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This Article is From Oct 22, 2025

अमरावती: दिवाली के बाद पारंपरिक गाय-भैंस खेल में हंगामा, पुलिस और भीड़ में झड़प

खेल के दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों में तीखी नोकझोंक हुई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई. नागरिकों ने पुलिस के वाहन पर पटाखे फोड़े और पुलिस गाड़ी पर पत्थर फेंकने की भी खबर है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा.

अमरावती: दिवाली के बाद पारंपरिक गाय-भैंस खेल में हंगामा, पुलिस और भीड़ में झड़प
  • महाराष्ट्र के अमरावती जिले के तिवसा शहर में दिवाली के बाद पारंपरिक गाय-भैंस खेल पर इस बार विवाद हुआ
  • खेल के दौरान पुलिस और स्थानीय नागरिकों के बीच झड़प हुई, जिससे पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा
  • यह खेल मकाजी बुवा मंदिर के पास आयोजित होता है, जहां सजे-धजे जानवरों को दौड़ाया या प्रदर्शित किया जाता है
अमरावती:

महाराष्ट्र के अमरावती जिले के तिवसा शहर में दिवाली के दूसरे दिन आयोजित होने वाले गाय-भैंस के सदियों पुराने पारंपरिक खेल को इस बार ग्रहण लग गया है. खेल के दौरान पुलिस और स्थानीय नागरिकों के बीच झड़प और हंगामा हुआ, जिसके बाद हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा.

तिवसा में पुराने ग्राम पंचायत कार्यालय के सामने स्थित मकाजी बुवा मंदिर के पास हर साल दिवाली के अगले दिन यह पारंपरिक खेल आयोजित किया जाता है. हालांकि, इस साल खेल को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस बंदोबस्त तैनात था, लेकिन कुछ नागरिकों ने हंगामा खड़ा कर दिया.

खेल के दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों में तीखी नोकझोंक हुई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई. नागरिकों ने पुलिस के वाहन पर पटाखे फोड़े और पुलिस गाड़ी पर पत्थर फेंकने की भी खबर है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा.

कुछ स्थानीय लोगों द्वारा परंपरा के नाम पर किए गए इस हंगामे के कारण यह खेल विवाद में घिर गया है. इस खेल में गायों और भैंसों को पारंपरिक रूप से सजाया जाता है. सजे-धजे गायों और भैंसों को एक खास जगह पर लाया जाता है और उन्हें नियंत्रित रूप से दौड़ाया जाता है या उनका प्रदर्शन किया जाता है.

इस खेल की एक विवादास्पद और सदियों पुरानी परंपरा यह रही है कि इस दौरान जानवरों के शरीर के आसपास या एक-दूसरे के ऊपर पटाखे फोड़े जाते हैं. स्थानीय लोग इसे एक तरह का उत्सव मानते हैं, लेकिन पशु अधिकार कार्यकर्ता इसे क्रूरता मानते हैं. इस खेल को देखने के लिए हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिक और गुराखी (चरवाहे) इकट्ठा होते हैं, जिससे भारी भीड़ और उत्साह का माहौल रहता है.

यह खेल पारंपरिक रूप से चलता आ रहा है, लेकिन पशुओं पर पटाखे फोड़ने की वजह से अक्सर यह विवादों में रहता है और हर साल इसे शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने के लिए पुलिस बंदोबस्त लगाना पड़ता है.

लेखक के बारे में
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पूजा भारद्वाज
Associate Editor -Current Affairs
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