- ठाणे के स्थानीय निकाय चुनाव में जीत के बाद एमआईएम की सहर शेख ने मुंब्रा को हरे रंग में रगने वाला बयान दिया था
- सहर शेख ने सफाई देते हुए कहा कि हरे रंग में रंगने का तात्पर्य उनकी पार्टी के झंडे से था, न कि साम्प्रदाय से
- सहर शेख के अनुसार अगर पार्टी का झंडा भगवा होता तो वह मुंब्रा को भगवा रंग में रंगने की बात करतीं
महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों के बाद ठाणे के मुंब्रा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. एमआईएम (AIMIM) के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज करने वाली सहर शेख इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं. मामला तूल पकड़ता देख उन्होंने अब अपने बयान पर सफाई दी है.
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ओवैसी की पार्षद की सफाई
सहर ने सफाई देते हुए कहा है कि मेरी पार्टी का झंडा हरे रंग का है, इसीलिए उन्होंने मुंब्रा को हरे रंग से रंगने की बात कही है. अगर उनकी पार्टी का झंडा भगवा होता तो वह कहतीं कि उनको मुंब्रा को भगवा कलर में रंगना है. दुर्भाग्य से उनकी पार्टी का झंडा ऑरेंज नहीं है इसीलिए वह ऐसा स्टेटमेंट नहीं दे पाईं. हरे रंग में रंगने से उतना मततलब पार्टी के झंडे से था. जो लोग भी इसके कई सारे मतलब निकाल रहे हैं, ये उनकी मर्जी है. देश आजाद है, जिसे जो सोचना है वह सोच सकता है. सहर ने कहा कि हरे रंग से उनका कोई कम्युनल मतलब नहीं था.

सहर शेख के बयान पर क्यों मचा बवाल?
हाल ही में ISC की परीक्षा देने वाली सहर शेख ने कहा है कि आने वाले समय में वे 'पूरे मुंब्रा को हरे रंग में रंग देंगी'. उनके इस बयान और विरोधियों को लेकर दिए गए "कैसा हराया..." वाले जुमले की चर्चा पूरे ठाणे जिले में हो रही है.
सहर शेख को मिले कितने वोट?
प्रभाग क्रमांक 30 के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो एमआईएम के उम्मीदवारों ने एकतरफा बढ़त बनाई है. सहर शेख को 12,964 वोट मिले, जबकि उनके साथी उम्मीदवारों नफीस अंसारी, सुल्ताना शेख और शोएब डोंगरे को भी भारी जनसमर्थन प्राप्त हुआ. दूसरी ओर, शरद पवार गुट (तुतारी) की नजमा साजिद अंसारी और उनके पैनल को करारी हार का सामना करना पड़ा है.
सहर शेख की इस जीत के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि मुंब्रा के कद्दावर नेता और विधायक जितेन्द्र आव्हाड के गढ़ में एमआईएम की यह बढ़त आने वाले समय में क्या चुनौती पेश करेगी.
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