- पुणे की रेस्क्यू फाउंडेशन संस्था से 13 बांग्लादेशी लड़कियां केयरटेकर और सुरक्षाकर्मी पर हमला कर भाग गईं थीं
- लड़कियों ने दवा लेने के बहाने केयरटेकर से दरवाजा खुलवाया और फिर उस पर हमला कर उसे बंद कर दिया था
- भागने के दौरान लड़कियों ने परिसर का खुला दरवाजा और सुरक्षाकर्मी के हाथ को काटकर अपनी राह बनाई
पुणे की रेस्क्यू फाउंडेशन नाम की संस्था से 13 बांग्लादेशी लड़कियों के भाग जाने की खबर है. बताया जा रहा है कि भागने से पहले लड़कियों ने केयरटेकर को बंधक बना लिया था. इसके बाद उन्होंने सुरक्षाकर्मी को भी दांतों से काटा. लड़कियों के भागने की सूचना मिलते ही आसपास खोजबीन शुरू की गई. दो लड़कियां मिल गई हैं लेकिन 11 अब भी गायब हैं.
मामला पुणे की मोहम्मदवाड़ी रोड पर स्थित रेस्क्यू फाउंडेशन संस्था का है. इसी संस्था से 13 बांग्लादेशी लड़कियां भाग गई थीं. बताया जा रहा है कि इन लड़कियों ने रेस्क्यू सेंटर की केयरटेकर और सुरक्षाकर्मी पर हमला किया और भाग गईं.
कैसे भागी लड़कियां?
जानकारी के अनुसार, एक बांग्लादेशी लड़की ने दवा लेने के बहाने केयरटेकर लक्ष्मी कांबले से दरवाजा खोलने को कहा. जैसे ही दरवाजा खुला, पीछे से 4 और लड़कियों ने मिलकर लक्ष्मी पर हमला कर दिया. उनके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और उन्हें जबरन मेडिकल रूम में बंद कर दिया.
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सुरक्षाकर्मी ने रोका तो उसे काट लिया
जिस समय लड़कियों ने केयरटेकर को बंधक बनाया, उसी समय परिसर में सफाई चल रही थी. इस कारण मुख्य दरवाजा गलती से खुला रह गया था. इसका फायदा उठाकर 13 लड़कियां बाहर की ओर भागीं. उन्होंने रास्ते में सुरक्षाकर्मी को भी नहीं बख्शा, उसे घसीटा और हाथ पर काट लिया गया. यह पूरी घटना CCTV कैमरों में कैद हो गई है.
2 मिलीं, 11 लड़कियां अब भी लापता
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तलाशी अभियान शुरू किया. सैयद नगर और हडपसर इलाके से दो लड़कियों को पकड़ लिया गया है, लेकिन 11 लड़कियां अब भी लापता हैं. कालेपडल और हडपसर पुलिस फरार लड़कियों की तलाश कर रही है. हालांकि, अभी तक इस मामले में औपचारिक FIR दर्ज नहीं हुई है, केवल जनरल डायरी में एंट्री की गई है. संस्था के प्रबंधन ने सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है.
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संस्था का दावा- पुलिस सुरक्षा हटा ली गई थी
संस्था के अनुसार, 16 मार्च 2024 से उन्हें दी गई पुलिस सुरक्षा हटा ली गई थी. बार-बार मांग करने के बावजूद सुरक्षा बहाल नहीं की गई. फाउंडेशन में अभी क्षमता से ज्यादा महिलाएं रह रही हैं. ये लड़कियां मानव तस्करी से बचाई गई थीं. बांग्लादेश वापस भेजने की कानूनी प्रक्रिया में 1 से 2 साल का समय लगता है. इस लंबी देरी के कारण लड़कियों में तनाव बढ़ रहा था. पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर भागी हुई 11 लड़कियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है.
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