- मुंबई में गणेशोत्सव पर प्रसाद बनाने-बांटने की जगह पर स्वच्छता के कड़े नियम लागू किए गए हैं
- FDA ने महा-प्रसाद में शुद्धता लागू करने के लिए 'फेस्टिवल एनफोर्समेंट कैलेंडर' लागू किया है.
- भोजन सिर्फ रजिस्टर्ड और फूड लाइसेंस प्राप्त सप्लायर्स से खरीदना होगा.
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गणेशोत्सव की धूम हर तरफ देखने को मिल रही है. ढोल-नगाड़ों की गूंज और बप्पा के जयकारों के बीच, भक्तों को सबसे ज्यादा इंतजार होता है 'महा-प्रसाद' का. लेकिन इस साल मुंबई के गणपति पंडालों में बंटने वाले इस महा-प्रसाद को लेकर एक बड़ा बदलाव आया है. महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन एफडीए ने प्रसाद की शुद्धता और साफ-सफाई को लेकर बेहद सख्त नियम लागू कर दिए हैं. एफडीए प्रमुख तुकाराम मुंडे के निर्देशों के मुताबिक, अब कोई भी पंडाल बिना उचित मानकों का पालन किए महा-प्रसाद नहीं बांट सकेगा.
क्या हैं FDA के नए नियम?
FDA द्वारा लागू किए गए 'फेस्टिवल एनफोर्समेंट कैलेंडर' के तहत प्रसाद की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
- प्रसाद का कच्चा माल या बना हुआ भोजन केवल रजिस्टर्ड और फूड लाइसेंस प्राप्त सप्लायर्स से ही खरीदा जा सकता है.
- खरीदी गई हर सामग्री का पक्का बिल और रिकॉर्ड मेंटेन करना जरूरी है.
- पंडालों को यह पता होना चाहिए कि प्रसाद में इस्तेमाल होने वाली हर चीज कहां से आई है.
- प्रसाद बनाने और बांटने की जगह पर स्वच्छता के कड़े मापदंड लागू होंगे.
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छोटे मंडलों पर सीधा असर!
बड़े पंडाल पहले से ही प्रोफेशनल और लाइसेंस प्राप्त कैटरर्स का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए उनके लिए यह केवल थोड़ी अतिरिक्त कागजी कार्रवाई है. लेकिन छोटे मंडल जो चंदे से चलते हैं और स्वयंसेवकों की मदद से स्थानीय स्तर पर प्रसाद बनाते हैं, इन नए नियमों और बजट के कारण खुद को बदलने पर मजबूर हैं.
GSB मंडल ने पेश की मिसाल...
मुंबई का मशहूर GSB गणपति सेवा मंडल हर साल अपनी भव्यता और महा-प्रसाद के लिए जाना जाता है. यहां एक दिन में करीब 40 हजार श्रद्धालु महा-प्रसाद ग्रहण करते हैं. इतने बड़े पैमाने पर प्रसाद बांटने के बावजूद, GSB मंडल ने FDA की गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन कर एक मिसाल पेश की है.
GSB गणपति सेवा मंडल के प्रवक्ता, विजय कामत बताते हैं, "हमने सप्लायर को स्पेशल इंस्ट्रक्शन दिए हैं कि क्वालिटी का विशेष खयाल करें. हम सिर्फ शुद्ध घी का इस्तेमाल कर रहे हैं. प्रसाद बांटते वक्त वॉलंटियर्स कैप पहन रहे हैं और हर वक्त साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. क्वालिटी पर हमने पहले से ही खासा ध्यान दिया है, लेकिन FDA के नियमों के बाद हम और ज्यादा सख्ती बरत रहे हैं. हम पूरा रिकॉर्ड मेंटेन कर रहे हैं, लूज सामग्री नहीं खरीद रहे. हमने कई तब्दीलियां की हैं, जिससे इतने मशहूर मंडल का नाम कभी बदनाम ना हो."
बप्पा के दरबार में आने वाले भक्त भी प्रसाद की इस शुद्धता और पंडाल की व्यवस्था से बेहद संतुष्ट नजर आए और FDA के नए गाइडलाइन्स कि तारीफ की.
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श्रद्धालुओं ने क्या कहा?
प्रसाद ग्रहण करते हुए श्रद्धालुओं ने एनडीटीवी के साथ बातचीत में कहा, "यहां के प्रसाद की क्वालिटी बहुत अच्छी है. हम लाइन में लगते हैं, इंतजार करते हैं, क्योंकि यहां बहुत साफ-सफाई बरती जा रही है. कहीं भी ऐसा प्रसाद नहीं मिलता. इकलौती जगह है, जहां इतनी अच्छी क्वालिटी का प्रसाद मिलता है."
बड़े मंडलों की तुलना में छोटे मंडलों के लिए रजिस्टर मेंटेन करना, सीसीटीवी लगाना और कागजी कार्रवाई करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, लेकिन कुल मिलाकर ज्यादातर मंडलों ने पब्लिक हेल्थ और फूड सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए इस फैसले का स्वागत किया है.
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