- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत प्रदान की.
- सौरभ शर्मा के खिलाफ 52 किलो सोना, 200 किलो चांदी और 10 करोड़ रुपये नकद बरामदगी के बाद जांच जारी है.
- प्रवर्तन निदेशालय ने जमानत का कड़ा विरोध किया था, यह आरोप लगाते हुए कि आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है.
मध्य प्रदेश के चर्चित 52 किलो सोना, 200 किलो और 10 करोड़ रुपये नकद बरामदगी मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है. परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी. करीब 18 महीने से जेल में बंद सौरभ शर्मा अब अदालत की शर्तों का पालन करते हुए रिहा हो सकेंगे. सौरभ शर्मा वही नाम है, जो दिसंबर 2024 में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था, जब उसके ठिकानों और उससे जुड़ी एक कार से करोड़ों रुपये की नकदी, सोना और चांदी बरामद हुई थी. इस मामले की जांच अब भी लोकायुक्त, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहे हैं. एजेंसियों का मानना है कि सौरभ की विदेशों तक में करोड़ो की संपत्ति है.
हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सौरभ शर्मा की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें राहत प्रदान की है. जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया. कोर्ट ने लंबी न्यायिक हिरासत और ट्रायल में हो रही देरी को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर की है. बताया गया है कि अदालत ने 31 जुलाई को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसके बाद मंगलवार शाम आदेश जारी किया.
पहले दो बार खारिज हो चुकी थी जमानत
सौरभ शर्मा को यह राहत तीसरे प्रयास में मिली है. इससे पहले जिला अदालत और हाई कोर्ट दोनों उनकी नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर चुके थे. इतना ही नहीं, पत्नी की बीमारी का हवाला देकर मांगी गई अंतरिम जमानत भी अदालत ने स्वीकार नहीं की थी. इस बार बदली परिस्थितियों और लंबे समय तक जेल में रहने के आधार पर नई याचिका दायर की गई थी, जिस पर कोर्ट ने राहत दी.

सौरभ शर्मा के पास से बरामद हुए कैश को गनती ईडी की टीम.
ED ने किया था कड़ा विरोध
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया. एजेंसी का तर्क था कि यह गंभीर आर्थिक अपराध का मामला है. ED ने अदालत को बताया कि आरोपी पर अपराध से अर्जित संपत्ति को विभिन्न कंपनियों, रिश्तेदारों और सहयोगियों के माध्यम से छिपाने के आरोप हैं. एजेंसी ने आशंका जताई कि जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है. इसी आधार पर ED ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया.
किन शर्तों पर मिली जमानत?
- हाई कोर्ट ने सौरभ शर्मा को कुछ सख्त शर्तों के साथ जमानत दी है.
- 10 लाख रुपये का निजी मुचलका जमा करना होगा.
- 10 लाख रुपये की स्थानीय जमानत देनी होगी.
- किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे.
- सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे.
- अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे.
- ट्रायल कोर्ट में हर सुनवाई पर उपस्थित रहना होगा.
कौन है सौरभ शर्मा?
सौरभ शर्मा परिवहन विभाग में आरक्षक के पद पर कार्यरत रहे हैं. उन्हें अनुकंपा नियुक्ति के तहत नौकरी मिली थी. कुछ वर्षों तक सेवा करने के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी. हालांकि बाद में उनके पास मौजूद संपत्ति और आर्थिक गतिविधियां जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गईं. लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच शुरू हुई.

बड़ी मात्रा में बरामद हुआ कैश.
52 किलो सोना और 10 करोड़ कैश मिलने से मचा था हड़कंप
दिसंबर 2024 में लोकायुक्त की टीम ने भोपाल की अरेरा कॉलोनी स्थित सौरभ शर्मा के घर पर छापा मारा था. इस कार्रवाई के अगले दिन भोपाल के मेंडोरा क्षेत्र में लावारिस खड़ी एक इनोवा कार से 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे. जांच में यह दावा किया गया कि कार सौरभ शर्मा से जुड़ी हुई थी. इस खुलासे के बाद प्रदेश भर में हड़कंप मच गया था.
छापेमारी में मिली थी बेहिसाब संपत्ति
जांच एजेंसियों ने सौरभ शर्मा के अन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई की थी. छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये की नकदी, 200 किलो से अधिक चांदी और कई अन्य मूल्यवान संपत्तियां मिलने का दावा किया. लोकायुक्त, आयकर विभाग और ED की जांच में यह आरोप सामने आया कि परिवहन विभाग में नौकरी के दौरान उन्होंने बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की. जांच एजेंसियां कथित अवैध वसूली और वित्तीय लेनदेन के नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं.
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