव न करने वाले पुलिस अधिकारी को दी गई सजा पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं. अदालत ने पुलिस अधीक्षक SP द्वारा की गई इस दंडात्मक कार्रवाई को "महज दिखावा" करार देते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक DGP से 12 अक्टूबर तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पालघर के एक अस्पताल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट और हमले से जुड़ा है. इस गंभीर प्रकरण की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी ने कानूनी नियमों के तहत 'केस डायरी' का उचित रखरखाव नहीं किया था. केस डायरी किसी भी आपराधिक मामले की जांच का एक सबसे अहम दस्तावेज होता है, जिसमें जांच की दिन-प्रतिदिन की प्रगति दर्ज की जाती है. इसमें लापरवाही बरतने की बात सामने आने पर जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी.
इस मामले में पालघर के पुलिस अधीक्षक SP ने संबंधित जांच अधिकारी IO की तीन वेतनवृद्धि Increments रोकने की सजा प्रस्तावित की थी. हालांकि, अदालत ने इस प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए.

'जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई केवल दिखावा'
हाईकोर्ट ने पूछा कि जब अदालत ने इस मामले के सभी दस्तावेज सीधे पुलिस महानिदेशक के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था, तो DGP द्वारा इस चूक की समीक्षा करने से पहले ही SP ने अपने स्तर पर सजा कैसे तय कर दी? अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी पर की गई यह कार्रवाई न्यायसंगत कम और "केवल दिखावा" ज्यादा लगती है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या DGP के आदेशों और दिशा-निर्देशों का पालन न करना केवल एक मामूली अपराध माना जा सकता है? अदालत ने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा है कि यह घोर लापरवाही मामूली सजा के दायरे में आती है या इसके लिए किसी गंभीर दंडात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है.
सरकारी वकील की दलील और कोर्ट का निर्देश
इस दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सरकारी वकील ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि इस घटना के संबंध में डॉक्टरों के खिलाफ SC/ST अधिनियम के तहत कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया है.
पूरी स्थिति का संज्ञान लेते हुए, हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस मामले की समीक्षा करें और 12 अक्टूबर 2026 तक अदालत में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करें. इस रिपोर्ट के आधार पर ही अदालत आगे का रुख तय करेगी.
इनपुटृ- ऋतिक गणकवर
यह भी पढ़ें - पालघर के अस्पताल में बिल को लेकर बवाल, शिवसेना पदाधिकारियों का हंगामा, डॉक्टर-कर्मचारियों से मारपीट
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं