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Who is Dilip Gavit: इलाज के अभाव में गंवाया हाथ, अब खेतों में काम करने वाले महाराष्ट्र के एक किसान के बेटे ने जीता गोल्ड

Dilip Gavit scripts history: भारत के सबसे प्रेरणादायक पैरा एथलीटों में से एक हैं, दिलीप गावित जो महाराष्ट्र के नासिक जिले के छोटे से गांव तोरण डोंगरी से आते हैं, उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों को मात देकर इंटरनेशनल स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है.

Who is Dilip Gavit: इलाज के अभाव में गंवाया हाथ, अब खेतों में काम करने वाले महाराष्ट्र के एक किसान के बेटे ने जीता गोल्ड
Commonwealth Games 2026 | Dilip Gavit wins gold as India seals historic 1-2 in men’s 100m T47

Who is Dilip Gavit: शारीरिक कमी, गरीबी या कठिन परिस्थितियां सफलता की राह नहीं रोक सकतीं, यही कहानी है  दिलीप गावित की, बचपन में अपना हाथ खोने वाले  दिलीप गावित ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा में  10.71 सेकंड में दूरी तय करके दिलीप ने कॉमनवेल्थ गेम्स में रिकॉर्ड बनाकर गोल्ड मेडल जीतने में सफलता हासिल की. आज दिलीप ने गोल्ड जीता है लेकिन आज उनके संघर्ष की भी जीत है. 

कौन है दिलीप गावित

दिलीप महादु गावित महाराष्ट्र के एक भारतीय पैरा-एथलीट हैं जो स्प्रिंट इवेंट्स में हिस्सा लेते हैं. बचपन में एक गंभीर चोट लगने और समय पर इलाज न मिल पाने के कारण अपनी दाहिनी बांह गंवाने के बावजूद, वे भारत के प्रमुख पैरा-स्प्रिंटर्स में से एक बनकर उभरे हैं. महाराष्ट्र में नासिक के पास तोरण डोंगरी गांव में जन्मे दिलीप एक साधारण किसान परिवार से आते हैं. 

पेड़ से गिरने के कारण लगी चोट, समय पर इलाज नहीं मिलने से खोया हाथ

जब वह लगभग 5 साल के थे, तो पेड़ से गिरने के कारण उनके हाथ में गंभीर चोट लग गई. बाद में उस चोट का सही समय पर इलाज नहीं हो पाया जिसके कारण उन्हें गैंग्रीन हो गया, जिसके कारण उनकी दाहिनी बांह को कोहनी के नीचे से काटना पड़ा. इस मुश्किल हालात को अपनी जिंदगी पर हावी होने देने के बजाय, उन्होंने एथलेटिक्स का रुख किया और दौड़ने में अपनी प्रतिभा को पहचाना. कोच वैजनाथ काले ने उनकी इस काबिलियत को पहचाना और उनके खेल करियर को संवारने में मदद की.

दिलीप गावित की प्रमुख उपलब्धियां

  • 2022 एशियाई पैरा गेम्स में पुरुषों की 400 मीटर T47 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता.
  • पेरिस पैरालंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया.
  • ग्लासगो में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा में 10.71 सेकंड के गेम्स रिकॉर्ड समय के साथ गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा. वह एथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष पैरा-एथलीट बने.

आज दिलीप ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है. उनकी कहानी युवा पीढ़ी को प्रेरणा देगी. दिलीप गावित की कहानी हिम्मत, पक्के इरादे और खुद पर विश्वास का एक जबरदस्त उदाहरण है. एक छोटे से खेती वाले गांव और जिन्दगी बदलने वाली विकलांगता से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन बनने तक, उन्होंने दिखाया है कि कड़ी मेहनत और लगन से मुश्किलों को भी कामयाबी में बदला जा सकता है.
 

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