- भूपति ने तीन दशक तक नक्सली कमांडर के रूप में सक्रिय रहते हुए बड़े अभियान संचालित किए थे.
- भूपति ने पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने हथियार डालकर सरेंडर किया था.
- अब वह गोंडवाना यूनिवर्सिटी में कोऑर्डिनेटर के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे.
मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति, वो नक्सली कमांडर जिसे कुछ समय पहले तक लाल आतंक का सबसे बड़ा 'दिमाग' माना जाता था, अब एक यूनिवर्सिटी में कॉलेज के छात्रों को पढ़ाएगा. स्वतंत्रता सेनानी के पोते से लेकर माओवादी संगठन की सबसे ताकतवर इकाई 'पोलित ब्यूरो' के सदस्य तक का सफर तय करने वाला भूपति उर्फ वेणुगोपाल उर्फ सोनू दादा करीब तीन दशक तक घने जंगलों में खौफ का पर्याय रहा. इस 6 करोड़ के इनामी कमांडर का एक दौर में ऐसा रसूख था कि उसके एक इशारे पर पूरे भारत का नक्सली नेटवर्क हिल जाता था.
गढ़चिरौली की गोंडवाना यूनिवर्सिटी में कोऑर्डिनेटर बने भूपति
पूर्व नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने हथियार डालकर सरेंडर किया था. अब उन्होंने अपनी जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू किया है. वह अब गढ़चिरौली की गोंडवाना यूनिवर्सिटी में एक पहल के लिए कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम करेंगे और आदिवासी ग्रामीणों के अधिकारों से जुड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालेंगे.
बचपन से था टीचर बनने का सपना, अब हुआ पूरा... NDTV से बोले भूपति
NDTV से बात करते हुए भूपति ने बताया कि बचपन से ही उनका सपना टीचर बनने का था. अब यह सपना सच हो रहा है. मालूम हो कि नक्सलियों के बीच भूपति अपनी तेजतर्रार रणनीतियों और संगठन में गहरी पैठ रखने वाले कमांडर के रूप में जाने जाते थे. भूपति का कभी भारतीय सेना में जाने का सपना था, लेकिन किस्मत ने उसे विद्रोह की राह पर धकेल दिया. वही 'सोनू दादा' 15 अक्टूबर 2025 को गढ़चिरौली में अपनी AK-47 सौंपकर मुख्यधारा में लौटा आया है.
उल्लेखनीय हो कि भूपति नक्सली आंदोलन के सबसे वरिष्ठ, प्रभावशाली नेताओं और रणनीतिकारों में से एक माना जाता था. वो 40 वर्षों से संगठन में सक्रिय था और छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र-तेलंगाना के 'रेड कॉरिडोर' में अभियानों का संचालन करता था और भाकपा (माओवादी) का प्रवक्ता भी था.
जब नक्सली कमांडर भूपति ने किया था सरेंडर, देखें वीडियो
भूपति ने बी कॉम तक की पढ़ाई की है
भूपति ने बी कॉम तक की पढ़ाई की है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) या भाकपा माओवादी भारत का प्रमुख भूमिगत नक्सली संगठन है. इसकी स्थापना दो खूंखार नक्सली संगठनों के आपसी विलय के बाद हुई. 22 जून,2009 को भारत सरकार ने भाकपा माओवादी को आतंकवादी संगठन घोषित करते हुए इसे प्रतिबंधित कर दिया. अब वह गोंडवाना यूनिवर्सिटी में आदिवासी ग्रामीणों के अधिकारों से जुड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालेंगे.
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