- महाराष्ट्र के FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे की सख्त कार्रवाई के कारण उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग की गई है
- आम्ही गिरगावकर संगठन ने अमित शाह को पत्र भेजकर मराठी हितों की रक्षा के लिए तुकाराम मुंढे की जरूरत बताई है
- संगठन ने मराठी समाज के साथ कथित अन्याय रोकने और नई इमारतों में मराठी परिवारों के लिए आरक्षण की मांग की है
महाराष्ट्र में अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे एक बार फिर सुर्खियों में हैं. मिलावटखोरों के खिलाफ उनकी लगातार सख्त कार्रवाई और प्रशासनिक फैसलों की चर्चा के बीच एक मराठी संगठन ने उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर दी है. इस मांग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक विस्तृत पत्र भी भेजा गया है.
दक्षिण मुंबई के गिरगांव क्षेत्र से जुड़े मराठी संगठन 'आम्ही गिरगावकर' ने पत्र में दावा किया है कि महाराष्ट्र और मराठी समाज के हितों की रक्षा के लिए तुकाराम मुंढे जैसे निडर और सख्त प्रशासनिक अधिकारी की जरूरत है.
मराठी हितों के लिए मुंढे को बताया जरूरी
संगठन ने अपने पत्र में कहा है कि महाराष्ट्र और मराठी लोगों के हित में बिना किसी राजनीतिक दबाव के निडर होकर फैसले केवल तुकाराम मुंढे ही ले सकते हैं. पत्र में यह भी मांग की गई है कि मराठी भाषियों के साथ कथित अन्याय रोकने के लिए नए कानून बनाए जाएं. साथ ही नई इमारतों में मराठी परिवारों के लिए घर आरक्षित करने की व्यवस्था पर विचार किया जाए. संगठन का कहना है कि मुंबई की महत्वपूर्ण संपत्तियों, आरक्षित मैदानों और सार्वजनिक जमीनों को लोगों के प्रभाव से बचाने के लिए भी मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है.

मराठी संघठन ने यह पत्र अमित शाह को लिखा है.
मुंबई और मराठी समाज से जुड़े कई मुद्दे उठाए
संगठन ने पत्र में आरोप लगाया है कि कुछ क्षेत्रों में स्थानीय कोली समुदाय को मछली बेचने से रोका जा रहा है. इसके अलावा कुछ बिल्डरों पर मराठी लोगों को फ्लैट और घर नहीं बेचने के आरोप भी लगाए गए हैं. इन मामलों में सख्त कानून बनाने की मांग की गई है.
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि मुंबई के आरक्षित मैदान, भूखंड और महत्वपूर्ण बंदरगाह धीरे-धीरे बाहरी धनाढ्य लोगों के नियंत्रण में जा रहे हैं. संगठन के अनुसार इन संपत्तियों की रक्षा के लिए कठोर प्रशासनिक हस्तक्षेप जरूरी है.
राज ठाकरे की तारीफ, सरकार पर भी निशाना
पत्र में मनसे प्रमुख राज ठाकरे की खुलकर प्रशंसा की गई है. संगठन ने लिखा है, "अगर कोई यह सोच रहा है कि आज वंदनीय बालासाहेब ठाकरे हयात नहीं हैं, इसलिए वे मुंबई पर कब्जा कर लेंगे, तो वे इस भ्रम से बाहर आ जाएं. क्योंकि आज भी राजसाहेब ठाकरे इस सब को रोकने के लिए मजबूती से खड़े हैं."
इसके साथ ही संगठन ने नाराजगी जताई कि बाहरी लोगों के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई जा रही हैं, जबकि पुलिसकर्मियों, मनपा कर्मचारियों, मिल मजदूरों और दमकल कर्मियों को मुफ्त आवास देने जैसे मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
आंदोलन की चेतावनी भी दी
पत्र के अंत में संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मराठी समाज से जुड़े इन मुद्दों और मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह 'संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन' से भी अधिक उग्र आंदोलन की चिंगारी साबित हो सकता है.
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